उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से आने वाले हाइब्रिड वाहनों के लिए अब सफर थोड़ा महंगा होने जा रहा है। राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक मोटर के साथ पेट्रोल या डीजल इंजन से चलने वाले हाइब्रिड वाहनों को ग्रीन सेस से मिलने वाली छूट खत्म करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अब प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले ऐसे वाहनों से निर्धारित नियमों के अनुसार ग्रीन सेस लिया जाएगा। धामी सरकार का मानना है कि हाइब्रिड वाहन भले ही इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से चलते हों, लेकिन इनमें पेट्रोल या डीजल की भी खपत होती है। इसलिए इन्हें पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन की श्रेणी में रखकर ग्रीन सेस से छूट देना उचित नहीं है। कैबिनेट बैठक में परिवहन विभाग की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव रखा गया, जिस पर चर्चा के बाद सरकार ने इसे मंजूरी दे दी। इस फैसले का सीधा असर दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वाले हाइब्रिड वाहनों पर पड़ेगा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों से उत्तराखंड आने वाले ऐसे वाहन अब राज्य की सीमा में प्रवेश के दौरान ग्रीन सेस के दायरे में होंगे। हालांकि, सीएनजी से चलने वाले वाहनों को फिलहाल इस शुल्क से बाहर रखा गया है।
ग्रीन सेस लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण के प्रभाव को कम करना और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाना है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील राज्य में वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार परिवहन क्षेत्र को लेकर लगातार नई व्यवस्थाएं लागू कर रही है। हाइब्रिड वाहनों को लेकर सरकार का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ हाइब्रिड वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। हाइब्रिड वाहन पेट्रोल या डीजल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल करते हैं।
इससे सामान्य पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में ईंधन की खपत और प्रदूषण कम हो सकता है, लेकिन इनमें जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल पूरी तरह समाप्त नहीं होता।
उत्तराखंड सरकार अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। कैबिनेट में इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने से संबंधित प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को दूसरे राज्यों में लागू इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों का अध्ययन कर प्रदेश के लिए प्रभावी नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि सरकार स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने की तैयारी में है।
धामी सरकार की कैबिनेट मीटिंग में 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में केवल हाइब्रिड वाहनों से जुड़े ग्रीन सेस के प्रस्ताव पर ही फैसला नहीं हुआ, बल्कि राज्य के अलग-अलग विभागों से जुड़े कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026 को स्वीकृति दी गई। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों से संबंधित वेतन मैट्रिक्स में संशोधन, स्वास्थ्य विभाग के सांख्यिकीय संवर्ग की सेवा नियमावली और उत्तराखंड मेडिकल सप्लाईज कॉरपोरेशन के गठन से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं, सर्जिकल सामग्री, रसायन, चिकित्सा उपकरण और प्रत्यारोपण सामग्री की खरीद के लिए मेडिकल सप्लाईज कॉरपोरेशन बनाने का निर्णय लिया गया है। हरिद्वार में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की शाखा के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। कारागार विभाग में उप कारापाल सेवा नियमावली में संशोधन तथा लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए खोजबीन समिति से संबंधित नियमावली को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली।
इसके साथ ही आबादी सर्वेक्षण और भूमि अभिलेख से जुड़ी व्यवस्था, सीड्स एवं तराई विकास निगम के कार्मिकों के सेवा स्थानांतरण और काठबंगला क्षेत्र के 116 आवासों के आवंटन से जुड़े प्रस्ताव भी मंजूर किए गए। उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी में 94 अस्थायी पदों के सृजन को भी हरी झंडी दी गई। ऋषिकेश कैंसर हॉस्पिस से संबंधित स्टांप शुल्क में छूट और उत्तरांचल विश्वविद्यालय परिनियम-2026 को भी कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की।
बैठक में उपनल कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पात्र उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते से जुड़े प्रावधानों पर भी निर्णय लिया गया। इससे लंबे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। पूर्व अग्निवीरों के लिए भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेवामुक्त अग्निवीरों को रोजगार, उच्च शिक्षा और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए समर्पित प्रकोष्ठ बनाने का निर्णय लिया गया। इस प्रकोष्ठ में छह पद होंगे और इसका उद्देश्य अग्निवीरों को सेना की सेवा पूरी करने के बाद राज्य में आगे के अवसर उपलब्ध कराने में सहायता करना होगा।
ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा फैसला हुआ। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को अडानी पावर से 1320 मेगावाट बिजली खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह बिजली 25 वर्षों के लिए खरीदने की व्यवस्था से जुड़ा है। राज्य में बिजली की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन फैसलों के बीच हाइब्रिड वाहनों पर ग्रीन सेस की छूट खत्म करने का निर्णय परिवहन और पर्यावरण के लिहाज से खास महत्व रखता है। अब उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से आने वाले हाइब्रिड वाहनों को राज्य की सीमा में प्रवेश करने पर ग्रीन सेस देना होगा। वहीं सीएनजी वाहनों को फिलहाल इससे राहत दी गई है। सरकार के इन फैसलों से साफ है कि उत्तराखंड एक तरफ राजस्व और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक परिवहन, स्वास्थ्य, रोजगार, ऊर्जा और कर्मचारियों से जुड़े क्षेत्रों में भी नीतिगत बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

