एआई और डीप-टेक में दुनिया का अगला सुपरपावर बन सकता है भारत: डॉ. माशेलकर

फिक्की लेजेंड्स सीरीज़ के तहत आयोजित विशेष व्याख्यान में पद्म विभूषण, रॉयल सोसाइटी के फेलो और सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. ए. माशेलकर ने कहा कि “डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समावेशी नवाचार विकसित भारत 2047 की सबसे मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।” उन्होंने “Winning Through Innovation: Lessons for Industry and Society” विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत को वैश्विक तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय नवाचारों का निर्माता बनना होगा।

डॉ. माशेलकर ने अपनी चर्चित अवधारणा “More from Less for More” को भारत के विकास का मंत्र बताते हुए कहा, “नवाचार का उद्देश्य कम संसाधनों में अधिक लोगों तक विश्वस्तरीय और किफायती समाधान पहुंचाना होना चाहिए। उत्कृष्टता, किफायत और समावेशिता ही भारत के नवाचार मॉडल की पहचान बनें।”

उन्होंने स्मार्टफोन आधारित टीबी जांच, एआई आधारित रोग पहचान, डिजिटल मातृ स्वास्थ्य और बिना रक्त निकाले एनीमिया जांच जैसी तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने सीमित संसाधनों में भी वैश्विक स्तर के समाधान विकसित करने की क्षमता साबित की है। उन्होंने सरकार से डीप-साइंस, विघटनकारी तकनीकों और उच्च जोखिम वाले अनुसंधान में निवेश बढ़ाने का भी आह्वान किया।

फिक्की के पूर्व अध्यक्ष आर. वी. कनोरिया ने कहा, “नवाचार ही भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी नेतृत्व तय करेगा।” वहीं ideaForge के सह-संस्थापक एवं सीईओ अंकित मेहता ने कहा, “‘More from Less for More’ करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले जन-केंद्रित नवाचार का मार्ग दिखाता है।” कार्यक्रम में उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान और नीति जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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