एमएलसी चुनाव के लिए भाजपा ने उतारे 10 प्रत्याशी, यूपी में छह और बिहार में चार नाम किए घोषित

उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद के आगामी चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश की छह और बिहार की चार विधान परिषद सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की है। दोनों राज्यों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम सामने आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर, वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा की ओर से जारी सूची में वाराणसी और मेरठ की स्नातक सीटों के साथ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को भी खास जगह दी गई है। वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह को मैदान में उतारा गया है, जबकि मेरठ स्नातक सीट से मौजूदा विधान परिषद सदस्य दिनेश गोयल को दोबारा मौका दिया गया है। मेरठ सीट को लेकर भाजपा ने अपने मौजूदा चेहरे पर भरोसा जताया है।

इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वाराणसी से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी को उम्मीदवार घोषित किया गया है। इस तरह भाजपा ने स्नातक और शिक्षक दोनों वर्गों की सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की तस्वीर साफ कर दी है। विधान परिषद के ये चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग तरीके से होता है। इन सीटों के मतदाता संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत स्नातक और शिक्षक होते हैं। ऐसे में उम्मीदवारों का व्यक्तिगत संपर्क, संगठनात्मक सक्रियता और संबंधित वर्गों के बीच उनकी पकड़ चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भाजपा की सूची सामने आने के बाद अब इन सीटों पर दूसरे दलों की ओर से प्रत्याशियों के नामों का इंतजार भी बढ़ गया है। उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी तैयारियों को गति मिलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के छह उम्मीदवारों की घोषणा ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी ने इस चुनाव के लिए अपने स्तर पर तैयारी तेज कर दी है। बिहार में भी भाजपा ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपने हिस्से की चार सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। पार्टी ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह को प्रत्याशी बनाया है।

पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव को फिर मौका दिया गया है। वहीं कोसी स्नातक सीट से डॉ. एनके यादव को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है। दरभंगा स्नातक सीट पर सर्वेश कुमार को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह चुनाव मैदान में होंगे। बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव होना है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा के हिस्से में चार सीटें आई हैं, जबकि चार सीटों पर जनता दल यूनाइटेड चुनाव लड़ रही है। बिहार में इन चुनावों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होनी है। भाजपा के चार उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब बिहार में भी चुनावी मुकाबले की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है।

राज्यसभा चुनाव से भी बढ़ी यूपी की सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव के साथ राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भी चुनावी प्रक्रिया चल रही है। निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान की तारीख तय की है। उत्तर प्रदेश की जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें वर्तमान में भाजपा के पास आठ सीटें हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास एक-एक सीट है। राज्यसभा की एक सीट के लिए इस बार करीब 37.9 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी। विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दल कई सीटों पर मजबूत स्थिति में हैं, जबकि समाजवादी पार्टी भी तीन उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। सपा के तीन उम्मीदवार उतारने की रणनीति से चुनाव में अतिरिक्त मतों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

राज्यसभा चुनाव में सपा की ओर से तीन प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की तैयारी की खबरें सामने आई हैं। पार्टी के सामने अपने उम्मीदवारों के लिए जरूरी प्रथम वरीयता मतों की व्यवस्था करने की चुनौती होगी। वहीं भाजपा के मौजूदा संख्याबल और वर्तमान में उसके पास मौजूद आठ सीटों को देखते हुए चुनावी गणित पर लगातार चर्चा हो रही है। विभिन्न राजनीतिक विश्लेषणों में भाजपा के सात से आठ सीटें हासिल करने की संभावनाओं का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन अंतिम परिणाम मतदान और विधायकों के मतों की गणना के बाद ही स्पष्ट होगा।

इस तरह उत्तर प्रदेश में एक तरफ विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं, तो दूसरी तरफ राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही इन चुनावों के जरिए अपने-अपने संगठनात्मक समीकरण और विधानसभा में मौजूद संख्याबल के आधार पर रणनीति तैयार कर रही हैं। आने वाले दिनों में नामांकन, प्रत्याशियों के प्रचार और दलों के बीच मतों के प्रबंधन के साथ चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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