राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत कराए गए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में किए गए प्रयासों के आधार पर लखनऊ को देश का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर चुना गया है। खास बात यह है कि पिछले सर्वेक्षण में 15वें स्थान पर रहने वाला लखनऊ इस बार लंबी छलांग लगाते हुए सीधे पहले पायदान पर पहुंच गया। इस उपलब्धि के लिए लखनऊ नगर निगम को 1.50 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। लखनऊ की इस सफलता के साथ शहर के एक वार्ड ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बाजी मारी है। जोन-4 के वार्ड नंबर-70 पेपर मिल कॉलोनी को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया है। वार्ड को बेहतर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए गए कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। शहर और वार्ड, दोनों का एक साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल करना लखनऊ के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित पुरस्कार समारोह में लखनऊ की ओर से महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने पुरस्कार ग्रहण किया। समारोह में स्वच्छ वायु के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत देश के शहरों में वायु प्रदूषण कम करने और हवा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शहरों के प्रदर्शन का आकलन विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाता है। लखनऊ ने इस बार इन मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया।दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया। इस श्रेणी में इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा। पिछले वर्ष 2024-25 के सर्वेक्षण में लखनऊ 15वें स्थान पर था। एक वर्ष के भीतर 14 पायदान की छलांग लगाकर पहले स्थान पर पहुंचना नगर निगम के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस बदलाव से यह भी स्पष्ट होता है कि शहर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों का असर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के लिहाज से भी यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है। इस बार प्रदेश से लखनऊ ही ऐसा शहर है, जिसे इस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राजधानी के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या और निर्माण गतिविधियों के बीच हवा की गुणवत्ता बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिलना नगर निगम के प्रयासों को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ नगर निगम की ओर से शहर में स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े कई स्तरों पर काम किए जा रहे हैं। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सड़क किनारे धूल नियंत्रण, स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और प्रदूषण के स्रोतों पर निगरानी जैसे प्रयासों को प्राथमिकता दी गई। शहर में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों को भी आगे बढ़ाया गया। पेपर मिल कॉलोनी वार्ड का प्रदर्शन भी इसी दिशा में उल्लेखनीय रहा। 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों में देश में पहला स्थान हासिल करना बताता है कि स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों का मूल्यांकन भी प्रभावी तरीके से हुआ। वार्ड को मिले 50 लाख रुपये के पुरस्कार से क्षेत्र में पर्यावरण और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल बोलीं- यह पूरे लखनऊ की उपलब्धि
महापौर सुषमा खर्कवाल ने लखनऊ को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिलने पर खुशी जताते हुए इसे पूरे शहर की उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देश में पहला स्थान हासिल करना लखनऊ के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान केवल नगर निगम की टीम के प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें शहर के लोगों की भागीदारी और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। महापौर ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और नगर विकास मंत्री के मार्गदर्शन के साथ नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और शहरवासियों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि शहर की हवा को बेहतर बनाने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि लखनऊ को मिला यह सम्मान शहर को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों को नई ऊर्जा देगा। नगर निगम आने वाले समय में भी पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए काम जारी रखेगा। शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, सफाई व्यवस्था मजबूत करने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों को और प्रभावी बनाया जाएगा। महापौर के मुताबिक, किसी शहर की स्वच्छ हवा केवल सरकारी प्रयासों से सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए आम नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। शहरवासी यदि स्वच्छता बनाए रखने, कूड़ा खुले में न जलाने, सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें तो वायु गुणवत्ता में और सुधार किया जा सकता है।
लखनऊ की इस उपलब्धि में पेपर मिल कॉलोनी वार्ड का राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल करना भी खास है। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों में पर्यावरण और स्वच्छता के लिए किए जा रहे स्थानीय प्रयासों को प्रोत्साहन मिलेगा। 50 लाख रुपये का पुरस्कार वार्ड के विकास और पर्यावरण संबंधी कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर सुविधाओं को और बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। पिछले वर्ष 15वें स्थान पर रहने के बाद इस बार पहले स्थान पर पहुंचना लखनऊ के प्रदर्शन में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर जैसे शहरों के बीच पहले स्थान पर आना राजधानी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इंदौर को इस बार दूसरा और जबलपुर को तीसरा स्थान मिला है। लखनऊ की सफलता को शहर में स्वच्छ वायु के लिए किए जा रहे प्रयासों के परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है। पुरस्कार मिलने के बाद नगर निगम के सामने अब इस प्रदर्शन को बनाए रखने की चुनौती भी होगी। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद शहर में वायु गुणवत्ता सुधार की योजनाओं को लगातार जारी रखना और उन्हें और मजबूत करना जरूरी होगा।
नगर निगम के लिए यह पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि आगे की जिम्मेदारी भी बढ़ाने वाला है। शहरवासियों की उम्मीदें अब स्वच्छ और बेहतर हवा को लेकर और बढ़ेंगी। यदि नगर निगम प्रशासन, विभिन्न विभागों और नागरिकों के बीच इसी तरह समन्वय बना रहा तो लखनऊ आने वाले वर्षों में भी स्वच्छ वायु के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। इस बार लखनऊ ने न केवल बड़े शहरों की श्रेणी में देश में पहला स्थान हासिल किया, बल्कि उसके एक वार्ड ने भी अपनी श्रेणी में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। शहर और वार्ड की इस दोहरी सफलता ने लखनऊ के पर्यावरणीय प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। पिछले वर्ष 15वें स्थान से इस वर्ष पहले स्थान तक का सफर राजधानी के लिए खास उपलब्धि है और इससे स्वच्छ हवा की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता भी मजबूत हुआ है।

