एनडीए को घेरने के लिए दो साल बाद आज जुटेगा इंडिया गठबंधन, एजेंडा तय नहीं, विपक्षी दल अपने-अपने मुद्दे रखेंगे

केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने और विपक्षी एकजुटता का संदेश देने के उद्देश्य से इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होने जा रही है। करीब दो वर्षों के अंतराल के बाद हो रही इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनावों और वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि इस बैठक में 23 विपक्षी दल शामिल होंगे, हालांकि पार्टी ने अब तक इन दलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि विभिन्न विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा मंच पर एकजुट होने जा रहे हैं। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर किए गए अपने संदेश में इंडिया गठबंधन को “इंडिया जनबंधन” बताया और कहा कि लोकतंत्र, संविधान तथा संघीय ढांचे की रक्षा के लिए विपक्षी दलों का एक साथ आना आवश्यक है। 

बैठक से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी अपने भतीजे तथा सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ दिल्ली पहुंच चुकी हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की। हालांकि इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इसे विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इंडिया गठबंधन की अब तक छह बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें एक आभासी बैठक भी शामिल रही है। गठबंधन की पहली बैठक 23 जून 2023 को पटना में आयोजित हुई थी, जिसकी पहल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी। इसके बाद बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली समेत विभिन्न स्थानों पर बैठकें आयोजित हुईं। आखिरी औपचारिक बैठक 1 जून 2024 को नई दिल्ली में हुई थी। 

उसके बाद 7 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर गठबंधन के नेताओं के लिए रणनीतिक रात्रिभोज का आयोजन किया था, जिसमें 25 से अधिक दलों के लगभग 50 नेता शामिल हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि सोमवार को होने वाली बैठक का कोई औपचारिक एजेंडा तय नहीं किया गया है। गठबंधन से जुड़े नेताओं का कहना है कि सभी दल अपने-अपने राज्यों और राष्ट्रीय स्तर से जुड़े मुद्दों को बैठक में उठा सकते हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों, राज्यों में विपक्षी दलों के सामने आने वाली राजनीतिक चुनौतियों, जांच एजेंसियों की कार्रवाई तथा चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। 

बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी समेत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के शामिल होने की संभावना है। वामपंथी दल भी बैठक में मौजूद रहेंगे, हालांकि उन्होंने कुछ मुद्दों पर अपनी असहमति दर्ज कराई है।

आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने इस बैठक से दूरी बनाई

जहां एक ओर विपक्षी दल एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कुछ प्रमुख सहयोगी दलों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने इस बैठक से दूरी बना ली है। इसके अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा की भागीदारी को लेकर भी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। यदि प्रमुख सहयोगी दल बैठक से दूरी बनाए रखते हैं तो विपक्षी एकता की तस्वीर पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में दलों की भागीदारी से गठबंधन की मजबूती का संदेश जाएगा।

बैठक में विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे भी उठ सकते हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस चुनाव के बाद अपने नेताओं पर कथित हमलों और राजनीतिक प्रताड़ना का मुद्दा उठाकर अन्य दलों का समर्थन मांग सकती है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को अपेक्षाकृत सफलता मिली थी। ऐसे में दोनों दल आगामी चुनावों के लिए तालमेल और रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेतृत्व को लेकर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम भी बैठक का हिस्सा बन सकते हैं। लालू प्रसाद यादव परिवार की सुरक्षा में कटौती तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सहयोगी दलों से समर्थन मांगा जा सकता है। केरल में भी स्थिति दिलचस्प है। राज्य में कांग्रेस और वामपंथी दल एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वामपंथी दल अपने मुद्दों को मजबूती से बैठक में उठाएंगे।

बैठक से पहले गठबंधन के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने नाराजगी जताई थी। पार्टी का कहना था कि वह अपने उम्मीदवार उतारना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस ने बिना पर्याप्त परामर्श के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। उधर केरल में वामपंथी दलों ने कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों पर आपत्ति जताई थी। विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस नेताओं ने वाम दलों को भारतीय जनता पार्टी की ‘बी टीम’ बताया था, जिससे वामपंथी नेतृत्व नाराज हो गया था। यह मुद्दा भी बैठक में चर्चा का विषय बन सकता है। 

बैठक में गठबंधन के स्थायी संयोजक के नाम पर भी चर्चा संभव है। लंबे समय से विपक्षी खेमे में इस पद को लेकर चर्चा होती रही है, लेकिन अब तक किसी एक नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए गठबंधन एक अधिक संगठित ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। दो वर्षों बाद हो रही यह बैठक विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। हालांकि एजेंडा तय न होने और कुछ सहयोगी दलों की अनुपस्थिति के कारण कई सवाल भी खड़े हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विपक्षी दल अपने मतभेद भुलाकर एनडीए के खिलाफ साझा रणनीति पर सहमति बना पाते हैं या नहीं।

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