लू से बचकर रहिए : छह दिन दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में भीषण हीटवेव, पहाड़ी राज्यों के मैदानी जिलों में भी बुरा हाल 

उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। सूरज की तपिश ऐसी है कि सुबह 9 बजे के बाद ही सड़कें तवे जैसी महसूस होने लगी हैं। दोपहर में हालात इतने खराब हो रहे हैं कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। मौसम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि अगले छह दिनों तक दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से को राहत मिलने वाली नहीं है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र तक गर्म हवाओं का असर लगातार बढ़ रहा है।

कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि कुछ इलाकों में पारा 47 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया है। सबसे ज्यादा गर्म उत्तर प्रदेश का बांदा जिला रहा, जहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दिल्ली-एनसीआर में भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में दोपहर के समय लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक यहां अगले छह दिनों तक अधिकतम तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है। खास चिंता की बात यह है कि रातें भी गर्म बनी रहेंगी और लोगों को राहत नहीं मिलेगी। राजस्थान इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल है। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, गंगानगर, बाड़मेर, पिलानी, कोटा, चित्तौड़गढ़ और जैसलमेर जैसे जिलों में गंभीर हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। दिन में सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं और दोपहर के समय बाजारों में भी सन्नाटा देखने को मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, झांसी, बांदा, मेरठ, गोरखपुर और अयोध्या समेत 33 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। बुंदेलखंड क्षेत्र सबसे ज्यादा तप रहा है। यहां गर्म हवाओं के साथ तेज धूप लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। पंजाब और हरियाणा में भी हालात कम खराब नहीं हैं। बठिंडा में तापमान 47 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि हरियाणा के सिरसा में पारा 46.2 डिग्री दर्ज किया गया। चंडीगढ़, अंबाला, हिसार, रोहतक, करनाल और पटियाला में भी अगले कई दिनों तक गर्म हवाएं चलने की संभावना है। मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, खजुराहो और रीवा में भी पारा लगातार बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में वर्धा, नागपुर और चंद्रपुर जैसे जिले भीषण गर्मी से बेहाल हैं। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी मौसम विभाग ने हीटवेव का अलर्ट जारी किया है।

बिहार और झारखंड में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है। पटना, गया, भागलपुर, दरभंगा और रांची में दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है। स्कूलों के समय में बदलाव और कई जिलों में दोपहर की गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। पहाड़ी राज्यों में भी इस बार गर्मी ने लोगों को चौंका दिया है। जम्मू-कश्मीर के जम्मू, कठुआ और सांबा जैसे मैदानी जिलों में तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। हिमाचल प्रदेश के ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और सोलन में भी तेज गर्मी पड़ रही है।

उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, रुड़की और कोटद्वार जैसे मैदानी इलाकों में पारा लगातार 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है। हालांकि पहाड़ी राज्यों के ऊपरी इलाकों जैसे शिमला, मनाली, केदारघाटी, बदरीनाथ, जोशीमठ, पहलगाम और गुलमर्ग में हल्की बारिश और बादल छाने की संभावना जताई गई है, लेकिन वहां भी तापमान सामान्य से ज्यादा बना हुआ है। कई ऊंचाई वाले इलाकों में भी तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जो इस मौसम के लिहाज से काफी ज्यादा माना जा रहा है।

दोपहर में बाहर निकलना खतरनाक, स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

मौसम विभाग का कहना है कि इस बार गर्मी सामान्य से कहीं ज्यादा लंबी और खतरनाक हो सकती है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो देश का बड़ा हिस्सा हीटवेव की चपेट में रहेगा। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। डॉक्टरों ने भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। लगातार बढ़ती गर्मी और गर्म हवाओं के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और सांस संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बहुत जरूरी हो तो सिर को ढककर निकलें और लगातार पानी पीते रहें। खाली पेट धूप में जाने से भी बचने की सलाह दी गई है। बाजारों और सड़कों पर भी गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगा है। दोपहर के समय सड़कें खाली हो रही हैं, जबकि ठंडे पेय पदार्थों, जूस, नींबू पानी और इलेक्ट्रोल की मांग तेजी से बढ़ गई है।

बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है, जिससे कई शहरों में कटौती की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल उत्तर भारत में किसी बड़े पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के संकेत नहीं हैं। यही कारण है कि अगले छह दिनों तक लोगों को भीषण गर्मी और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही है। क्योंकि इस समय उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा सचमुच आग उगलती गर्मी की गिरफ्त में है।

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