पीजीआई-डी रिपोर्ट : शिक्षा सुधार का मॉडल बना गुरुग्राम, लगातार दूसरी बार हरियाणा में शीर्ष स्थान

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी वर्ष 2025-26 की परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स-डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई-डी) रिपोर्ट में गुरुग्राम ने एक बार फिर हरियाणा में अपनी शैक्षिक उत्कृष्टता का दमदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। लगातार दूसरे वर्ष राज्य का सर्वश्रेष्ठ जिला बनने के साथ ही गुरुग्राम ने यह साबित कर दिया है कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा, आधुनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग, मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए किए जा रहे प्रयास अब ठोस परिणाम देने लगे हैं। इस उपलब्धि के साथ जिला एक बार फिर उत्तम-3 श्रेणी में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। वर्ष 2024-25 की तुलना में इस बार जिले के कुल अंकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। गुरुग्राम ने 600 में से 383 अंक प्राप्त कर प्रदेश के अन्य सभी जिलों को पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि केवल रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल सुविधाओं, बुनियादी ढांचे, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और शिक्षा प्रशासन में हुए सकारात्मक बदलावों का भी प्रमाण मानी जा रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि शिक्षकों की निरंतर मॉनिटरिंग, विद्यालयों में संसाधनों का विस्तार, तकनीक आधारित शिक्षण और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रयासों का ही परिणाम है कि गुरुग्राम लगातार दूसरे वर्ष भी राज्य में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय प्रत्येक वर्ष परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स-डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई-डी) के माध्यम से देशभर के जिलों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल जिलों की रैंकिंग तय करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना भी होता है। इसमें यह देखा जाता है कि विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर कितना बेहतर है, बच्चों के सीखने के परिणाम कैसे हैं, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, डिजिटल शिक्षा का कितना विस्तार हुआ है, विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है तथा शिक्षा प्रशासन कितना प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। पीजीआई-डी रिपोर्ट के लिए विभिन्न मानकों पर जिलों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इनमें लर्निंग आउटकम, इक्विटेबल क्लासरूम ट्रांजिशन, आधारभूत संरचना, विद्यार्थियों का नामांकन, डिजिटल शिक्षा, स्कूल सुरक्षा, बाल संरक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहते हैं। 

इन सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को उच्च श्रेणी प्रदान की जाती है। गुरुग्राम ने इस वर्ष कुल 600 अंकों में से 383 अंक हासिल किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। लगातार दूसरे वर्ष राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त करना इस बात का संकेत है कि जिले में शिक्षा सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियां प्रभावी साबित हुई हैं। शिक्षा विभाग का फोकस केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और आधुनिक शिक्षा प्रणाली को विद्यालयों तक पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। लर्निंग आउटकम के क्षेत्र में जिले ने 290 में से 175 अंक प्राप्त किए। यह श्रेणी विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की क्षमता, विषयों की समझ और शैक्षणिक उपलब्धियों का आकलन करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन भविष्य की शिक्षा गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

डिजिटल शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं और बेहतर प्रशासन ने दिलाई सफलता—

रिपोर्ट के अनुसार इक्विटेबल क्लासरूम ट्रांजिशन में गुरुग्राम को 90 में से 69 अंक मिले। यह श्रेणी इस बात का मूल्यांकन करती है कि विद्यार्थी बिना किसी बाधा के एक कक्षा से दूसरी कक्षा तक कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहे हैं तथा सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर मिल रहे हैं या नहीं। इस क्षेत्र में बेहतर अंक यह दर्शाते हैं कि जिले में शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, फैसिलिटी एवं स्टूडेंट्स इनरोलमेंट श्रेणी में जिले ने 51 में से 34 अंक प्राप्त किए। इसमें विद्यालयों के भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली, कक्षाओं की उपलब्धता, खेल सुविधाएं और विद्यार्थियों के नामांकन जैसी व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है। लगातार किए गए विकास कार्यों के कारण गुरुग्राम इस श्रेणी में भी बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा। स्कूल सेफ्टी एवं चाइल्ड प्रोटेक्शन में जिले को 35 में से 20 अंक प्राप्त हुए। 

इस श्रेणी में विद्यार्थियों की सुरक्षा, बाल संरक्षण से जुड़े नियमों के पालन, सुरक्षित विद्यालय वातावरण और संवेदनशील व्यवस्थाओं का आकलन किया जाता है। वहीं डिजिटल लर्निंग के क्षेत्र में गुरुग्राम ने 50 में से 31 अंक हासिल किए। स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों और तकनीक आधारित शिक्षा के विस्तार ने जिले को इस श्रेणी में मजबूती प्रदान की है। गवर्नेंस प्रोसेस एवं प्रशासनिक व्यवस्था में जिले को 84 में से 54 अंक मिले। इस श्रेणी में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, विद्यालयों की निगरानी, योजनाओं के क्रियान्वयन, डाटा प्रबंधन और पारदर्शी प्रशासन का मूल्यांकन किया जाता है। बेहतर प्रशासनिक समन्वय और नियमित मॉनिटरिंग को गुरुग्राम की सफलता का प्रमुख आधार माना जा रहा है।

पीजीआई-डी रिपोर्ट केवल उपलब्धियों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन क्षेत्रों की भी पहचान कराती है जहां सुधार की आवश्यकता है। गुरुग्राम ने लगातार दूसरे वर्ष प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर यह संदेश दिया है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में योजनाबद्ध तरीके से निवेश, प्रभावी प्रशासन, प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक संसाधनों का समन्वय किया जाए तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। लगातार दूसरे वर्ष राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त करने से गुरुग्राम की शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान मिली है। अब जिले के सामने इस प्रदर्शन को बनाए रखने के साथ-साथ उन क्षेत्रों में और सुधार करने की चुनौती होगी, जहां अभी बेहतर अंक हासिल किए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग का लक्ष्य आगामी वर्षों में लर्निंग आउटकम, डिजिटल शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं और विद्यालय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और अधिक सुधार करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी स्थिति को मजबूत करना है।

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