टैक्स रिटर्न फाइल करने की जल्दबाजी न करें, Form 26AS की एक गलती ला सकती है नोटिस

देशभर में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का दौर शुरू हो चुका है और करोड़ों नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों तथा अन्य करदाताओं ने अपनी टैक्स फाइलिंग की तैयारियां तेज कर दी हैं। लेकिन टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न दाखिल करने की जल्दबाजी कई बार भारी पड़ सकती है। यदि आय, टैक्स कटौती या वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारी में कोई भी विसंगति रह जाती है तो आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलने, रिफंड अटकने या अतिरिक्त टैक्स भुगतान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

ITR दाखिल करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों का मिलान करना बेहद जरूरी है। इनमें सबसे अहम दस्तावेज Form 26AS, Annual Information Statement (AIS) और Form 16 हैं। इन तीनों दस्तावेजों में दर्ज जानकारियां करदाता की आय, टैक्स भुगतान और वित्तीय गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करती हैं। 

यदि इनमें दर्ज आंकड़ों और ITR में भरी गई जानकारी के बीच अंतर पाया जाता है तो विभाग जांच शुरू कर सकता है। टैक्स सलाहकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने अपनी डिजिटल निगरानी प्रणाली को काफी मजबूत किया है। अब बैंक खातों, शेयर बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड, संपत्ति खरीद-बिक्री और अन्य बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी स्वतः विभाग तक पहुंच जाती है। ऐसे में गलत या अधूरी जानकारी देकर रिटर्न भरने का जोखिम पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है।

Form 26AS को करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट माना जाता है। इसमें स्रोत पर कर कटौती (TDS), स्रोत पर कर संग्रह (TCS), एडवांस टैक्स, सेल्फ असेसमेंट टैक्स और अन्य टैक्स भुगतानों का पूरा विवरण उपलब्ध होता है। इसके अलावा कुछ बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी इसमें दर्ज रहती है। यही कारण है कि इसे किसी भी करदाता की टैक्स प्रोफाइल का आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है। कई बार कंपनियों, बैंकों या अन्य संस्थानों द्वारा जमा किए गए TDS की जानकारी समय पर अपडेट नहीं होती या डेटा एंट्री में त्रुटि रह जाती है। ऐसे मामलों में Form 16 और Form 26AS के बीच अंतर देखने को मिल सकता है। यदि करदाता बिना जांच किए सीधे ITR फाइल कर देता है तो बाद में उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए Form 16 विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें नियोक्ता द्वारा वेतन और कटे हुए टैक्स का पूरा ब्योरा दिया जाता है। 

हालांकि केवल Form 16 के आधार पर रिटर्न भरना पर्याप्त नहीं माना जाता। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि Form 16 में दर्ज TDS राशि का मिलान Form 26AS से अवश्य किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नियोक्ता द्वारा काटा गया टैक्स वास्तव में सरकार के खाते में जमा हो चुका है। इसी प्रकार AIS यानी Annual Information Statement भी करदाताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। इसमें बैंक ब्याज, डिविडेंड आय, शेयरों की खरीद-बिक्री, म्यूचुअल फंड निवेश, विदेशी प्रेषण और अन्य वित्तीय गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। आयकर विभाग अब AIS में दर्ज आंकड़ों के आधार पर रिटर्न का मिलान करता है।

रिफंड में देरी से बचने के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR दाखिल करने से पहले करदाताओं को Form 26AS, AIS और Form 16 में दर्ज सभी आंकड़ों का सावधानीपूर्वक मिलान करना चाहिए। यदि किसी दस्तावेज में कोई गलती दिखाई दे तो उसे पहले संबंधित संस्था से ठीक कराना बेहतर होता है। उदाहरण के लिए यदि बैंक ब्याज की जानकारी गलत दर्ज है या TDS का विवरण अपडेट नहीं हुआ है तो संबंधित बैंक या नियोक्ता से संपर्क करना चाहिए। करदाता अपने सभी बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, बचत खातों, किराये की आय, पूंजीगत लाभ और अन्य आय स्रोतों की जानकारी को अलग से भी जांच लें। कई बार छोटी-छोटी आय छूट जाती है, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में वह दर्ज रहती है। ऐसी स्थिति में आय छिपाने का संदेह पैदा हो सकता है। 

यदि Form 26AS और AIS में दिखाई गई जानकारी ITR में शामिल नहीं की जाती तो आयकर विभाग स्वतः नोटिस भेज सकता है। विभाग की नई डेटा एनालिटिक्स प्रणाली विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का मिलान करके विसंगतियों की पहचान कर लेती है। यही वजह है कि अब करदाताओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। रिफंड पाने वाले करदाताओं के लिए भी सही जानकारी देना बेहद आवश्यक है। यदि रिटर्न में दर्ज आंकड़े विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते तो रिफंड प्रक्रिया लंबी हो सकती है। कई मामलों में सत्यापन या अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग भी की जा सकती है, जिससे रिफंड मिलने में देरी हो जाती है।

आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है। इसलिए करदाताओं को जल्दबाजी में रिटर्न भरने के बजाय सभी दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए। Form 26AS, AIS और Form 16 का सही मिलान न केवल टैक्स अनुपालन को आसान बनाता है, बल्कि भविष्य में नोटिस, जुर्माने और अनावश्यक कानूनी परेशानियों से भी बचाता है। करदाताओं के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले अपनी पूरी वित्तीय जानकारी की एक बार फिर समीक्षा कर लें। थोड़ी सी सावधानी न सिर्फ टैक्स प्रक्रिया को सरल बना सकती है, बल्कि समय पर रिफंड मिलने और आयकर विभाग की जांच से बचने में भी मददगार साबित हो सकती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart