देशभर में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और दिनभर भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठानों तथा विशेष पूजन का दौर चलता रहा। जैसे-जैसे रात करीब आती गई, मंदिरों में श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर उत्साह बढ़ता गया। मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों की घंटियां गूंज उठीं और ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। मथुरा-वृंदावन से लेकर द्वारका, दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दक्षिण भारत तक श्रद्धालु श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मौके पर इस बार देशभर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट की गई। मंदिरों को फूलों, रोशनी और आकर्षक झांकियों से सजाया गया। कई स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रासलीला पर आधारित झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनीं। आधी रात को जैसे ही जन्मोत्सव का समय हुआ, भगवान के बाल स्वरूप का अभिषेक कर आरती की गई और भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।
मथुरा में जन्माष्टमी का सबसे बड़ा आकर्षण श्रीकृष्ण जन्मभूमि रहा। यहां भगवान श्रीकृष्ण का सोने से सजी चांदी की कामधेनु से अभिषेक किया गया। जन्मोत्सव को भव्य बनाने के लिए 500 ड्रोन के माध्यम से कृष्ण लीलाओं का प्रदर्शन किया गया। आसमान में दिखाई गई इन आकृतियों और दृश्यों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मथुरा में शाम छह बजे तक ही 15 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। शहर के प्रमुख मंदिरों और मार्गों पर भक्तों की भारी भीड़ रही। वृंदावन में भी बांके बिहारी मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष आयोजन हुए। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन किए। गलियों और बाजारों में भी श्रीकृष्ण के जयकारे सुनाई देते रहे। कई स्थानों पर भक्तों ने भजन-कीर्तन और संकीर्तन में हिस्सा लिया।
द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के मंदिर में भी जन्माष्टमी का उल्लास देखने को मिला। यहां विशेष पूजा-अर्चना और मंगला आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। गुजरात के अन्य कृष्ण मंदिरों में भी रात 12 बजे जन्मोत्सव मनाया गया। दिल्ली में इस्कॉन मंदिर सहित राजधानी के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष पूजा की गई। राजस्थान में भी जन्माष्टमी की धूम रही। राजसमंद के नाथद्वारा में भगवान श्रीनाथजी के जन्मोत्सव के अवसर पर 21 तोपों की सलामी दी गई। जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में सुबह मंगला आरती से ही जन्माष्टमी समारोह की शुरुआत हुई। मंदिर में विशेष श्रृंगार और पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्साह चरम पर रहा। मुंबई और ठाणे समेत पूरे महाराष्ट्र में मंदिरों में विशेष आयोजन किए गए। मुंबई के प्रमुख इस्कॉन मंदिर और अन्य कृष्ण मंदिरों में भक्तों ने भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया। कई स्थानों पर दही-हांडी की तैयारियां भी देखने को मिलीं। युवाओं और बच्चों में दही-हांडी को लेकर विशेष उत्साह रहा। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया। उज्जैन के धार्मिक स्थलों में भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ विशेष आयोजन हुए। इंदौर और भोपाल में भी देर रात तक मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
दिल्ली के साथ एनसीआर में भी जन्माष्टमी को लेकर खास उत्साह रहा। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा और झांकियों का आयोजन किया गया। दिल्ली के इस्कॉन मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में कृष्ण भक्ति से जुड़े कार्यक्रमों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। कई इलाकों में मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था भी की गई। दक्षिण भारत में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा के साथ मनाई गई। तमिलनाडु में चेन्नई सहित विभिन्न शहरों के मंदिरों में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा की गई। घरों में भी बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में सजाने की परंपरा देखने को मिली। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी कृष्ण मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए।
बदरीनाथ से पटना तक आधी रात को हुआ श्रीकृष्ण का प्रकटोत्सव
उत्तराखंड में भी जन्माष्टमी का पर्व पूरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। बदरीनाथ धाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास चरम पर पहुंच गया। मंदिर परिसर कृष्ण भजनों और धार्मिक आयोजनों से गुंजायमान रहा। देश-विदेश से बदरीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और विशेष पूजा-अर्चना की। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के तहत शुक्रवार मध्यरात्रि करीब दो बजे श्री बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद किए गए। इसके चलते शनिवार पांच सितंबर को मंदिर में होने वाली नित्य पूजाओं के समय में आंशिक बदलाव किया गया। धाम में जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान बदरीविशाल के दर्शन के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भी आनंद लिया।
बिहार की राजधानी पटना में स्थित इस्कॉन मंदिर में भी जन्माष्टमी पर भव्य आयोजन किया गया। भगवान कृष्ण का 108 चांदी के कलशों से अभिषेक किया गया। मंदिर को सजाने के लिए अलग-अलग किस्म के करीब आठ टन फूल मंगाए गए थे। फूलों की सजावट और रोशनी से मंदिर परिसर बेहद आकर्षक नजर आया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जन्मोत्सव में शामिल हुए। हिमाचल प्रदेश में शिमला, कांगड़ा, धर्मशाला, मंडी और अन्य क्षेत्रों के मंदिरों में भी जन्माष्टमी पर विशेष पूजा और भजन-कीर्तन आयोजित किए गए। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित कृष्ण मंदिरों में स्थानीय लोगों के साथ बाहर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
देश के विभिन्न हिस्सों में जन्माष्टमी के दौरान मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था। मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर, दिल्ली के इस्कॉन मंदिर और जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में मंगला आरती के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद पूरे दिन भगवान के विशेष श्रृंगार, पूजा और दर्शन का क्रम चलता रहा। जन्माष्टमी की रात जैसे-जैसे 12 बजे का समय नजदीक आया, मंदिरों में भक्तों की उत्सुकता बढ़ती गई। कई मंदिरों में भगवान कृष्ण के जन्म के समय शंखनाद किया गया। घंटियां बजाई गईं और आरती उतारी गई। भगवान के बाल स्वरूप को पालने में विराजमान कर झुलाया गया। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और प्रसाद ग्रहण किया।
देशभर में मनाए गए इस पर्व ने एक बार फिर मथुरा-वृंदावन की कृष्ण भक्ति से लेकर द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, पटना और बदरीनाथ तक आस्था की एक ऐसी तस्वीर पेश की, जिसमें क्षेत्र और भाषा की सीमाएं पीछे छूट गईं। आधी रात को श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में उमड़ा उल्लास देर रात तक बना रहा और भक्त भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन कर खुद को धन्य मानते रहे।

