भारत और नेपाल के बीच कार से आने-जाने वाले लोगों के लिए आने वाले दिनों में सीमा पार यात्रा आसान हो सकती है। दोनों देश वाहनों की आवाजाही से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके तहत भारत और नेपाल के बीच डिजिटल वाहन परमिट व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है, जिससे सीमा पार निजी वाहनों के लिए होने वाली कागजी कार्रवाई और अलग-अलग प्रक्रियाओं को कम किया जा सकेगा। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पड़ोसी देश सीमा पार वाहन परमिट प्रणाली विकसित करने पर काम कर रहे हैं। नेपाल ने इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच निजी वाहनों की आवाजाही से जुड़े परमिट, शुल्क और अन्य औपचारिकताओं को ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है। फिलहाल भारत से नेपाल या नेपाल से भारत कार लेकर जाने वाले लोगों को सीमा पर कई तरह की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। वाहन के प्रकार, यात्रा की अवधि और यात्रा के क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले वाहन मालिकों के लिए सीमा पार करना कई बार समय लेने वाली प्रक्रिया बन जाता है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत नेपाल में पंजीकृत वाहनों को भारत में प्रवेश करने के लिए निर्धारित नियमों और शुल्क का पालन करना पड़ता है। तीन महीने तक भारत में रहने वाली नेपाली गाड़ियों के लिए वाहन के प्रकार और रहने की अवधि के हिसाब से शुल्क निर्धारित है। यह शुल्क 3,100 से 8,720 नेपाली रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा वाहन के लिए वैध परमिट जरूरी है। नेपाली वाहन मालिकों को परमिट से जुड़ी औपचारिकताओं के लिए निर्धारित भारतीय कार्यालयों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इसमें शुल्क भुगतान के साथ बैंक गारंटी जैसी औपचारिकताएं भी शामिल हो सकती हैं। वहीं, कम अवधि की यात्राओं या सीमा से लगे इलाकों तक जाने वाले वाहनों के लिए कुछ प्रमुख सीमा चौकियों पर एक दिन के स्थानीय पास की व्यवस्था भी लागू हो सकती है।
भारत में पंजीकृत निजी वाहनों के लिए नेपाल में प्रवेश के नियम भी अलग हैं। भारतीय गाड़ियां एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 30 दिनों तक नेपाल में रह सकती हैं। वाहन मालिकों को नेपाली सीमा चौकी पर अपनी गाड़ी का पंजीकरण कराना होता है और निर्धारित अवधि के लिए एक दिन का पास या चालान लेना पड़ता है। अगर कोई भारतीय वाहन सीमा से लगे नजदीकी शहर से आगे जाना चाहता है या नेपाल में रात रुकना चाहता है, तो उसे अपनी यात्रा की अवधि के अनुसार प्रवेश दर्ज कराना होता है। वाहन के प्रकार के आधार पर प्रतिदिन 100 से 500 रुपये तक शुल्क लिया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग नियमों और दस्तावेजों के कारण यात्रियों को कई बार अतिरिक्त समय लगाना पड़ता है।
प्रस्तावित डिजिटल परमिट व्यवस्था इसी प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच बातचीत में वाहन परमिट को डिजिटल बनाने के साथ-साथ मौजूदा परिवहन नियमों में बदलाव पर भी विचार किया जा रहा है। इसका मकसद सीमा पार वाहनों के आवागमन को ज्यादा सुगम बनाना है, ताकि यात्रियों को हर बार लंबी कागजी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। भारत और नेपाल के बीच लोगों का लगातार आवागमन होता है। दोनों देशों के बीच पारिवारिक, धार्मिक, पर्यटन और कारोबारी संबंधों के कारण सड़क मार्ग से बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में निजी वाहनों के लिए आसान और स्पष्ट व्यवस्था का सीधा असर सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ-साथ दूसरे शहरों से नेपाल जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ सकता है।
अलग-अलग शुल्क और कागजी प्रक्रिया से मिल सकती है राहत
भारत की ओर से नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय निजी वाहनों पर लगाए जाने वाले अलग-अलग शुल्क को लेकर आपत्ति जताई गई है। भारत ने इस व्यवस्था को सरल बनाने के लिए एक खिड़की और एक शुल्क वाली व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। यदि इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है और इसे लागू किया जाता है, तो वाहन मालिकों को अलग-अलग शुल्क जमा करने और कई स्तरों की औपचारिकताएं पूरी करने से राहत मिल सकती है। दोनों देशों ने निजी यात्री वाहनों और नियमित सार्वजनिक परिवहन से अलग चलने वाले यात्री वाहनों के लिए अलग प्रोटोकॉल तैयार करने पर भी सहमति जताई है। इससे अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए नियम स्पष्ट किए जा सकेंगे और सीमा चौकियों पर उनकी जांच और प्रवेश प्रक्रिया को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
सीमा चौकियों पर लगने वाली लंबी कतारें भी दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। नेपाल ने एकीकृत सीमा चौकियों पर वाहनों की लंबी कतारों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है। यात्री बसों को प्राथमिकता देने और उनके लिए अलग लेन बनाए जाने की मांग भी सामने आई है।
इसके साथ ही दोनों देशों ने सीमा पर आव्रजन प्रक्रिया को बेहतर बनाने और यात्रियों को अधिक सुविधाएं देने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने की जरूरत पर भी सहमति जताई है। सीमा पार यात्रा के दौरान आव्रजन, वाहन जांच, परमिट और शुल्क भुगतान जैसी प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल परमिट व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों को परमिट के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। डिजिटल व्यवस्था के जरिए वाहन से जुड़ी जानकारी, यात्रा की अवधि और परमिट संबंधी विवरण पहले से दर्ज किए जा सकेंगे।
हालांकि, अंतिम व्यवस्था किस रूप में लागू होगी और किन वाहनों को इसका लाभ मिलेगा, यह दोनों देशों के बीच तय होने वाले नियमों पर निर्भर करेगा। भारत और नेपाल के बीच सीमा पार वाहनों की आवाजाही को आसान बनाने की यह पहल पर्यटन और स्थानीय व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यदि परमिट और शुल्क की प्रक्रिया सरल होती है, तो आवाजाही में समय और परेशानी दोनों कम हो सकते हैं।
फिलहाल दोनों देशों के बीच डिजिटल वाहन परमिट व्यवस्था को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद भारत से नेपाल और नेपाल से भारत निजी कार लेकर जाने वाले यात्रियों के लिए मौजूदा जटिल प्रक्रियाओं को काफी हद तक सरल बनाने की उम्मीद है। आने वाले समय में परमिट, शुल्क और सीमा जांच से जुड़े नए नियमों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।

