जंतर‑मंतर का आंदोलन जीता, शिक्षा मंत्री की कुर्सी खाली, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

दिल्ली का जंतर‑मंतर पिछले एक माह से साधारण विरोध का नहीं, बल्कि एक लंबी लड़ाई के निर्णायक मोड़ का गवाह बना । नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले शुरू हुआ महाधरना धीरे‑धीरे पूरे देश की बेचैनी का चेहरा बन गया। कभी दुल्हन के लिबास में पहुंची छात्रा, कभी दूर‑दराज से आए अभिभावक, किसान‑समूह और बेरोजगारी से जूझते युवक सबने मिलकर यह साफ कर दिया कि एक परीक्षा की धांधली दरअसल लाखों सपनों पर प्रहार है। “चलो संसद” के नारे, रात‑भर जागते छात्रों की थालियां और “गो प्रधान गो” की गूंज ने राजधानी की सियासत को सीधी चुनौती दी। इसी पृष्ठभूमि में आखिरकार शनिवार, 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग पूरी हुई और उन्हें पहली बार यह महसूस हुआ कि उनकी आवाज सत्ता तक सचमुच पहुंच गई है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नीट पेपर लीक विवाद की अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना है। कई हफ्तों से जारी छात्र‑आंदोलनों, विपक्ष के दबाव, अदालतों की तीखी टिप्पणियों और जंतर‑मंतर के महाधरने के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पद छोड़ने का फैसला किया। 

दो पन्नों के इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि बीते दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें भीतर तक दुखी किया है, वे विद्यार्थियों की पीड़ा समझते हैं और इसी कारण शिक्षा मंत्री के रूप में आगे बने रहना उन्हें नैतिक रूप से उचित नहीं लगा। यह स्वीकारोक्ति, भले ही देर से आई हो, लेकिन छात्रों के लिए यह संकेत है कि उनकी बात केवल सड़क पर नारे के रूप में नहीं रह गई, बल्कि सत्ता‑केन्द्र तक दर्ज हो चुकी है। जंतर‑मंतर पर डटे आंदोलनकारियों के लिए यह दिन भावनाओं का मिश्रण लेकर आया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न शुरू हो गया। छात्रों ने छात्र एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा, क्या कह रहे थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। एक तरफ “इस्तीफा दो” के नारे के पूरा होने पर खुशी, दूसरी तरफ यह चिंता कि क्या इससे उनकी बाकी मांगें भी पूरी होंगी या नहीं। कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का जाना आंदोलन की जीत जरूर है, पर लड़ाई खत्म नहीं। उनके अनुसार नीट प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा रद्द, पुनर्परीक्षा की अनिश्चितता और आत्महत्या की घटनाएं किसी एक मंत्री की गलती नहीं, बल्कि शिक्षा‑तंत्र की गंभीर कमजोरियां हैं। इसलिए अब नारा बदलकर “इस्तीफा से आगे सुधार तक” हो गया है यानी केवल चेहरे बदलने से नहीं, पूरे सिस्टम को बदलने से ही न्याय पूरा होगा। धरने के शुरुआती दिनों में मंच पर बोलने वालों के सुर में दर्द अधिक था, आक्रोश कम। 

पेपर लीक की खबर, परीक्षार्थियों की आत्महत्या, लाठीचार्ज और जंतर‑मंतर की रातें जैसे‑जैसे बीतती गईं, माहौल अधिक कड़ा होता गया। सोनम वांगचुक का लंबा अनशन इस आंदोलन को नैतिक ऊंचाई देता रहा, उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता के बावजूद, छात्रों ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक चेहरे का नहीं, हर उस विद्यार्थी का है जो सालों मेहनत के बाद सिर्फ एक निष्पक्ष प्रश्नपत्र और भरोसेमंद परिणाम चाहता है। “शिक्षा अधिकार है, सौदा नहीं” और “पेपर लीक बंद करो” जैसी तख्तियां इस बात की याद दिलाती रहीं कि यह आंदोलन केवल नीट तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा‑तंत्र की दिशा पर सवाल है। इस्तीफे के बाद अब फोकस साफ तौर पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों पर आ गया है। प्रधानमंत्री ने पहले ही नीट पेपर लीक को युवाओं के भविष्य के साथ किया गया “घोर पाप” बताते हुए कहा था कि सरकार ने तुरंत गिरफ्तारियां करवाईं, जहां जरूरत थी वहां पुनर्परीक्षा का निर्णय लिया और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था को अधिक सख्त बनाने की दिशा में काम शुरू किया है। अब धर्मेंद्र प्रधान के हटने के बाद यह संदेश और भी मजबूत रूप में सामने है कि सरकार इस विवाद को महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गंभीर राष्ट्रीय संकट मानकर देख रही है।  

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न 

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न शुरू हो गया। छात्रों ने छात्र एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। राष्ट्रगान गाया। इस दौरान नीट पेपर लीक के बाद जान गंवाने स्टूडेंट्स के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया। उधर, सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच कुछ देर में बातचीत शुरू होगी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और सौरभ दास, अभिषेक रांका कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंच गए हैं। 

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा, क्या कह रहे थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं।’ उन्होंने कहा, सुबह हो गई मामू, जनता जाग गई। हम ऐसे नहीं जाएंगे कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए।अभिजीत ने कहा, हमनें तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया तो तुम लोग क्या चीज हो। छात्रों पर केस वापस होने चाहिए। भईया ये लोकतंत्र है। मुझे एक महीने से लोग कहते थे क्या कर रहे हो कब तक बेठोगे। ये इस्तीफा नहीं देंगे। ये मनमानी सरकार है। मगर हमने कर दिखाया।

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