लॉटरी की तैयारी से गरमाई हिमाचल की सियासत, जयराम ठाकुर ने सुखविंदर सरकार को दी चेतावनी

हिमाचल प्रदेश में करीब ढाई दशक से बंद लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की तैयारी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। राज्य सरकार की ओर से लॉटरी की बिक्री के लिए एकमात्र बिक्री एजेंट नियुक्त करने को लेकर निविदा जारी किए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने लॉटरी शुरू करने के फैसले को आम लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल को राजस्व जुटाने के लिए ऐसा रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, जिसका सामाजिक असर गंभीर हो सकता है। जयराम ठाकुर ने लॉटरी की तुलना नशे से करते हुए कहा कि इसकी लत लगने के बाद व्यक्ति को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वह कितना पैसा गंवा रहा है। उनके मुताबिक कई परिवार लॉटरी के चक्कर में अपनी जमा पूंजी, जेवर और यहां तक कि घर तक बेचने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल का युवा पहले ही चिट्टे और दूसरे नशों की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे समय में लॉटरी को बढ़ावा देना लोगों के सामने आर्थिक बर्बादी का एक और रास्ता खोलने जैसा होगा।

विपक्ष का तर्क है कि सरकार को अपने राजस्व घाटे की भरपाई के लिए ऐसे साधनों पर निर्भर नहीं होना चाहिए, जिनसे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका हो। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि लॉटरी से भले ही कुछ लोगों को बड़ी रकम मिल जाए, लेकिन बड़ी संख्या में लोग टिकट खरीदने में अपनी मेहनत की कमाई गंवा सकते हैं। ऐसे में सरकार को राजस्व के साथ-साथ इसके सामाजिक प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए। जयराम ठाकुर ने लॉटरी संचालन को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों या एजेंसियों को लॉटरी का लाइसेंस या संचालन की जिम्मेदारी दी जा रही है, उनकी भूमिका भविष्य में जांच का विषय बन सकती है। उन्होंने सरकार से पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि लॉटरी व्यवस्था किस तरह संचालित होगी, टिकटों की बिक्री कैसे होगी और इससे होने वाले राजस्व का वास्तविक लाभ प्रदेश को कितना मिलेगा।

सरकार की ओर से लॉटरी शुरू करने के पीछे मुख्य तर्क राजस्व बढ़ाना है। प्रदेश में करीब दो दशक से अधिक समय से लॉटरी बंद है। सरकार का कहना है कि हिमाचल के लोग दूसरे राज्यों की लॉटरी खरीदते हैं और इस तरह पैसा प्रदेश से बाहर जा रहा है। सरकार अब नियंत्रित और नियमबद्ध व्यवस्था के जरिए इस गतिविधि से मिलने वाले राजस्व को प्रदेश के खजाने में लाना चाहती है। इस दिशा में सरकार ने पहले ही हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी विनियमन नियम, 2026 तैयार किए हैं। जून में अधिसूचित नियमों के अनुसार राज्य सरकार ही लॉटरी का आयोजन, संचालन और प्रशासन करेगी। नियमों में कागजी और ऑनलाइन दोनों तरह की लॉटरी आयोजित करने का प्रावधान रखा गया है। इन्हें हिमाचल प्रदेश के भीतर ही नहीं, बल्कि उन स्थानों पर भी बेचा जा सकेगा जहां कानून के तहत इसकी अनुमति है। सरकार के कोष, लेखा एवं लॉटरी विभाग ने 21 अगस्त को कागजी और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए एकमात्र बिक्री एजेंट नियुक्त करने को लेकर निविदा भी जारी की है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी सूचना दर्ज है।

सिंगल लाइन और सिंगल अंक वाली लॉटरी नहीं होगी: सरकार

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष के आरोपों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि हिमाचल में रोजाना खुलने वाली सिंगल लाइन या सिंगल अंक वाली लॉटरी शुरू नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि सरकार ने लॉटरी के संचालन के लिए नियम और मानक तय किए हैं तथा पूरी व्यवस्था को निर्धारित नियमों के तहत संचालित किया जाएगा। सरकार की योजना के मुताबिक लॉटरी से शुरुआती दौर में करीब 10 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि व्यवस्था के विस्तार के साथ यह आय बढ़कर करीब 100 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच सकती है। वहीं हालिया निविदा प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टों में सरकार की ओर से अधिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य भी सामने आया है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक सरकार दीपावली के आसपास लॉटरी की शुरुआत करने की तैयारी में है। लॉटरी की वापसी को लेकर सरकार की तैयारी अचानक शुरू नहीं हुई है। फरवरी 2026 में राज्य सरकार ने लॉटरी विनियमन नियम और निविदा दस्तावेज तैयार करने के लिए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की थी। इसके बाद जून में नए नियम अधिसूचित किए गए और अगस्त में बिक्री एजेंट की नियुक्ति के लिए निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

इस बीच विपक्ष की आपत्ति केवल जयराम ठाकुर तक सीमित नहीं रही है। हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर लॉटरी के लिए जारी निविदा तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने इसे दो दशक से अधिक समय से चली आ रही राजनीतिक सहमति के विपरीत बताया है। अनुराग ठाकुर का तर्क है कि राज्य की आर्थिक समस्याओं का समाधान लॉटरी से नहीं हो सकता और सरकार को राजस्व बढ़ाने के दूसरे विकल्पों पर काम करना चाहिए।

विपक्ष का यह भी कहना है कि लॉटरी से मिलने वाला राजस्व सरकार की आर्थिक जरूरतों की तुलना में बहुत बड़ा समाधान नहीं है। दूसरी ओर सरकार इसे अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में देख रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा केवल लॉटरी शुरू करने या न करने तक सीमित रहने के बजाय सरकार की आर्थिक नीति और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अतिरिक्त राजस्व के लिए लॉटरी जैसी व्यवस्था को दोबारा शुरू करना उचित है या इससे होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान का खतरा ज्यादा बड़ा है। सरकार जहां नियंत्रित व्यवस्था और राजस्व बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे परिवारों और युवाओं के लिए नुकसानदेह बता रहा है। फिलहाल निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और सरकार की ओर से लॉटरी शुरू करने की तैयारी जारी है। ऐसे में दीपावली के आसपास प्रस्तावित शुरुआत से पहले हिमाचल की राजनीति में इस मुद्दे पर टकराव और तेज होने के आसार हैं।

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