किन्नौर का सफर अब समय देखकर करें, 30 जुलाई तक NH-5 पर लागू हुआ नया ट्रैफिक शेड्यूल

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। शिमला-किन्नौर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) आगामी 30 जुलाई तक प्रतिदिन कई घंटों के लिए बंद रहेगा। जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान संभावित भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए यह निर्णय लिया है। इसके तहत निगुलसरी और नाथपा क्षेत्र में सड़क किनारे मौजूद खतरनाक चट्टानों को हटाने के साथ-साथ सड़क की मरम्मत और सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। किन्नौर का यह मार्ग प्रदेश के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। 

हर वर्ष बरसात के मौसम में यहां भूस्खलन, पहाड़ियों से पत्थर गिरने और सड़क क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती हैं। कई बार हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग कई दिनों तक बंद रहता है और किन्नौर जिले का संपर्क राज्य के अन्य हिस्सों से पूरी तरह कट जाता है। इसी स्थिति से बचने और मानसून से पहले आवश्यक सुरक्षा कार्य पूरे करने के उद्देश्य से प्रशासन ने यह कदम उठाया है। प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते खतरनाक चट्टानों को हटाकर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए तो बरसात के दौरान यात्रियों को होने वाली परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही कारण है कि 8 जून से 30 जुलाई तक विशेष यातायात व्यवस्था लागू की गई है। 

इस अवधि में सड़क को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन निर्धारित समय पर यातायात रोककर निर्माण और सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। इस निर्णय का असर सबसे अधिक उन पर्यटकों पर पड़ सकता है जो इन दिनों किन्नौर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की यात्रा के लिए पहुंच रहे हैं। गर्मियों के मौसम में सांगला घाटी, कल्पा, छितकुल और रिकांगपिओ जैसे पर्यटन स्थलों पर देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। बर्फ से ढकी चोटियां, सेब के बागान और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह क्षेत्र पर्यटकों की पहली पसंद बना रहता है। लेकिन अब यात्रियों को अपनी यात्रा पहले से बेहतर तरीके से योजना बनाकर करनी होगी। जिला पुलिस और प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार निगुलसरी क्षेत्र में किलोमीटर 316/880 से 317/250 तथा नाथपा क्षेत्र में किलोमीटर 330/350 से 330/560 तक सड़क पर यातायात को अस्थायी रूप से रोका जाएगा। 

इन स्थानों पर पहाड़ियों से गिरने वाले पत्थरों का खतरा अधिक रहता है और यही वजह है कि यहां विशेष सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा तय किए गए समय के अनुसार प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक, सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक, दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक तथा शाम 5 से 7 बजे तक वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। यानी पूरे दिन में कुल आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहेगा। हालांकि इन समयावधियों के बीच सड़क को यातायात के लिए खोला जाएगा, जिससे जरूरी यात्रा और मालवाहक वाहनों की आवाजाही जारी रह सके। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि इस व्यवस्था से कुछ समय के लिए पर्यटकों को असुविधा जरूर हो सकती है, लेकिन भविष्य में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है। होटल संचालकों और ट्रैवल ऑपरेटरों ने भी पर्यटकों से यात्रा कार्यक्रम पहले से तय करने और सड़क बंद रहने के समय का ध्यान रखने की अपील की है।

मानसून से पहले सुरक्षा कवच तैयार करने की कवायद, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

पुलिस अधीक्षक किन्नौर कार्यालय की ओर से सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों को सड़क बंद रहने के समय की जानकारी देने, आवश्यक चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि मरम्मत कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना न हो। जिला प्रशासन ने आम लोगों, पर्यटकों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले सड़क की स्थिति और यातायात व्यवस्था की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। 

विशेष रूप से लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने कार्यक्रम को सड़क बंद रहने के समय के अनुसार समायोजित करें ताकि अनावश्यक इंतजार और परेशानी से बचा जा सके। गौरतलब है कि निगुलसरी और नाथपा क्षेत्र पिछले कई वर्षों से भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। मानसून के दौरान यहां पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरती हैं। कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दिनों तक ठप हो जाता है, जिससे न केवल आम लोगों को बल्कि व्यापार, पर्यटन और आपूर्ति व्यवस्था को भी नुकसान उठाना पड़ता है। 

इसी अनुभव को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन ने मानसून शुरू होने से पहले ही सड़क को सुरक्षित बनाने की रणनीति अपनाई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह कार्य समय पर पूरा हो जाता है तो आगामी बरसात के मौसम में सड़क बंद होने की घटनाओं में कमी आ सकती है और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। फिलहाल किन्नौर जाने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे यात्रा से पहले सड़क बंद रहने के निर्धारित समय की जानकारी लें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं। थोड़ी सी सावधानी न केवल समय बचाएगी बल्कि सफर को सुरक्षित और सुगम भी बनाएगी।

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