हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल देखने को मिल सकता है। राज्य की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कैबिनेट में एक या दो नए चेहरों को जगह मिल सकती है। फिलहाल मंत्रिमंडल में एक मंत्री का पद खाली है, लेकिन सियासी चर्चाओं के मुताबिक इस बार केवल खाली पद भरने के बजाय कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों और जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया जा सकता है। मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चा उस समय और तेज हो गई, जब कैबिनेट के करीब आधे मंत्रियों को अचानक दिल्ली बुलाया गया। कांग्रेस हाईकमान बुधवार को हिमाचल प्रदेश के मंत्रियों के साथ बैठक करने वाला है। इस बैठक को राज्य सरकार और संगठन के स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में सरकार के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन और आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मंत्रिमंडल में दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाने के पक्ष में हैं। हालांकि, किसी वरिष्ठ मंत्री को कैबिनेट से बाहर करने का फैसला केवल मुख्यमंत्री स्तर पर नहीं हो सकता।
इसके लिए कांग्रेस हाईकमान की सहमति जरूरी होगी। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाली बैठक को मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल हिमाचल के मंत्रियों के साथ बैठक कर सकते हैं। संभावना है कि सामूहिक बैठक के साथ-साथ कुछ मंत्रियों से अलग-अलग यानी वन-टू-वन बातचीत भी की जाए। इस दौरान उनके विभागों के कामकाज, सरकार की योजनाओं की प्रगति, जनता के बीच उनकी पकड़ और संगठन के साथ उनके तालमेल का भी आकलन किया जा सकता है।
दरअसल, मुख्यमंत्री सुक्खू की सरकार के गठन के बाद से ही समय-समय पर मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें लगती रही हैं। अब दिल्ली में हाईकमान के साथ होने वाली बैठक ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व केवल खाली मंत्री पद को भरेगा या फिर सरकार के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए व्यापक फेरबदल का फैसला करेगा।
शांडिल और चंद्र कुमार के नाम की चर्चा, जातीय समीकरण भी बड़ी चुनौती
मंत्रिमंडल से जिन दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चाएं सबसे ज्यादा हैं, उनमें स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और कृषि मंत्री चंद्र कुमार के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन दोनों नेताओं को कैबिनेट से हटाए जाने की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों नेता सरकार में वरिष्ठ भूमिका निभा रहे हैं और लंबे समय से हिमाचल की राजनीति में सक्रिय हैं।
धनीराम शांडिल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि चंद्र कुमार कृषि विभाग के मंत्री हैं। दोनों की अपनी राजनीतिक और सामाजिक पहचान है। ऐसे में उन्हें मंत्रिमंडल से हटाना कांग्रेस नेतृत्व के लिए आसान फैसला नहीं होगा। धनीराम शांडिल अनुसूचित जाति यानी एससी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि चंद्र कुमार अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी समुदाय से आते हैं। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य में मंत्रिमंडल के गठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में दोनों वरिष्ठ नेताओं को एक साथ हटाने से पहले पार्टी नेतृत्व को राजनीतिक असर का आकलन करना होगा।
यही कारण है कि माना जा रहा है कि हाईकमान किसी भी बदलाव को लेकर संबंधित नेताओं की सहमति बनाने की कोशिश करेगा। अगर दोनों वरिष्ठ मंत्रियों को हटाने पर सहमति नहीं बनती है तो फिलहाल केवल कैबिनेट में खाली पड़े एक पद को ही भरे जाने की संभावना अधिक रहेगी। वहीं, अगर हाईकमान और मुख्यमंत्री के बीच दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाने पर सहमति बन जाती है तो उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इससे सरकार में नए नेताओं को जिम्मेदारी मिलने के साथ ही कांग्रेस संगठन में भी संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।
संभावित नए चेहरों को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चाएं शुरू हो सकती हैं। नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय समीकरण, संगठन के साथ जुड़ाव और आगामी चुनावी जरूरतों को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, अभी किसी नाम को लेकर आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है। दिल्ली में होने वाली बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें केवल मंत्रियों का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि सरकार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति की भी समीक्षा हो सकती है। कांग्रेस नेतृत्व यह जानने की कोशिश कर सकता है कि सरकार की योजनाओं और नीतियों का जमीन पर कितना असर दिख रहा है और मंत्री अपने-अपने विभागों को कितनी प्रभावी तरीके से संभाल रहे हैं।
अगर समीक्षा के बाद कुछ मंत्रियों के कामकाज में बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो उनके विभाग बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ के विभाग दूसरे नेताओं को सौंपे जा सकते हैं। इस तरह संभावित बदलाव केवल मंत्रियों को हटाने या नए चेहरों को शामिल करने तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। फिलहाल हिमाचल कांग्रेस और सरकार के भीतर सभी की निगाहें दिल्ली की बैठक पर टिकी हैं। बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मुख्यमंत्री सुक्खू की कैबिनेट में केवल एक नए मंत्री की एंट्री होती है या दो वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका दिया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस हाईकमान मुख्यमंत्री की उस रणनीति पर मुहर लगाएगा, जिसके तहत दो वरिष्ठ मंत्रियों को हटाकर मंत्रिमंडल को नया रूप देने की चर्चा है। दूसरी ओर, शांडिल और चंद्र कुमार जैसे नेताओं को उनके सामाजिक आधार और वरिष्ठता के कारण हटाने से पार्टी के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती भी खड़ी हो सकती है। इसलिए आज, बुधवार की दिल्ली बैठक को हिमाचल सरकार के लिए महज औपचारिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। बैठक में होने वाली चर्चा आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल की तस्वीर बदल सकती है। हालांकि, जब तक कांग्रेस हाईकमान या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक वरिष्ठ मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चाओं को केवल संभावित फेरबदल के तौर पर ही देखा जाएगा।

