युवाओं में मादक पदार्थों की लत को रोकने में कितने कारगर हैं सरकारी योजनाएं

युवाओं में मादक पदार्थों की लत को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा देशव्यापी नशामुक्ति कार्यक्रम और नशामुक्त भारत अभियान शुरू किए गए हैं जाहिर है इसका उद्देश्य मादक पदार्थों का रोकथाम,नशेड़ियों का उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करना है। लेकिन क्या ये योजनाएं कारगर साबित हो रही हैं या सिर्फ औपचारिकता बन कर रह गयी हैं। नशे की लत से पीड़ित लोगों में बड़े ,बूढ़े ,किशोर आदि गांव -गांव कस्बा, शहर ,महानगर सभी जगह मिल जाते हैं। अंतर सिर्फ नशीले पदार्थ के सेवन को लेकर होता है।मादक द्रव्यों का सेवन शराब, अवैध मादक पदार्थों, बिना पर्चे के मिलने वाली दवाओं आदि का अत्यधिक सेवन है। इन्हें सूंघा जा सकता है, इंजेक्शन द्वारा लिया जा सकता है, धूम्रपान किया जा सकता है, निगला जा सकता है, जिससे शरीर में अस्थायी मनोवैज्ञानिक परिवर्तन होता है। इनमें चिड़चिड़ापन, खराब स्वभाव, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अनिद्रा, कंपकंपी, दौरे, मतिभ्रम और पसीना आना शामिल हैं।मादक पदार्थों का सेवन करने वाले युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा, मादक पदार्थों का सेवन न करने वालों की तुलना में अधिक होता है, जिनमें अवसाद, व्यवहार संबंधी समस्याएं, व्यक्तित्व विकार, आत्महत्या के विचार, आत्महत्या का प्रयास और आत्महत्या शामिल हैं।

मादक पदार्थों के उपयोग से निपटने के लिए कई मंत्रालयों व एजेंसियां लगी हुई हैं। मादक पदार्थों की लत से मुक्ति कार्यक्रम और राष्ट्रीय नशामुक्ति कार्यक्रम (एनएपीडीडीआर) के तहत देश भर में सुलभ उपचार, पुनर्वास और रोकथाम प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है।नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत सैकड़ों आईआरसीए, एटीएफ, डीडीएसी और टोल-फ्री हेल्पलाइन के ज़रिए उपचार तक पहुंच का विस्तार किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सरकारी अस्पतालों के ज़रिए मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों के लिए किफायती, सुलभ और साक्ष्य-आधारित उपचार प्रदान करने के मकसद से एक नशा मुक्ति कार्यक्रम (डीडीएपी)शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत, मंत्रालय केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में स्थापित 6 नशा मुक्ति उपचार केंद्रों और देश भर के जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्थापित 25 नशा मुक्ति क्लीनिकों (ओपीडी एवं परामर्श) के माध्यम से उपचार (ओपीडी व आईपीडी) और परामर्श प्रदान करता है।इसके अलावा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग मादक पदार्थों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना, राष्ट्रीय मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने की योजना (एनएपीडीडीआर) को लागू करता है। इस कार्यक्रम के तहत, राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए निवारक शिक्षा, जागरूकता सृजन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

एनएपीडीडीआर योजना के अंतर्गत 349 एकीकृत पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) संचालित किए जा रहे हैं, जो नशा करने वालों को परामर्श, नशामुक्ति व नशामुक्ति, उपचार के बाद की देखभाल और सामाजिक मुख्यधारा में दोबारा एकीकरण के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती करके उपचार प्रदान करते हैं।इसके अलावा, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों में नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने और जीवन कौशल सिखाने के लिए 45 सामुदायिक आधारित सहकर्मी नेतृत्व हस्तक्षेप (सीपीएलआई) कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।इस योजना के तहत, 76 आउटरीच और ड्रॉप-इन केंद्र (ओडीआईसी) भी कार्यरत हैं, जो स्क्रीनिंग, मूल्यांकन, परामर्श और उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं के लिए रेफरल के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करते हैं। सरकारी अस्पतालों में 154 नशा उपचार केंद्र (एटीएफ) संचालित किए जा रहे हैं।145 जिला नशामुक्ति केंद्र (डीडीएसी) संचालित किए जा रहे हैं, जो आईआरसीए, ओडीआईसी और सीपीएलआई द्वारा प्रदान की जाने वाली तीनों सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराते हैं।यह योजना बिहार राज्य में 7 आईआरसीए, 6 डीडीएसी और 2 एटीएफ को सहायता प्रदान कर रही है।नशा मुक्ति के लिए मदद चाहने वाले व्यक्तियों को प्राथमिक परामर्श और तत्काल रेफरल सेवाएं प्रदान करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14446 भी स्थापित किया गया है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने देशव्यापी नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) भी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसरों और देश भर के स्कूलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए आम जनता तक पहुंचना और मादक पदार्थों के सेवन के बारे में जागरूकता फैलाना है। अभियान को लेकर सोशल मीडिया अकाउंट्स (एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम) के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जा रही है।

इस कार्य मेें लगे कई गैर सरकारी संगठनों के अनुसार युवाओं में मादक पदार्थों की लत को रोकने के लिए भारत सरकार की योजनाएं काफी हद तक सक्रिय और बहुआयामी हैं, लेकिन इस समस्या की जटिलता के कारण उनकी प्रभावशीलता मिश्रित रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार नशा मुक्त भारत अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया ,यह अभियान अब देश के सभी जिलों में कार्यरत है। इसने 5.20 करोड़ से अधिक युवाओं और 3.30 करोड़ से अधिक महिलाओं तक पहुँचकर जागरूकता फैलाई है।

हाल ही मेें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने मादक पदार्थों के खतरे के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने के लिए हर आम नागरिक का आह्वान किया है।देश भर के प्रत्येक नागरिक से ‘नशा मुक्ति मित्र’ बनने और ‘नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है। एनएमबीए ऐप 2.0 में उन्नत सुविधाओं के शुभारंभ के साथ अब नशा मुक्ति मित्र बनना हर उस आम नागरिक के लिए सरल, सुलभ और प्रभावशाली हो गया है, जो नशामुक्त भारत में अपना योगदान देना चाहता है।अब तक 28,000 से अधिक नशा मुक्ति मित्र पंजीकृत हो चुके हैं।

एक अन्य सरकारी एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मादक पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित अपने कार्यों के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि समाज के सभी वर्गों को प्रभावित करने वाले मादक पदार्थों के दुरुपयोग के बढ़ते खतरे को रोका जा सके।

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