आध्यात्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक पावन पर्व गुरु पूर्णिमा आज देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को समर्पित होता है, जब शिष्य अपने गुरुओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हैं। मंदिरों, आश्रमों, मठों और शिक्षण संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं तथा गुरुजनों का सम्मान किया जा रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हुआ था। वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसी कारण इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान स्थान दिया गया है। माना जाता है कि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।
गुरु पूर्णिमा का महत्व बौद्ध परंपरा में भी विशेष माना जाता है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद इसी दिन सारनाथ में अपने पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। बोधगया से सारनाथ पहुंचकर उन्होंने धर्मचक्र प्रवर्तन किया, जिसके बाद बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार की शुरुआत हुई। यही कारण है कि बुद्ध के अनुयायी भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और ध्यान साधना करते हैं। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन पूजा, जप, ध्यान, दान और सेवा का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव, अपने इष्टदेव तथा गुरु का पूजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
श्रद्धालु सुबह स्नान कर व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान भी करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि गुरु वह शक्ति हैं जो व्यक्ति के जीवन से अज्ञानता का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन के कठिन मार्ग पर सही दिशा भी दिखाते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय माना गया है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने जीवन में गुरु, शिक्षक, माता-पिता और मार्गदर्शकों के योगदान को याद करने का अवसर देती है। यह पर्व ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है।
मान्यता है कि इस दिन गुरु का सम्मान करने और उनका आशीर्वाद लेने से जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा को भारतीय संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पर्वों में से एक माना जाता है। देशभर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आश्रमों और मठों में गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन हो रहा है। शैक्षणिक संस्थानों में भी विद्यार्थियों द्वारा अपने शिक्षकों का सम्मान किया जा रहा है। श्रद्धालु अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में ज्ञान, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहे हैं।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को दी शुभकामनाएं
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान प्रदान करने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे अपने शिष्यों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। सोशल मीडिया मंच पर साझा संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु अपने शिष्यों को श्रेष्ठ विचारों, मूल्यों और सद्गुणों से परिपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने आदर्शों और गुरुओं से मिली शिक्षाओं को जीवन की शक्ति का स्रोत बनाएं और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु केवल ज्ञान के दाता नहीं, बल्कि संस्कार और चरित्र के शिल्पकार होते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा हमारी सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर है, जिसने पीढ़ियों को सत्य, सेवा, समर्पण और राष्ट्रधर्म का मार्ग दिखाया है। राजनाथ सिंह ने गुरुजनों को नमन करते हुए राष्ट्र सेवा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरु पूर्णिमा के महत्व को रेखांकित करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि वे अपने ज्ञान रूपी अमृत से शिष्यों के जीवन को संवारते हैं। अमित शाह ने कहा कि गुरु न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि चरित्र निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के भविष्य को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने समस्त गुरुजनों को नमन करते हुए उनके योगदान को देश के विकास की आधारशिला बताया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है और उसे सफलता तथा आत्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने सभी नागरिकों को इस पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जगद्गुरु आदि शंकराचार्य को नमन किया। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अज्ञान के अंधकार को दूर कर अद्वैत दर्शन की अमर ज्योति प्रज्वलित की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शंकराचार्य ने भारत की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना कर देश को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधा। उन्होंने कहा कि गुरु हमें यह सिखाते हैं कि समस्त सृष्टि एक ही चेतना का विस्तार है और मानवता का कल्याण ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य होना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी गुरु पूर्णिमा पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति की उस शाश्वत चेतना का उत्सव है, जिसने सदियों से ज्ञान, मूल्यों, सत्य और मानवता के प्रकाश से समाज का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि हमारी गौरवशाली परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं। ओम बिरला ने कहा कि गुरुजनों की शिक्षाएं व्यक्ति के जीवन को दिशा देती हैं और उसे समाज के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराती हैं।

