इलेक्ट्रिक स्कूटर हो सकते हैं महंगे ! सरकारी सब्सिडी खत्म होने की तैयारी, ग्राहकों पर बढ़ेगा बोझ

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव (PM E-Drive) योजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सब्सिडी राशि लगभग समाप्त हो चुकी है, जिसके चलते प्रमुख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों ने अपने डीलरों को लंबित दावों को तत्काल अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। उद्योग जगत में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि जैसे ही सब्सिडी बंद होगी, इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल खरीदना ग्राहकों के लिए महंगा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और हीरो मोटोकॉर्प समेत कई प्रमुख कंपनियां अपने डीलर नेटवर्क को लगातार सतर्क कर रही हैं ताकि सब्सिडी से जुड़े सभी दावों का निपटारा समय रहते किया जा सके। कंपनियों को आशंका है कि योजना के लिए निर्धारित राशि जल्द ही पूरी तरह खर्च हो सकती है और उसके बाद मिलने वाला प्रोत्साहन बंद हो जाएगा। इसी क्रम में बजाज ऑटो ने 15 जून को अपने चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर के डीलरों को एक परिपत्र जारी करते हुए सभी लंबित सब्सिडी दावों को तत्काल अपलोड करने के निर्देश दिए। 

कंपनी ने संकेत दिया कि वह जल्द ही एक अंतिम तिथि घोषित करेगी, जिसके बाद बेचे जाने वाले वाहनों की कीमतें पीएम ई-ड्राइव सब्सिडी के बिना तय की जाएंगी। गौरतलब है कि भारी उद्योग मंत्रालय ने सितंबर 2024 में पीएम ई-ड्राइव योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को आम लोगों के लिए अधिक किफायती बनाना था। योजना के तहत 1.5 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर प्रति वाहन अधिकतम 5,000 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। सरकार ने इस योजना के माध्यम से कुल 24.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य निर्धारित किया था। योजना की अवधि 31 जुलाई 2026 तक तय की गई थी, लेकिन यह भी प्रावधान था कि यदि लक्ष्य पहले पूरा हो जाता है तो योजना उससे पहले ही समाप्त मानी जाएगी। अब उपलब्ध आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। वाहन खरीदते समय खरीदार के आधार से जुड़ा एक विशेष ई-वाउचर तैयार किया जाता है। इसे खरीदार और डीलर दोनों मोबाइल ऐप के माध्यम से सत्यापित करते हैं। 

इसके बाद डीलर संबंधित दस्तावेजों के साथ दावा पीएम ई-ड्राइव पोर्टल पर अपलोड करता है। सरकारी सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि डीलर को वापस कर दी जाती है, जबकि ग्राहक को खरीद के समय ही इसका लाभ मिल जाता है। बजाज ऑटो के परिपत्र से सामने आया है कि योजना के तहत लगभग 23.29 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को पहले ही प्रोत्साहन का लाभ दिया जा चुका है। वहीं करीब 1.5 लाख वाहनों से जुड़े भुगतान अभी प्रक्रिया में हैं। इसका मतलब है कि सरकार द्वारा निर्धारित कुल लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है और शेष राशि भी जल्द वितरित हो सकती है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना के तहत निर्धारित सभी वाहनों के लिए खरीदार आईडी पहले ही जनरेट हो चुकी हैं। यानी उपलब्ध सब्सिडी राशि का अधिकांश हिस्सा पहले से ही आरक्षित माना जा रहा है। यही कारण है कि कंपनियां डीलरों पर लंबित दावों को जल्द पूरा करने का दबाव बना रही हैं।

कंपनियों ने डीलरों को दी समय सीमा, सब्सिडी खत्म होने का बढ़ा खतरा

बजाज ऑटो ने अपने डीलरों को निर्देश दिया है कि 15 जून या उससे पहले बेचे गए सभी वाहनों से जुड़े दावे 22 जून तक हर हाल में पीएम ई-ड्राइव पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएं। कंपनी ने आश्वासन दिया है कि 16 जून से 22 जून के बीच अपलोड किए गए मामलों में यदि लक्ष्य से अधिक वाहनों के पंजीकरण के कारण सब्सिडी में कोई नुकसान होता है तो उसकी भरपाई कंपनी स्वयं करेगी।

हालांकि कंपनी की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं ऐसा न हो कि योजना की शेष राशि समाप्त हो जाए और कई डीलरों के दावे अभी भी पोर्टल पर अपलोड न हो पाए हों। ऐसी स्थिति में डीलरों और ग्राहकों दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी वजह से बजाज ऑटो ने 16 जून या उसके बाद बेचे जाने वाले वाहनों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

कंपनी ने कहा है कि वाहन की बिक्री के तीन दिनों के भीतर खरीदार का पंजीकरण और आईडी निर्माण पूरा कर लिया जाए, जबकि पांच दिनों के भीतर दावा पीएम ई-ड्राइव पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही एक कट-ऑफ तिथि घोषित करेगी। इस तिथि के बाद बेचे जाने वाले वाहनों पर पीएम ई-ड्राइव सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि यदि कोई डीलर कट-ऑफ तिथि घोषित होने से पहले वाहन बेचता है और निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी दस्तावेज और दावा जमा कर देता है, तो कोटा समाप्त होने की स्थिति में सब्सिडी का भार कंपनी स्वयं वहन करेगी। लेकिन यदि डीलर निर्धारित तीन से पांच दिन की समयसीमा का पालन नहीं करता और इस बीच पोर्टल बंद हो जाता है, तो होने वाला पूरा नुकसान डीलर को ही उठाना पड़ेगा। कंपनी ऐसे मामलों में कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी।

पीएम ई-ड्राइव योजना समाप्त होने के बाद इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कीमतों में प्रत्यक्ष रूप से वृद्धि देखने को मिल सकती है। हालांकि सब्सिडी की राशि केवल 5,000 रुपये तक है, लेकिन मूल्य-संवेदनशील ग्राहकों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पर भी कुछ असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल इस मुद्दे पर बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और हीरो मोटोकॉर्प से आधिकारिक प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनियों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। पीएम ई-ड्राइव योजना में बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर, हीरो मोटोकॉर्प, एथर एनर्जी, ओला इलेक्ट्रिक, ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रिवोल्ट मोटर्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। अब पूरे उद्योग की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार योजना को आगे बढ़ाती है या फिर इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को बिना सब्सिडी के नए दौर में प्रवेश करना होगा।

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