अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना देख रहे प्रवासियों के लिए आने वाला समय मुश्किल भरा हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए ‘पब्लिक चार्ज’ यानी सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर माने जाने की परिभाषा को पहले की तुलना में काफी व्यापक कर दिया है। नए नियम के तहत सरकार से मिलने वाली कई तरह की स्वास्थ्य, खाद्य, आवास और वित्तीय सहायता का लाभ लेने वाले प्रवासियों के स्थायी निवास आवेदन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएससीआईएस ने इस बदलाव को अंतिम रूप दे दिया है और नया नियम 18 सितंबर से प्रभावी होगा। इसका सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ सकता है जो अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने के लिए आवेदन करने की तैयारी कर रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय भी अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में नए नियम को भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारियों को यह तय करने में अधिक अधिकार मिलेंगे कि कोई आवेदक भविष्य में अमेरिकी सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। यदि अधिकारी को लगता है कि आवेदक के भविष्य में सरकारी सहायता लेने की संभावना अधिक है, तो उसका स्थायी निवास आवेदन मुश्किल में पड़ सकता है।
अब तक लागू नियमों के मुकाबले नए प्रावधानों का दायरा काफी बड़ा है। पहले ‘पब्लिक चार्ज’ के आधार पर मुख्य रूप से दो तरह के सरकारी लाभों को ध्यान में रखा जाता था। इनमें गुजारा चलाने के लिए मिलने वाली नकद सरकारी सहायता और सरकारी खर्च पर लंबे समय तक किसी सरकारी संस्थान या देखभाल केंद्र में रहने जैसी स्थिति शामिल थी। अब कई अन्य सरकारी सुविधाओं को भी अधिकारियों के मूल्यांकन में शामिल किया जा सकेगा। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पब्लिक चार्ज के आधार पर किसी व्यक्ति की अयोग्यता तय करते समय यूएससीआईएस अधिकारी उसकी पूरी परिस्थितियों का आकलन करेंगे। इसमें आवेदक की आर्थिक स्थिति, सरकारी सहायता पर संभावित निर्भरता और उसके परिवार से जुड़ी परिस्थितियों को भी देखा जा सकता है।
नए नियम के तहत मुफ्त या रियायती खाद्य सहायता, आवास से जुड़ी मदद, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल भी अधिकारियों के आकलन का हिस्सा बन सकता है। इसके अलावा कॉलेज की पढ़ाई के लिए मिलने वाली कुछ वित्तीय सहायता जैसी सुविधाओं को भी अधिकारी आवेदक की आर्थिक स्थिति समझने के लिए देख सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि आवेदक ने अतीत में सरकारी सहायता ली है या नहीं। अधिकारी यह भी आकलन कर सकते हैं कि भविष्य में उसके सरकार पर निर्भर होने की कितनी संभावना है। यानी आवेदन की जांच केवल मौजूदा आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आवेदक की भविष्य की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
इस बदलाव से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले लोगों के सामने अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा हो सकती है। खास तौर पर वे प्रवासी परिवार चिंता में पड़ सकते हैं जिनकी आय सीमित है या जिन्हें अमेरिका में रहने के दौरान किसी समय सरकारी सहायता की जरूरत पड़ती है। नए नियम में आव्रजन अधिकारियों को आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक स्थिति और शैक्षणिक योग्यता जैसे कई पहलुओं पर विचार करने की अनुमति दी गई है। आवेदक के परिवार और आश्रितों की परिस्थितियां भी मूल्यांकन का हिस्सा बन सकती हैं। इसका अर्थ यह है कि स्थायी निवास का फैसला केवल आवेदन करने वाले व्यक्ति की जानकारी के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी समग्र पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जा सकता है। यदि अधिकारी को लगता है कि कोई आवेदक भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकता है, तो कुछ परिस्थितियों में उससे ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ जमा करने के लिए भी कहा जा सकता है। यह व्यवस्था ऐसे आवेदकों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ पैदा कर सकती है।
नए नियम में अधिकारियों को मिलेगी ज्यादा ताकत
नए प्रावधानों की पृष्ठभूमि भी अमेरिकी आव्रजन नीति में हो रहे बड़े बदलावों से जुड़ी है। गृह सुरक्षा विभाग ने बाइडन प्रशासन के वर्ष 2022 में लागू किए गए ‘पब्लिक चार्ज’ नियमों को समाप्त करने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन की ओर से नए नियम की घोषणा 16 जुलाई को की गई थी और इसे 20 जुलाई को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया। यह नियम 18 सितंबर को या उसके बाद डाक के माध्यम से भेजे जाने वाले अथवा ऑनलाइन जमा किए जाने वाले फॉर्म आई-485 पर लागू होगा। फॉर्म आई-485 अमेरिका में स्थायी निवास या स्थिति में बदलाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इस तारीख के बाद आवेदन करने वाले प्रवासियों को नए प्रावधानों के तहत जांच का सामना करना पड़ सकता है।
आव्रजन मामलों के जानकारों का मानना है कि नए नियम का सबसे बड़ा प्रभाव अधिकारियों के विवेकाधिकार के बढ़ने के रूप में सामने आएगा। आव्रजन वकील साइरस मेहता और दमीरा जानातोवा के विश्लेषण के अनुसार, नए नियम अधिकारियों को ग्रीन कार्ड आवेदनों को खारिज करने के लिए पहले की तुलना में अधिक अधिकार प्रदान करते हैं।
भारतीय प्रवासियों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर, विद्यार्थी, परिवार और अन्य प्रवासी स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं। ग्रीन कार्ड के लिए लंबा इंतजार करने वाले लोगों के लिए आवेदन की प्रक्रिया पहले से ही जटिल रही है। अब सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल और भविष्य की आर्थिक स्थिति का व्यापक मूल्यांकन होने से आवेदकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि किसी भी सरकारी सुविधा का इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति स्वतः ग्रीन कार्ड पाने से अयोग्य हो जाएगा। अंतिम फैसला आवेदक की पूरी परिस्थितियों और यूएससीआईएस अधिकारी के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा। फिर भी नए नियम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अब आवेदक की आर्थिक आत्मनिर्भरता को पहले से अधिक गंभीरता से जांचने की तैयारी में है।
इस बदलाव का व्यापक असर अमेरिका में रहने वाले उन प्रवासी परिवारों पर पड़ सकता है जो सीमित आय में अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के खर्च संभालते हैं। उन्हें अब यह समझना होगा कि कौन-सी सरकारी सहायता उनके स्थायी निवास आवेदन के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकती है और आवेदन से पहले अपनी आर्थिक स्थिति से जुड़े दस्तावेजों को किस तरह तैयार रखना है। ट्रंप प्रशासन की नई नीति अमेरिका की आव्रजन व्यवस्था को अधिक सख्त बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है। ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रमुख आधार बनाने से उन प्रवासियों के लिए चुनौती बढ़ सकती है जिनकी परिस्थितियां सरकारी सहायता पर निर्भरता की आशंका पैदा करती हैं।
अब 18 सितंबर से लागू होने वाले इस नियम पर प्रवासी समुदाय की नजर रहेगी। खासकर भारतीय आवेदकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रावधानों के तहत उनके आवेदन का मूल्यांकन किन आधारों पर किया जाता है। एक ओर सरकार इसे आव्रजन व्यवस्था में आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम मान रही है, वहीं दूसरी ओर आव्रजन विशेषज्ञों की चिंता है कि अधिकारियों को व्यापक अधिकार मिलने से ग्रीन कार्ड आवेदनों में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।

