देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही कई राज्यों में तेज बारिश का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को जारी अपने ताजा पूर्वानुमान में बताया कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बने सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले सात दिनों तक व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिलेंगी। कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी तथा कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश होने का भी अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस सक्रिय मौसम प्रणाली का असर देश के बड़े हिस्से में दिखाई देगा। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है और इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के कारण पूर्वी भारत से लेकर उत्तर भारत तक नमी से भरी हवाओं का प्रवाह बढ़ गया है। यही कारण है कि मानसून फिर से सक्रिय हो गया है और वर्षा का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है। ओडिशा को लेकर मौसम विभाग ने विशेष चेतावनी जारी की है। यहां कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना है। कई जिलों में जलभराव, निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति और नदी-नालों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी आगामी दिनों में लगातार बारिश का अनुमान है। खेतों में खड़ी खरीफ फसलों के लिए यह बारिश लाभदायक मानी जा रही है, हालांकि अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव से किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को मौसम की ताजा जानकारी के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी है।
हिमालयी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी वर्षा की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टानें गिरने और पहाड़ी मार्गों के बाधित होने का खतरा बना रहेगा। चारधाम यात्रा और अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को मौसम का अपडेट देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी आगामी दिनों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। यहां छिटपुट बारिश के साथ आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस तथा गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कुछ इलाकों में तेज बारिश के दौरान जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी।
पूर्वोत्तर से पश्चिम भारत तक बारिश का व्यापक असर, प्रशासन और लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले कई दिनों तक अच्छी बारिश होने की संभावना है। इन राज्यों में पहले से ही कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और झारखंड में भी वर्षा गतिविधियां तेज रहेंगी। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है। वहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के कई हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने के कारण कई स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की जा सकती है।
जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून की यह सक्रियता खरीफ फसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य फसलों की बुवाई वाले क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा से कृषि कार्यों को गति मिलेगी। हालांकि जहां अत्यधिक बारिश होगी, वहां जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने पर फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। बारिश के दौरान बिजली गिरने और तेज हवाओं की घटनाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों से कहा गया है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को भी संभावित भारी बारिश को देखते हुए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है, जबकि बाढ़ और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। नगर निकायों को जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले सात दिनों तक देश के कई हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। ऐसे में लोगों को नियमित रूप से मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान और चेतावनियों पर नजर रखने तथा मौसम के अनुरूप अपनी यात्रा और दैनिक गतिविधियों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। मानसून की यह नई सक्रियता जहां गर्मी से राहत लेकर आएगी, वहीं कई राज्यों में भारी बारिश के कारण जनजीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सतर्कता और सावधानी ही इस दौरान सबसे बड़ा बचाव मानी जाएगी।

