मानसून सत्र में विपक्ष अड़ा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बिना चर्चा को तैयार नहीं

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा में नीट पेपर लीक तथा 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) समर्थकों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विपक्ष ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सरकार ने चर्चा के लिए तैयार होने की बात दोहराई। लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दलों के सांसद विरोध के तेवर में नजर आए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। विपक्ष का आरोप था कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने सख्ती बरती, जिसे लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए। साथ ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक मामले पर सरकार को घेरते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नीट पेपर लीक देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा चाहता है, लेकिन पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। खड़गे ने आरोप लगाया कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार पिछले तीन दिनों से लगातार नीट पेपर लीक पर चर्चा कराने की पेशकश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन विपक्ष सदन चलने देने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में चर्चा ही समाधान का रास्ता है और सरकार इस पर पूरी तरह तैयार है। लोकसभा में भी हंगामे के बीच सरकार ने स्पष्ट किया कि वह नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। 

अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की सहमति दे दी है। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष से सभी दलों की बैठक बुलाने का आग्रह किया गया है, ताकि चर्चा के नियम, तारीख और अवधि पर सहमति बनाई जा सके। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं को राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति का माध्यम बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की हर चिंता को सुनने और उसका समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि देश के जागरूक और विवेकशील युवा किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रयासों को समझते हैं और राष्ट्र निर्माण तथा विकास के रास्ते को ही चुनेंगे।

नड्डा का विपक्ष पर हमला, कल्याण बनर्जी पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित

राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन का व्यवहार पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है और संसद के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन किया जा रहा है। नड्डा ने कहा कि संसदीय मर्यादा को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार किसी भी मुद्दे से भाग नहीं रही है।उधर, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ महिला सांसदों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, मई 2026 में तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

संसद के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज रही। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामान्य छात्र परीक्षा में देर से पहुंच जाए तो उसके लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी नेता का बेटा अन्य छात्रों से अलग है। दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों के मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है। निशिकांत दुबे ने आगे दावा किया कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को बांग्लादेश, पाकिस्तान और कुछ इस्लामिक देशों से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे तत्वों के साथ खड़ी होकर देश को कमजोर करने की राजनीति कर रही है। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

नीट पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और संसद के भीतर लगातार जारी टकराव के बीच अब सभी की निगाहें सरकार और विपक्ष के बीच प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक पर टिकी हैं। यदि चर्चा की रूपरेखा पर सहमति बनती है तो आने वाले दिनों में संसद में नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत बहस होने की संभावना है। वहीं, विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार चर्चा के माध्यम से पूरे मामले पर अपना पक्ष रखने की तैयारी में है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक और संसदीय विवाद बनकर उभरा है।

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