रसोई के बजट पर महंगाई का वार, सितंबर में खुदरा दर बढ़ी, प्याज-अदरक-लहसुन के दाम में भारी उछाल

महंगाई के मोर्चे पर सितंबर में आम लोगों की चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रसोई के बजट से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर परिवारों की आर्थिक गणित पर पड़ रहा है। आलू और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों के दाम में राहत मिलने के बावजूद प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में तेज उछाल ने रसोई का खर्च बढ़ा दिया है। इसी बीच देश में खुदरा महंगाई दर भी अगस्त के मुकाबले बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसका सीधा मतलब है कि आम उपभोक्ताओं को कई वस्तुओं के लिए पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। खास बात यह है कि महंगाई का दबाव शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिखाई दिया है, जहां खुदरा महंगाई दर छह प्रतिशत से ऊपर दर्ज की गई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई की सालाना दर 5.54 प्रतिशत रही। यह शुरुआती यानी अस्थायी आंकड़ा है। 

इसके मुकाबले अगस्त में खुदरा महंगाई की अंतिम दर 4.83 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस तरह एक महीने के भीतर महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। अलग-अलग खाद्य वस्तुओं की कीमतों में विपरीत रुझान इस बदलाव को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। कुछ उत्पादों के सस्ता होने से उपभोक्ताओं को राहत मिली, लेकिन दूसरी ओर कई जरूरी वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं। महंगाई दर में वृद्धि का असर केवल बाजार में खरीदारी तक सीमित नहीं रहता। इससे घरों के मासिक बजट, बचत और अन्य जरूरी खर्चों के लिए उपलब्ध धन पर भी दबाव पड़ता है। कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाला बदलाव खास मायने रखता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा भोजन और दैनिक जरूरतों पर खर्च होता है। ऐसे में किसी एक वस्तु के सस्ता होने के बावजूद दूसरी जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से कुल खर्च में राहत मिलना मुश्किल हो सकता है।

सितंबर के आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच महंगाई का अंतर भी सामने आया है। ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88 प्रतिशत रही। आंकड़ों से स्पष्ट है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं को कीमतों के अधिक दबाव का सामना करना पड़ा। हालांकि, महंगाई के अलग-अलग प्रभावों को समझने के लिए खाद्य पदार्थों के साथ अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को भी देखना जरूरी है।

खाद्य महंगाई दर सितंबर में सालाना आधार पर 7.74 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 8.06 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 7.18 प्रतिशत दर्ज की गई। यानी खाने-पीने की वस्तुओं के मामले में भी ग्रामीण उपभोक्ताओं पर अपेक्षाकृत अधिक दबाव रहा। भोजन की जरूरतें ऐसी हैं, जिन पर परिवार आसानी से खर्च कम नहीं कर सकते।

आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट इस दौरान राहत देने वाली रही। सितंबर में आलू के दाम 11.50 प्रतिशत घटे, जबकि टमाटर की कीमत में 8.62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त मोटर कार एंड जीव श्रेणी में 4.51 प्रतिशत, भिंडी में 4.48 प्रतिशत और नारियल में 3.99 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन वस्तुओं के सस्ता होने से संबंधित उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली, लेकिन इसका लाभ सभी परिवारों को समान रूप से मिले, यह जरूरी नहीं है। इसकी वजह यह है कि प्रत्येक परिवार की खरीदारी और खर्च का स्वरूप अलग होता है।

दूसरी ओर, प्याज की कीमत में 108.09 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

यह सितंबर के आंकड़ों में सबसे उल्लेखनीय उछालों में शामिल रही। इसके अलावा चांदी के आभूषणों के दाम 87.80 प्रतिशत बढ़े। अदरक की कीमत में 62.85 प्रतिशत और लहसुन में 54.62 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। नींबू के दाम भी 36.41 प्रतिशत बढ़े। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बाजार में कीमतों का रुझान सभी वस्तुओं के लिए एक जैसा नहीं रहा। प्याज, अदरक और लहसुन भारतीय रसोई में नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं हैं। इनके दाम बढ़ने का असर घरों के भोजन संबंधी खर्च पर पड़ सकता है। खासकर प्याज की कीमत में दर्ज असाधारण उछाल उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है। वहीं, नींबू और अन्य खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से भी खरीदारी का बजट प्रभावित हो सकता है।

तमिलनाडु 6.81 प्रतिशत खुदरा महंगाई दर के साथ सबसे ऊपर

राज्यों के स्तर पर देखें तो सितंबर में तमिलनाडु 6.81 प्रतिशत खुदरा महंगाई दर के साथ सबसे ऊपर रहा। ओडिशा में यह दर 6.70 प्रतिशत दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में 6.68 प्रतिशत, तेलंगाना में 6.64 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 6.29 प्रतिशत खुदरा महंगाई रही। इस तरह इन पांच राज्यों में महंगाई दर अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर दर्ज की गई। अलग-अलग राज्यों में महंगाई का स्तर स्थानीय बाजारों में कीमतों, वस्तुओं की उपलब्धता और उपभोग के स्वरूप सहित कई कारकों से प्रभावित हो सकता है।

सरकार के अनुसार, सितंबर के महंगाई आंकड़े तैयार करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापक स्तर पर कीमतों से संबंधित जानकारी जुटाई गई। 

इसके लिए 1,407 शहरी बाजारों को शामिल किया गया, जिनमें ऑनलाइन बाजार भी शामिल हैं। इसके अलावा 1,465 गांवों से भी आंकड़े एकत्र किए गए। सरकार ने बताया कि ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में आंकड़े जुटाने की प्रतिक्रिया दर 100 प्रतिशत रही। इससे संबंधित अवधि में बाजारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर महंगाई की स्थिति का आकलन किया गया। अब सभी की निगाहें अक्टूबर के खुदरा महंगाई आंकड़ों पर रहेंगी। सरकार ने इन्हें 12 नवंबर 2026 को जारी करने की तारीख निर्धारित की है। यदि उस दिन अवकाश होता है, तो आंकड़े अगले कामकाजी दिन जारी किए जाएंगे। वहीं, सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े मंगलवार को जारी किए जाने हैं। थोक महंगाई के आंकड़ों से बाजार में वस्तुओं की कीमतों के एक अन्य स्तर पर होने वाले बदलाव का संकेत मिलेगा।

कुल मिलाकर सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि खुदरा महंगाई में अगस्त के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है और खाद्य वस्तुओं की महंगाई अब भी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है। आलू और टमाटर के सस्ते होने से मिली राहत के बीच प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में भारी उछाल ने रसोई के बजट पर दबाव बढ़ाया है। आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव और खुदरा महंगाई की दिशा पर नजर रहेगी।

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