एमआईटी एडीटी’ के विद्यार्थियों की ऐतिहासिक उपलब्धि!भारत के सबसे बड़े रेडियो-कंट्रोल्ड इलेक्ट्रिक विमान का सफल निर्माण‘प्रोजेक्ट गरुड़’ की इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुई उपलब्धि

पुणे : भारतीय छात्र अनुसंधान और एयरोस्पेस नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए ‘एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी’ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भारत का सबसे बड़ा रेडियो-कंट्रोल्ड (आरसी) इलेक्ट्रिक फिक्स्ड-विंग विमान सफलतापूर्वक डिजाइन, विकसित और उड़ान भरकर नया इतिहास रचा है। ‘टीम स्कायट्रेक’ द्वारा विकसित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ‘प्रोजेक्ट गरुड़’ नाम दिया गया है।

‘एमआईटी एडीटी’ विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंस के अंतर्गत एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों ने इस विमान को पूरी तरह स्वयं विकसित किया है। इस परियोजना के लिए विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप फॉर यंग एस्पिरेंट्स’ (CRIEYA) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

9.25 मीटर के विशाल विंगस्पैन और 261 किलोग्राम वजन वाले इस विमान ने भारत में निर्मित सबसे बड़े और सबसे भारी रेडियो-कंट्रोल्ड इलेक्ट्रिक विमान का रिकॉर्ड बनाया है। इस परियोजना के लिए ‘CRIEYA’ द्वारा 48 लाख रुपये का निधि अनुदान मंजूर किया गया था।

सफल उड़ान के बाद इस विमान को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भारत के सबसे भारी आरसी विमान (261 किलोग्राम) तथा सबसे बड़े विंगस्पैन वाले आरसी विमान (9.25 मीटर) के रूप में दर्ज किया गया है।

एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में ‘इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के अधिकारियों द्वारा ‘प्रोजेक्ट गरुड़’ को आधिकारिक प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। विद्यार्थियों द्वारा पूरी तरह विकसित यह परियोजना अनुभव-आधारित शिक्षा, उन्नत एयरोस्पेस अनुसंधान और छात्र-केंद्रित नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

इस परियोजना को ‘एमआईटी एडीटी’ विश्वविद्यालय के कार्याध्यक्ष तथा प्र-कुलपति प्रो. डॉ. मंगेश कराड का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही कुलपति डॉ. राजेश एस., प्रोवोस्ट डॉ. सायली गणकर, प्र-कुलपति (टेक्नोलॉजी क्लस्टर) डॉ. रामचंद्र पुजेरी, प्र-कुलपति (इनोवेशन क्लस्टर) डॉ. मोहित दुबे तथा प्र-कुलपति (क्रिएटिव क्लस्टर), कुलसचिव डाॅ.महेश चोपडे का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। इंजीनियरिंग विभाग के अधिष्ठाता डॉ. सुदर्शन सानप, एयरोस्पेस विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश कुलकर्णी, डॉ. सुनील डिंगरे तथा CRIEYA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. संतोष दराडे ने विद्यार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन किया।

विद्यार्थियों ने विमान की संरचना, स्ट्रक्चरल फैब्रिकेशन, एयरोडायनामिक्स और स्थिरता विश्लेषण, पिक्सहॉक फ्लाइट कंट्रोलर प्रणाली, आरटीके-जीपीएस आधारित नेविगेशन, इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट टेस्टिंग, रिमोट पायलटिंग, स्ट्रक्चरल वैलिडेशन और प्रोपल्शन ऑप्टिमाइजेशन जैसे सभी कार्य स्वतंत्र रूप से पूरे किए।

इस सफलता पर प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने कहा, “प्रोजेक्ट गरुड़ अनुभव-आधारित और नवाचार-केंद्रित शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है। विद्यार्थियों ने कक्षा में प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए अनुसंधान, दृढ़ता और टीमवर्क के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर एयरोस्पेस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ऐसे प्रकल्पों से भारत के भविष्य के एयरोस्पेस विशेषज्ञ और शोधकर्ता तैयार होंगे।”

दो बार असफलता, तीसरी बार सफल उड़ान…

करीब चार वर्षों की इस परियोजना यात्रा में विद्यार्थियों को कई तकनीकी और कार्यात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। प्रोपल्शन सिस्टम की समस्याएं, स्ट्रक्चरल डिजाइन में बदलाव, फ्लाइट कंट्रोलर ट्यूनिंग, प्रतिकूल मौसम, रनवे की सीमाएं और असफल परीक्षण जैसी अनेक चुनौतियों को उन्होंने पार किया।

साल 2024 में शुरुआती परीक्षणों में असफलता मिलने के बाद भी विद्यार्थियों ने फ्लाइट डेटा विश्लेषण, नए डिजाइन, एयरोडायनामिक्स वैलिडेशन और सिस्टेमैटिक टेस्टिंग के माध्यम से विमान में लगातार सुधार किए। अंततः 4 मई 2026 को धुले की रनवे पर इस विमान ने सफल टेक-ऑफ, नियंत्रित उड़ान और सुरक्षित लैंडिंग करते हुए भारतीय छात्र-नेतृत्व वाले एयरोस्पेस अनुसंधान में नया कीर्तिमान स्थापित किया।

‘CRIEYA’ से मिला 48 लाख रुपये का अनुदान
परियोजना की शोध क्षमता और शैक्षणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए ‘CRIEYA’ ने तीन चरणों में 48 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग प्रदान किया। इस सहायता से विद्यार्थियों को 1:6 स्केल प्रोटोटाइप विकसित करने, अत्याधुनिक टी-मोटर्स तकनीक के जरिए प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार, स्ट्रक्चरल मजबूती, डायनेमिक थ्रस्ट और टैक्सी टेस्टिंग के साथ टेलीमेट्री एवं कंट्रोल सिस्टम को और बेहतर बनाने में मदद मिली।

भविष्य की योजनाएं…
इस परियोजना को पद्मश्री पुरस्कार विजेता स्काइडाइवर शीतल महाजन और ‘थ्रस्ट एयरक्राफ्ट प्रा. लि.’ के संचालक कैप्टन अमोल यादव का भी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला। भविष्य में ‘टीम स्कायट्रेक’ इस परियोजना के माध्यम से ई-वीटॉल इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी, स्वॉर्म-ड्रोन सिस्टम के लिए मदरशिप प्लेटफॉर्म तथा रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए उन्नत यूएवी अनुसंधान मंच विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

‘गरुड़’ की प्रमुख विशेषताएं…

  • भारत का सबसे भारी आरसी विमान – 261 किलोग्राम
  • भारत का सबसे बड़े विंगस्पैन वाला आरसी विमान – 9.25 मीटर
  • अब तक परियोजना पर 48 लाख रुपये का खर्च
  • टेक-ऑफ के लिए आवश्यक दूरी – 200 मीटर
  • उड़ान क्षमता (एंड्योरेंस) – 10 मिनट
  • अधिकतम ऊंचाई – 100 मीटर (एजीएल)
  • पेलोड क्षमता – 100 किलोग्राम
  • अधिकतम गति – 80 किमी प्रति घंटा
  • विंगस्पैन – 9.25 मीटर
  • बैटरी प्रकार – ली-पो 220 एएच बैटरी
  • बैटरी वोल्टेज – 100 वोल्ट

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