हिमाचल में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, सुक्खू सरकार ने लगाया ‘अनाथ एवं विधवा सेस’, हर लीटर पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ

हिमाचल प्रदेश में मंगलवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का नया ‘अनाथ एवं विधवा सेस’ लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त राशि का उपयोग राज्य में अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं के कल्याण के लिए किया जाएगा। हालांकि, इस फैसले के बाद वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह उपकर 12 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके तहत पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की पहली बिक्री के समय 60 पैसे प्रति लीटर की दर से सेस वसूला जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह उपकर प्रत्येक स्तर पर नहीं लगाया जाएगा, बल्कि ‘प्वाइंट ऑफ फर्स्ट सेल’ यानी पहली बिक्री के चरण में ही इसकी वसूली होगी।

सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी शिमला में पेट्रोल की मौजूदा कीमत 102.45 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 103.05 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दामों में समान वृद्धि लागू हुई है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह केवल राजस्व बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं पहले से संचालित हैं, लेकिन इन योजनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए एक स्थायी वित्तीय स्रोत की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

यही कारण है कि सरकार ने ईंधन पर विशेष उपकर लगाने का फैसला लिया। अधिकारियों के अनुसार इस सेस से प्राप्त होने वाली पूरी राशि एक अलग कोष में जमा की जाएगी, ताकि इसका उपयोग केवल निर्धारित सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए ही किया जा सके। इससे योजनाओं के संचालन और विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हिमाचल प्रदेश सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने के लिए अलग वित्तीय व्यवस्था जरूरी है। अनाथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और पुनर्वास जैसी जरूरतों के साथ-साथ विधवाओं को आर्थिक सहायता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है। सरकार का दावा है कि नया उपकर इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक बनेगा।

इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सामाजिक कल्याण के लिए उठाया गया सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में ईंधन पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क आम लोगों पर बोझ बढ़ाता है। खासकर निजी वाहन चालकों, परिवहन क्षेत्र और व्यवसायिक गतिविधियों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि उपकर की दर बहुत सीमित रखी गई है और इसका उद्देश्य राजस्व संग्रह के बजाय जरूरतमंद वर्गों को सहायता पहुंचाना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं पर न्यूनतम प्रभाव डालते हुए सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है।

कानून में पांच रुपये प्रति लीटर तक सेस लगाने का प्रावधान

‘अनाथ एवं विधवा सेस’ की व्यवस्था हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत की गई है। इस कानून को इसी वर्ष राज्य विधानसभा में पारित किया गया था। अधिनियम के अनुसार सरकार को पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर अधिकतम पांच रुपये प्रति लीटर तक उपकर लगाने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि फिलहाल सरकार ने इसकी दर 60 पैसे प्रति लीटर तय की है। भविष्य में परिस्थितियों और आवश्यकता के अनुसार सरकार अधिसूचना जारी कर इस दर में बदलाव भी कर सकती है। कानून में यह भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उपकर से प्राप्त पूरी राशि ‘अनाथ एवं विधवा वेलफेयर फंड’ में जमा की जाएगी और उसका उपयोग केवल अनाथ बच्चों तथा विधवाओं के कल्याण से संबंधित योजनाओं में ही किया जाएगा। 

राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधित कानून अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया था। इसके बाद सरकार ने आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर अब उपकर लागू करने की अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में विधेयक पेश करते समय कहा था कि राज्य के अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं को दी जाने वाली सहायता को और प्रभावी बनाने के लिए अलग वित्तीय व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि इस उपकर से मिलने वाले संसाधनों का उपयोग सीधे उन लोगों तक मदद पहुंचाने में किया जाएगा जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। सरकार के अनुसार यह कदम केवल राजस्व जुटाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की दिशा में उठाया गया प्रयास है। 

इससे कल्याणकारी योजनाओं को दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती मिलेगी और जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। फिलहाल राज्य में नया उपकर लागू होने के साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ चुकी हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का सामाजिक योजनाओं पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और आम जनता इसे किस रूप में स्वीकार करती है।

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