गर्भावस्था में माँ के हर आचरण, व्यवहार और खान पान का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को यह सलाह दी जाती है कि पौष्टिक आहार का सेवन करें और मांस- मदिरा, धूम्रपान आदि से परहेज करें। इस विषय में सदियों पुरानी चिकित्सा पद्धति “आयुर्वेदा” और आधुनिक चिकित्सा पद्धति दोनों का एक ही मत है। अक्सर डॉक्टर्स यह सलाह देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शराब का प्रभाव
आयुर्वेद में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष आहार विहार बतलाया गया है, जिसको अपनाकर वह स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। गर्भवती महिला के शरीर में वात-पित्त और कफ का संतुलन होना बहुत जरुरी है लेकिन शराब पीने से शरीर में पित्त दोष का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे आपकी ऊर्जा का नाश होता है और बच्चे पर भी नाकारात्मक असर पड़ सकता है। इस दौरान बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए ओज का संतुलन बहुत जरुरी है। शराब के सेवन से ओज कमजोर होता है और बच्चे के सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है।
बच्चे पर शराब के दुष्प्रभाव
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा के अनुसार शराब के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु को अच्छे से पोषण नहीं मिल पाता है और उसका विकास बाधित होता है। इससे बच्चे की लम्बाई छोटी रह जाती है और वजन पर भी इसका असर देखा जा सकता है। गर्भावस्था में शराब पीने से बच्चे का मस्तिष्क कमजोर हो जाता है और वह कोई भी चीज जल्दी सीख नहीं पाता है। ऐसे बच्चों को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है और वह अपेक्षाकृत अधिक चिड़चिड़े होते हैं।
आयुर्वेद क्या सलाह देता है?
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को सात्विक भोजन का सेवन ही करना चाहिए। इस दौरान आपके तन और मन दोनों का शुद्ध होना बहुत जरुरी है। ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो आसानी से पांच जाए, ताजा हो और जिसमे सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद हों। नशीली पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए और भरपूर नींद लेनी चाहिए।
स्वस्थ गर्भावस्था के लिए प्राकृतिक विकल्प
गर्भवती महिलाओं को जब बहुत ज्यादा थकान या स्ट्रेस हो तब शराब की बजाए हर्बल टी, नारियल पानी, या ताजे फलो का सेवन करना चाहिए। उन्हें नियमित योग और ध्यान करना चाहिए, इससे चित्त शांत होता है और विचारों की शुद्धि होती है। नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट वॉक करें और अपने परिवार या मित्रजनों से बात करें। इससे आपका तनाव कम होगा और बच्चे के विकास में भी मदद मिलेगी।

