पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर दिखाई देने लगा है। गुरुवार (9 जुलाई) को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा। अमेरिका की ओर से लगातार दूसरे दिन ईरान के ठिकानों पर किए गए सैन्य हमलों के बाद दोनों देशों के बीच पहले से कमजोर पड़ चुका युद्धविराम लगभग समाप्त होता दिखाई दे रहा है। हालात इस कदर तनावपूर्ण हो गए हैं कि समुद्री व्यापार भी इसकी चपेट में आ गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले ताजा आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश जहाज केवल उसी समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिसे ईरान ने सुरक्षित माना है। दूसरी ओर, अमेरिका के नियंत्रण वाले ओमान समुद्री गलियारे में जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य हो गई है।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर जहाज संचालक और शिपिंग कंपनियां बेहद सतर्क हो गई हैं। समुद्री मार्गों का चयन अब केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि सुरक्षा के आधार पर किया जा रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां जोखिम को देखते हुए अपने जहाजों के मार्ग बदल रही हैं या फिर यात्रा को टाल रही हैं। इसी बीच फारस की खाड़ी से केवल एक सुपरटैंकर बाहर निकलता हुआ दिखाई दिया। अमेरिकी प्रतिबंधों और बढ़ते तनाव के बीच इतने बड़े जहाज का इस मार्ग से गुजरना बेहद सीमित गतिविधि को दर्शाता है। इसके अलावा एक ईरानी ध्वज वाला कंटेनर जहाज भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद था। हालांकि समुद्री विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक तस्वीर इससे अलग भी हो सकती है, क्योंकि कुछ जहाज सुरक्षा कारणों से अपने ट्रांसपोंडर यानी लोकेशन सिग्नल बंद कर देते हैं। ऐसे में उनकी गतिविधियां सामान्य ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज नहीं हो पातीं।
यह रणनीति युद्ध या सैन्य तनाव वाले इलाकों में आम होती जा रही है।
जहाजों के ट्रांसपोंडर बंद होने से उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे हमले की आशंका भी कुछ हद तक कम हो जाती है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों द्वारा कई जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के जवाब में अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए सैन्य हमले तेज कर दिए हैं।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान के साथ युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनके इस बयान ने पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ा दिया है तथा किसी बड़े संघर्ष की आशंका भी गहरा गई है। जहाजों की आवाजाही के आंकड़े भी इस बदलते माहौल की पुष्टि कर रहे हैं। बुधवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दोनों दिशाओं में केवल 14 कमोडिटी जहाजों ने आवाजाही की। इनमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस तथा अन्य ऊर्जा संसाधन ले जाने वाले जहाज शामिल थे। जून के मध्य में हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद यह सबसे कम संख्या मानी जा रही है। सामान्य परिस्थितियों की तुलना में यह गिरावट बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।
हॉर्मुज में घटती आवाजाही से वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ी, एलएनजी परिवहन भी प्रभावित
शिपिंग और कमोडिटी ट्रैकिंग फर्म कप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह के दौरान प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे। इतना ही नहीं, 24 जून को यह संख्या बढ़कर 59 जहाजों तक पहुंच गई थी, जो हाल के महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और जहाजों की संख्या तेजी से घट गई है। युद्ध के दौरान भी अधिकांश दिनों में इस मार्ग से 20 से कम जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई थी और अब फिर वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। इस बीच सबसे बड़ी चिंता तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति को लेकर सामने आई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह ठप बनी हुई है। हालांकि हाल ही में दो खाली एलएनजी टैंकर ओमान की खाड़ी में प्रवेश करते देखे गए हैं और वे जलडमरूमध्य के पूर्वी प्रवेश द्वार की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद ऊर्जा बाजार फिलहाल सामान्य संचालन की स्थिति में नहीं लौट पाए हैं। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने एक और गंभीर पहलू की ओर संकेत किया है। गुरुवार तड़के ओमान की खाड़ी में लीमा के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में कुछ जहाज असामान्य रूप से लगभग 30 नॉट की तेज गति से चलते हुए दिखाई दिए। सामान्य परिस्थितियों में इतनी अधिक गति दुर्लभ मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और रक्षा प्रणालियों के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन और मिसाइल हमलों से महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए कई देशों ने उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं।
ये प्रणालियां दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को भ्रमित करने के साथ-साथ जहाजों के ट्रांसपोंडर सिग्नलों को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसके कारण समुद्री निगरानी प्रणालियों में जहाजों की वास्तविक स्थिति, दिशा और गति से जुड़ा डेटा गलत दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में समुद्री गतिविधियों की सटीक तस्वीर सामने लाना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार और अधिक प्रभावित हो सकता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहने पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसके साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

