सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण पर दिल्ली सरकार का बड़ा एक्शन, जर्जर इमारतों पर चलेगा बुलडोजर

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में अवैध और जर्जर निर्माण के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली नगर निगम को राजधानी के अलग-अलग इलाकों में अवैध निर्माण और खतरनाक इमारतों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे ढांचों को बुलडोजर से गिराने को भी कहा गया है। बुधवार को दिल्ली सरकार के निर्देश के बाद नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी अभियान के तहत न्यू अशोक नगर इलाके में अधिकारियों ने एक ओयो होटल को सील किया है। अधिकारियों की कार्रवाई का दायरा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। सरकार ने साफ किया है कि जहां भी निर्माण नियमों का उल्लंघन या लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ पाया जाएगा, वहां कार्रवाई की जाएगी। सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां मरम्मत और निर्माण से जुड़े काम चल रहे थे। पुलिस की शुरुआती जांच में भी यह बात सामने आई है कि हादसे के समय भवन में बड़े स्तर पर मरम्मत का काम चल रहा था। इसके बाद सरकार ने केवल हादसे वाली इमारत तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पूरी दिल्ली में ऐसे भवनों की जांच कराने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई केवल कागजी स्तर पर न हो, बल्कि अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी करें। अवैध निर्माण मिलने पर संबंधित भवन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। खासतौर पर उन इमारतों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा, जहां निर्माण में नियमों की अनदेखी हुई है या भवन की स्थिति लोगों के लिए खतरा बन सकती है। सरकार ने दिल्ली के सभी पीजी और छात्रावासों की भी गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इन भवनों में यह देखा जाएगा कि उनका निर्माण स्वीकृत नक्शे और निर्धारित नियमों के अनुरूप हुआ है या नहीं। भवन में कितने लोग रह रहे हैं, कितने हिस्से का इस्तेमाल आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है और क्या निर्माण में किसी तरह का अनधिकृत विस्तार किया गया है, इसकी भी जांच की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से भवनों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी खंगालने को कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित अवैध निर्माण कब कराया गया था और उस समय इसकी निगरानी या कार्रवाई की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा विभाग के पास थी। इससे न केवल मौजूदा अवैध निर्माण की पहचान होगी, बल्कि लंबे समय तक कार्रवाई न होने की स्थिति में जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी। सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार का फोकस खासतौर पर उन इमारतों पर है, जिनमें बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। पीजी, छात्रावास और किराये के कमरों वाली इमारतों में अक्सर क्षमता से अधिक लोगों के रहने, अतिरिक्त कमरों के निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भवन में बदलाव किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में इन भवनों की जांच को सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जर्जर इमारतों की पहचान कर होगी कार्रवाई, हादसे वाली जगह से सटी बिल्डिंग भी गिराने के निर्देश

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हादसे वाली जगह के आसपास मौजूद जर्जर इमारतों पर भी प्रशासन की नजर है। दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हादसे वाली इमारत से सटी एक जर्जर इमारत को भी गिराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि कमजोर और खतरनाक ढांचे को समय रहते हटाना जरूरी है, ताकि दोबारा किसी बड़े हादसे की स्थिति पैदा न हो। इमारत के भीतर छात्रों का सामान भी मौजूद था। दिल्ली अग्निशमन सेवा के कर्मचारियों की मदद से सामान को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा रहा है। प्रशासन ने छात्रों और स्थानीय लोगों से कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि जर्जर भवनों को खाली कराने और गिराने की प्रक्रिया के दौरान लोगों की सुरक्षा से जुड़ी सभी सावधानियां बरती जाएं।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। मकान मालिक महेश के अनुसार, बारिश के दौरान पिछले आठ से दस दिनों में बेसमेंट में कचरा जमा हो गया था, जिसके बाद वहां मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इसके अलावा भूतल पर व्यावसायिक विस्तार से जुड़ा काम भी चल रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मरम्मत और निर्माण के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं। हादसे के बाद मकान मालिक के परिवार के राजस्थान के भिवाड़ी चले जाने की बात भी सामने आई है। परिवार के अनुसार, घटना की जानकारी स्थानीय लोगों से मिलने के बाद वे कानूनी कार्रवाई की आशंका के बीच वहां चले गए थे। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की भी जांच कर रही है और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की जा रही है।

सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में भवनों की सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन इलाकों में जहां पुराने मकानों को पीजी, छात्रावास, होटल या अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बदला गया है, वहां नियमों की जांच अहम मानी जा रही है। सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद अब नगर निगम के अधिकारियों को ऐसे भवनों की पहचान करनी होगी, जहां बिना अनुमति निर्माण हुआ है, स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण किया गया है या भवन की संरचना में ऐसा बदलाव किया गया है जिससे उसकी मजबूती प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है।

इस अभियान में केवल अवैध निर्माण करने वालों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड में मौजूद खामियों की भी जांच की जाएगी। यदि किसी भवन में लंबे समय से अनधिकृत निर्माण मौजूद था और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। दिल्ली सरकार के इस अभियान से राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की जान जाने के बाद सरकार अब ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर दे रही है। 

पीजी, छात्रावास, होटल और जर्जर इमारतों की जांच के जरिए उन भवनों को चिन्हित करने की कोशिश होगी, जो भविष्य में लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं। आने वाले दिनों में नगर निगम की कार्रवाई का दायरा बढ़ने की संभावना है। जिन इलाकों में बड़ी संख्या में पीजी और किराये की इमारतें हैं, वहां विशेष जांच अभियान चलाया जा सकता है। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि लोगों की सुरक्षा से समझौता करने वाले अवैध और खतरनाक निर्माण के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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