ओडिशा तट के पास समुद्र में गैस का बड़ा भंडार मिला, ‘समुद्र मंथन’ के तहत ओएनजीसी की अहम खोज 

भारत के समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की मुहिम के बीच ओडिशा तट के पास ओएनजीसी को प्राकृतिक गैस की अहम खोज मिली है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) ने महानदी अपतटीय बेसिन में गहरे पानी के एक कुएं से गैस मिलने की पुष्टि की है। यह खोज केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय खोज योजना के तहत ओएनजीसी की पहली बड़ी ड्रिलिंग सफलताओं में शामिल है। ओएनजीसी के अनुसार, महानदी अपतटीय बेसिन में खोदा गया कुआं ओडिशा के कोणार्क तट से करीब 43 किलोमीटर दूर स्थित है। कुएं का नाम एमएन-डीडब्ल्यू18-1-एच-डी है। इसमें करीब 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई पर गैस मिलने के संकेत मिले हैं। कुएं की लक्षित ड्रिलिंग गहराई 1,623 मीटर तक रही। कंपनी ने बताया है कि पिछले तीन दिनों से कुएं से उत्साहजनक प्रवाह और जलाशय दबाव के साथ गैस निकल रही है।

इस खोज को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह महानदी बेसिन में ‘समुद्र मंथन’ अभियान के तहत ओएनजीसी द्वारा खोदा गया पहला कुआं है। समुद्र तट से अपेक्षाकृत कम दूरी पर स्थित होने के कारण भविष्य में यहां से गैस के व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। हालांकि, अभी इसे व्यावसायिक उत्पादन के लिए अंतिम रूप से तैयार खोज नहीं माना जा सकता। इसके लिए आगे मूल्यांकन, परीक्षण और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का आकलन जरूरी होगा। कुएं की खुदाई 25 जुलाई 2026 को शुरू हुई थी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसकी ड्रिलिंग की शुरुआत कराई थी। इसके लिए ‘प्लेटिनम एक्सप्लोरर’ ड्रिलशिप का इस्तेमाल किया गया। ओएनजीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अरुण कुमार सिंह ने 27 अगस्त को इस ड्रिलशिप का दौरा किया था। उनके साथ कंपनी के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने ड्रिलिंग अभियान में जुटी टीम के सदस्यों से बातचीत की और समुद्री क्षेत्र में चल रही खोज गतिविधियों की जानकारी ली। ओएनजीसी ने बाद में कुएं से मिल रहे गैस प्रवाह और जलाशय दबाव को उत्साहजनक बताया।

महानदी बेसिन में गैस की यह खोज ऐसे समय हुई है, जब भारत समुद्री क्षेत्रों में छिपे तेल और गैस संसाधनों की तलाश तेज करने पर जोर दे रहा है। देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा अभी आयात से पूरा होता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन बढ़ाना आयात पर निर्भरता घटाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खोज से ओएनजीसी के गहरे समुद्री क्षेत्र में अन्वेषण अभियान को भी गति मिलने की उम्मीद है। कंपनी लंबे समय से देश के विभिन्न समुद्री बेसिन में तेल और गैस की संभावनाएं तलाश रही है। महानदी बेसिन को पूर्वी तट के महत्वपूर्ण अपतटीय क्षेत्रों में माना जाता है। यहां नई खोजें होने से आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अधिक खोज गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

गैस की खोज के बाद अगला चरण इसके भंडार की क्षमता, गुणवत्ता, प्रवाह दर और उत्पादन की आर्थिक व्यवहार्यता का विस्तृत आकलन करना होगा। इसके बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि यहां व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू करना कितना व्यवहारिक होगा। तट के करीब होने के कारण भविष्य में उत्पादन और परिवहन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण हो सकता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र में मिली अन्य खोजों के साथ इस संसाधन को साझा अपतटीय सुविधाओं के जरिए विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।

क्या है ‘समुद्र मंथन’ योजना और क्यों है अहम?

केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को ‘समुद्र मंथन’ यानी राष्ट्रीय अपतटीय खोज योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक कुल 84,084 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य देश के समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को तेज करना, गहरे और अति-गहरे पानी वाले क्षेत्रों में ड्रिलिंग बढ़ाना तथा खोजे गए संसाधनों को उत्पादन में लाने के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करना है।

योजना के तहत आधुनिक भूकंपीय सर्वेक्षण, आंकड़ों के संग्रह और विश्लेषण, गहरे पानी में खोजी कुओं की ड्रिलिंग, साझा अपतटीय उत्पादन एवं निकासी ढांचे तथा तेल-गैस क्षेत्र से जुड़े विनिर्माण और सेवा केंद्रों के विकास पर जोर दिया गया है। सरकार की योजना के तहत 60 गहरे और अति-गहरे पानी वाले खोजी कुओं की ड्रिलिंग का प्रावधान है। गहरे समुद्र में खोजी ड्रिलिंग के लिए पात्र लागत का 50 प्रतिशत तक या प्रति कुएं 675 करोड़ रुपये, जो भी कम हो, सरकारी सहायता के रूप में दिए जाने का प्रावधान है।

सरकार के अनुसार, ‘समुद्र मंथन’ से 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल समतुल्य हाइड्रोकार्बन भंडार में बढ़ोतरी का लक्ष्य है। योजना के सफल क्रियान्वयन की स्थिति में घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, देश का घरेलू तेल और गैस उत्पादन मौजूदा करीब 62 मिलियन मीट्रिक टन तेल समतुल्य से बढ़कर लगभग 80 मिलियन मीट्रिक टन सालाना हो सकता है। ‘समुद्र मंथन’ के तहत अपतटीय क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और बेहतर आंकड़ों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। 

सरकार का मानना है कि देश के समुद्री बेसिन में बड़ी मात्रा में हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हैं, लेकिन गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में खोज तकनीकी रूप से जटिल और महंगी है। ऐसे में सरकारी सहायता, साझा बुनियादी ढांचे और बेहतर तकनीक के जरिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को खोज गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ओडिशा तट के पास ओएनजीसी की यह गैस खोज इसी व्यापक अभियान के बीच सामने आई है। अब इसकी वास्तविक क्षमता और व्यावसायिक उपयोगिता का पता आगे होने वाले मूल्यांकन से चलेगा। यदि खोज व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य पाई जाती है, तो महानदी अपतटीय बेसिन में भविष्य की खोज और उत्पादन गतिविधियों को इससे नई दिशा मिल सकती है।

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