भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे श्रृंखला का आगाज मंगलवार को बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान से होने जा रहा है। यह मुकाबला केवल एक द्विपक्षीय सीरीज का पहला मैच नहीं, बल्कि भारतीय टीम के लिए 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों का अहम पड़ाव माना जा रहा है। लगभग ढाई साल यानी 968 दिनों के लंबे अंतराल के बाद तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह वनडे क्रिकेट में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने आखिरी बार 2023 विश्व कप के फाइनल में भारत की ओर से वनडे मुकाबला खेला था। वहीं कप्तान रोहित शर्मा और अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली भी एक बार फिर वनडे टीम की जर्सी में मैदान पर उतरेंगे। हाल ही में टी-20 श्रृंखला में इंग्लैंड के हाथों मिली 4-0 की हार के बाद भारतीय टीम के सामने अपनी लय वापस पाने और आत्मविश्वास मजबूत करने की चुनौती होगी। दूसरी ओर इंग्लैंड टी-20 की सफलता को वनडे में भी दोहराने की कोशिश करेगा, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस प्रारूप में भारत का पलड़ा पिछले कुछ वर्षों से लगातार भारी रहा है।
भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक कुल 110 वनडे मुकाबले खेले जा चुके हैं। इनमें भारतीय टीम ने 61 मैचों में जीत दर्ज की है, जबकि इंग्लैंड को 44 मुकाबलों में सफलता मिली है। दो मैच टाई रहे और तीन मुकाबलों का कोई परिणाम नहीं निकला। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ अपने पिछले पांचों वनडे मुकाबले जीते हैं, जिससे टीम का आत्मविश्वास काफी ऊंचा होगा। इस सीरीज का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 2027 वनडे विश्व कप में अब करीब 15 महीने का समय शेष है। ऐसे में भारतीय टीम प्रबंधन हर मुकाबले को विश्व कप की तैयारियों के नजरिए से देख रहा है। टीम संयोजन, खिलाड़ियों की भूमिका और संभावित अंतिम एकादश को लेकर यह श्रृंखला कई सवालों के जवाब दे सकती है। सीरीज से पहले भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने स्पष्ट कर दिया है कि विराट कोहली अभी भी टीम की दीर्घकालिक योजनाओं का अहम हिस्सा हैं। गिल ने कहा कि उन्होंने विराट के साथ भविष्य की रणनीति और टीम संयोजन पर विस्तार से चर्चा की है। उनके अनुसार, रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी युवा टीम को संतुलन और आत्मविश्वास प्रदान करती है।
गिल का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों में अनुभव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और यही कारण है कि टीम प्रबंधन दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए हुए है। रोहित और विराट की वापसी से बल्लेबाजी क्रम को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि युवा खिलाड़ियों को भी उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। दूसरी ओर इस मुकाबले में सबसे अधिक निगाहें जसप्रीत बुमराह पर रहेंगी। लंबे समय बाद वनडे क्रिकेट में लौट रहे बुमराह भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करेंगे। नई गेंद से विकेट निकालने और अंतिम ओवरों में रन रोकने की उनकी क्षमता भारत के लिए बड़ी ताकत मानी जाती है। उनकी वापसी से गेंदबाजी विभाग पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है। हालांकि टीम को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। मोहम्मद सिराज इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं, जबकि स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या की अनुपस्थिति भी टीम के संतुलन पर असर डाल सकती है। ऐसे में ऑलराउंडर की भूमिका निभाने के लिए शिवम दुबे और वॉशिंगटन सुंदर के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। दोनों खिलाड़ी बल्लेबाजी के साथ उपयोगी गेंदबाजी भी कर सकते हैं, इसलिए अंतिम एकादश में किसे मौका मिलता है, इस पर सबकी नजर रहेगी। चोटिल हर्षित राणा की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार में से किसी एक को अंतिम एकादश में शामिल किया जा सकता है। टीम प्रबंधन पिच और परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम फैसला करेगा।
भारत की चुनौती के सामने इंग्लैंड की फॉर्म और जो रूट का दम
इंग्लैंड भले ही हाल ही में टी-20 श्रृंखला में भारत को 4-0 से हराने में सफल रहा हो, लेकिन वनडे क्रिकेट में उसका हालिया प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। वर्ष 2024 के बाद से इंग्लैंड सात में से पांच द्विपक्षीय वनडे श्रृंखलाएं हार चुका है। इतना ही नहीं, पिछले साल चैंपियंस ट्रॉफी में भी टीम एक भी मुकाबला जीतने में सफल नहीं रही थी। ऐसे में घरेलू मैदान पर यह श्रृंखला इंग्लैंड के लिए भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने का अवसर होगी।
इंग्लैंड की सबसे बड़ी उम्मीद अनुभवी बल्लेबाज जो रूट से रहेगी। रूट पिछले डेढ़ साल से शानदार फॉर्म में हैं और लगातार रन बना रहे हैं।
वर्ष 2024 के बाद से उन्होंने वनडे क्रिकेट में 65.93 की शानदार औसत से 1055 रन बनाए हैं। हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे श्रृंखला में उन्होंने 247 रन बनाकर अपनी शानदार लय का परिचय दिया था। भारतीय गेंदबाजों के सामने उन्हें जल्दी आउट करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। बर्मिंघम का एजबेस्टन मैदान हमेशा से बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए मददगार माना जाता है। शुरुआती ओवरों में गेंद स्विंग कर सकती है, जबकि बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम परिस्थितियों को देखते हुए पहले गेंदबाजी करने का फैसला कर सकती है।
भारतीय टीम के लिए यह श्रृंखला केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि 2027 विश्व कप की दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण परीक्षा भी है। रोहित शर्मा और विराट कोहली का अनुभव, शुभमन गिल की कप्तानी, जसप्रीत बुमराह की वापसी और युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस दौरे को बेहद खास बना देता है। यदि भारत इंग्लैंड के खिलाफ अपनी वनडे बादशाहत कायम रखने में सफल रहता है तो यह जीत आगामी विश्व कप अभियान के लिए टीम का मनोबल भी कई गुना बढ़ा देगी। वहीं इंग्लैंड घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर टी-20 के बाद वनडे में भी भारत पर दबदबा बनाने की कोशिश करेगा, जिससे दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले की पूरी उम्मीद है।

