हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित प्रसिद्ध मणिमहेश धाम में राधाष्टमी के पावन अवसर पर आज आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। पवित्र डल झील में दोपहर करीब एक बजे से राधाष्टमी का शाही स्नान शुरू होगा। सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार भरमौर के संचुई गांव से पहुंचे त्रिलोचन महादेव के वंशज शिव चेले डल झील को तोड़कर शाही स्नान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को विधिवत रूप से पवित्र झील में स्नान करने का अवसर मिलेगा। शाही स्नान के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच चुके हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। राधाष्टमी पर होने वाले इस शाही स्नान के लिए इस बार 26 घंटे 26 मिनट का शुभ समय निर्धारित किया गया है। आज दोपहर एक बजकर दो मिनट से शुरू होने वाला यह शुभ मुहूर्त शनिवार दोपहर दो बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु डल झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे। शाही स्नान के साथ ही इस वर्ष की मणिमहेश यात्रा का विधिवत समापन भी हो जाएगा।
मणिमहेश यात्रा उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल है। हर वर्ष सावन और भाद्रपद के दौरान भगवान शिव के भक्त कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर मणिमहेश धाम पहुंचते हैं। समुद्र तल से करीब 13 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश झील के आसपास का क्षेत्र इस समय ठंड और बर्फ से ढका हुआ है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। राधाष्टमी के शाही स्नान से पहले गुरुवार को मणिमहेश क्षेत्र में करीब तीन इंच बर्फबारी हुई। बर्फबारी के बाद रात के समय तापमान शून्य से नीचे चला गया। ऐसे मौसम में श्रद्धालुओं के लिए झील में स्नान करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। कई स्थानों पर बर्फ की चादर बिछी हुई है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड का असर काफी बढ़ गया है। इसके बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था के साथ शाही स्नान का इंतजार कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधाष्टमी के दिन मणिमहेश की पवित्र डल झील में स्नान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस दिन पवित्र झील में स्नान करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था के चलते राधाष्टमी के शाही स्नान में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
शाही स्नान की शुरुआत से पहले धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी। परंपरा के अनुसार संचुई से आए शिव चेले डल झील में पहुंचेंगे और धार्मिक विधि के तहत झील को तोड़कर शाही स्नान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद श्रद्धालु स्नान करेंगे। शिव चेले की रस्म के बाद विभिन्न छड़ियां भी डल झील तक पहुंचेंगी और शाही स्नान में शामिल होंगी। इस दौरान पूरा मणिमहेश क्षेत्र धार्मिक जयकारों से गूंज उठेगा। मणिमहेश यात्रा में राधाष्टमी का शाही स्नान सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु कई कठिन चढ़ाइयों को पार करते हुए मणिमहेश झील तक पहुंचते हैं। रास्ते में मौसम तेजी से बदलता है और कई बार बारिश, बर्फबारी और ठंड श्रद्धालुओं की परीक्षा लेती है। इसके बावजूद भगवान शिव के दर्शन और पवित्र झील में स्नान की इच्छा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
बर्फबारी के बीच होगा शाही स्नान, मौसम साफ होने से श्रद्धालुओं को राहत
मणिमहेश क्षेत्र में हुई ताजा बर्फबारी ने शाही स्नान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। गुरुवार को करीब तीन इंच बर्फ गिरने के बाद पूरे इलाके में ठंड बढ़ गई। रात के समय तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया, जिससे सुबह के समय झील और आसपास के क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड महसूस की गई। ऐसे में श्रद्धालुओं को बर्फीले वातावरण में पवित्र डल झील में स्नान करना पड़ेगा। हालांकि श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर यह है कि आज मौसम साफ हो गया है। मौसम खुलने से दिन के समय तापमान में कुछ बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे शाही स्नान में शामिल होने वाले लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। साफ मौसम यात्रा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि खराब मौसम की स्थिति में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवाजाही कठिन हो जाती है।
राधाष्टमी के शाही स्नान को लेकर प्रशासन और स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां पूरी की गई हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए यात्रा मार्ग और स्नान स्थल पर व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। धार्मिक परंपरा में मणिमहेश डल झील का विशेष स्थान है। मान्यता है कि रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और राधाष्टमी के अवसर पर यहां स्नान का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इनमें राधाष्टमी का शाही स्नान यात्रा का सबसे प्रमुख स्नान माना जाता है। इसी के साथ मणिमहेश यात्रा का समापन भी हो जाता है।
शाही स्नान के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु भगवान शिव का जयघोष करते हुए पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे। बर्फीली चोटियों और ठंडे मौसम के बीच होने वाला यह स्नान श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक कठिन आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव भी होगा। मणिमहेश की ऊंची चोटियों पर जमी बर्फ, डल झील का ठंडा पानी और चारों ओर गूंजते धार्मिक जयकारे राधाष्टमी के शाही स्नान को खास बनाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल स्नान नहीं बल्कि भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और समर्पण व्यक्त करने का अवसर है।
शाही स्नान का शुभ मुहूर्त शनिवार दोपहर दो बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु पवित्र डल झील में स्नान कर सकेंगे। इसके बाद इस वर्ष की मणिमहेश यात्रा का औपचारिक रूप से समापन माना जाएगा। यात्रा के समापन के साथ श्रद्धालुओं की वापसी शुरू होगी, लेकिन मणिमहेश धाम में राधाष्टमी के दिन बना आस्था का यह दृश्य लंबे समय तक लोगों के स्मरण में रहेगा।

