मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। गुरुवार को चुनाव आयोग ने भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचित घोषित करते हुए निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए। इसके साथ ही राज्यसभा की तीनों सीटें भाजपा के खाते में चली गईं। हालांकि, इस चुनावी जीत पर राजनीतिक विवाद भी गहराता जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त किए जाने का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
दरअसल, तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। विधानसभा में पार्टी के पास इतना संख्या बल मौजूद था कि वह एक सीट पर जीत दर्ज कर सकती थी। लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान घटनाक्रम अचानक बदल गया। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई शुरू कर दी। भाजपा की ओर से उम्मीदवार महेश केवट तथा पार्टी के अन्य नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म-26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाई है। भाजपा नेताओं का कहना था कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के लिए सभी कानूनी मामलों का पूरा विवरण देना अनिवार्य है और जानकारी छिपाना गंभीर त्रुटि है।
इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया।
इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताते हुए चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों का दरवाजा खटखटाया। वहीं बुधवार को कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय पहुंचकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। पार्टी नेताओं ने आयोग से आग्रह किया कि नामांकन रद्द करने के फैसले की समीक्षा की जाए और निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। हालांकि आयोग की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया। उधर, कांग्रेस ने देर रात सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल कर दी।
ऑनलाइन दायर की गई इस याचिका में आरोप लगाया गया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन रद्द करने का फैसला गैरकानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से लिया है। कांग्रेस ने अदालत से इस आदेश को निरस्त करने और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने अदालत को बताया कि नाम वापस लेने की अंतिम समय-सीमा दोपहर 3 बजे तक है और यदि उसी दिन सुनवाई नहीं हुई तो कांग्रेस को अपूरणीय नुकसान होगा।
कांग्रेस का दावा- मामला नहीं, सिर्फ अदालत का नोटिस
सुनवाई के दौरान कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत और चुनाव आयोग के समक्ष दलील दी कि तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अदालत ने यह पूछा था कि मामले में संज्ञान क्यों न लिया जाए, लेकिन अभी तक किसी प्रकार का आरोप तय नहीं हुआ है और न ही किसी आपराधिक मुकदमे की औपचारिक कार्यवाही शुरू हुई है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में विधिवत संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
ऐसे में उस नोटिस का उल्लेख चुनावी हलफनामे में करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं था। पार्टी ने आरोप लगाया कि तकनीकी आधार पर उम्मीदवार को चुनावी दौड़ से बाहर करने का प्रयास किया गया है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उन्हें अभी तक याचिका की प्रति प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए। इस पर सिंघवी ने सुझाव दिया कि यदि मामले की सुनवाई अगले दिन भी हो, तो तब तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। हालांकि अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून पहले से स्पष्ट है और विस्तृत सुनवाई के लिए मामले को अगले दिन सूचीबद्ध कर दिया।
सुनवाई स्थगित होने के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर मांग उठाई कि जब तक सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला न दे, तब तक चुनाव परिणाम घोषित नहीं किए जाने चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग की ओर से तीनों भाजपा उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए, जिससे उनकी जीत औपचारिक रूप से सुनिश्चित हो गई। भाजपा की इस जीत से राज्यसभा में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताते हुए कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी में है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी लगातार चल रही है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का फैसला कानूनी कसौटी पर कितना टिकता है।

