हरिद्वार कांवड़ मेले ने अब अपने दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। पंचक समाप्त होने के साथ ही शिवभक्तों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। आगामी दिनों में लाखों कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी अपनी तैयारियों को और सख्त कर दिया है। इसी क्रम में ट्रैफिक व्यवस्था के दूसरे चरण को लगभग पूरी तरह लागू कर दिया गया है। अब राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का मानना है कि जैसे-जैसे कांवड़ियों की भीड़ बढ़ेगी, वैसे-वैसे यातायात दबाव भी बढ़ेगा। इसलिए पहले से तैयार किए गए चरणबद्ध ट्रैफिक प्लान को लागू करते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में हर वर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी लाखों शिवभक्त गंगाजल लेने और अपनी यात्रा पूरी करने के लिए हरिद्वार आ रहे हैं। ऐसे में शहर और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया था, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
यातायात योजना के पहले चरण के तहत चार अगस्त तक भारी वाहनों को सीमित समय के लिए हाईवे पर चलने की अनुमति दी गई थी। इस अवधि में भारी वाहन केवल रात 12 बजे से सुबह चार बजे तक ही संचालित किए जा रहे थे। लेकिन अब पांच अगस्त से लेकर 11 अगस्त तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि इस अवधि में कांवड़ यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और किसी भी प्रकार का यातायात अवरोध सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सात अगस्त के बाद भीड़ का दबाव और अधिक बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए पूर्ण डायवर्जन योजना लागू करने की तैयारी भी कर ली गई है। यदि जरूरत पड़ी तो हरिद्वार आने वाले सामान्य वाहनों को मंगलौर से ही लक्सर मार्ग की ओर मोड़ दिया जाएगा। वहां से वाहन कनखल होते हुए बैरागी कैंप और दक्ष मंदिर के पीछे स्थित मैदानों में निर्धारित पार्किंग स्थलों तक पहुंचाए जाएंगे।
फिलहाल प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार बीच-बीच में वाहनों को मंगलौर से लक्सर की ओर डायवर्ट कर रहा है, लेकिन भीड़ बढ़ने पर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू की जा सकती है। पुलिस का उद्देश्य कांवड़ यात्रियों को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा उपलब्ध कराना है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जाम की स्थिति पैदा न हो।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले ट्रैफिक प्लान की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि निर्धारित मार्गों, पार्किंग स्थलों और डायवर्जन व्यवस्था का पालन करने से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि जाम और असुविधा से भी बचा जा सकेगा।
कांवड़ वाहनों और सामान्य यातायात के लिए अलग व्यवस्था
कांवड़ मेले के दौरान सामान्य यातायात और कांवड़ वाहनों को अलग-अलग मार्गों से संचालित किया जा रहा है। दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मंगलौर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, सहारनपुर, देहरादून, ऋषिकेश, नैनीताल और नजीबाबाद से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि अलग मार्गों की व्यवस्था से यातायात का दबाव कम होगा और कांवड़ यात्रियों को सुरक्षित आवागमन का अवसर मिलेगा। मुरादाबाद, बिजनौर और नजीबाबाद की ओर से आने वाले कांवड़ वाहनों को चिड़ियापुर, गैंडीखाता और 4.2 डायवर्जन मार्ग से गौरीशंकर तथा नीलधारा पार्किंग तक पहुंचाया जाएगा। वहीं देहरादून और ऋषिकेश से आने वाले कांवड़ वाहन नेपाली तिराहा, सप्तऋषि तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर होते हुए चमगादड़ टापू और लालजीवाला पार्किंग में भेजे जाएंगे।
इसके अलावा बैरागी कैंप में पार्क किए गए कांवड़ वाहनों की निकासी के लिए भी विशेष मार्ग तय किए गए हैं। इन वाहनों को श्मशान घाट पुल, श्रीयंत्र पुल, बूढ़ी माता तिराहा, देशरक्षक तिराहा और सिंहद्वार होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर भेजा जाएगा। इससे शहर के भीतर अनावश्यक भीड़ और यातायात दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। रोडवेज और निजी बसों के संचालन के लिए भी अलग व्यवस्था लागू की गई है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से आने वाली बसों को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के माध्यम से मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए ऋषिकुल मैदान अथवा निर्धारित पार्किंग स्थलों तक भेजा जाएगा। वहीं देहरादून और ऋषिकेश से आने वाली बसें मोतीचूर पार्किंग तक संचालित होंगी। नजीबाबाद मार्ग की बसों को नीलधारा और गौरीशंकर पार्किंग में भेजने की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली और देहरादून के बीच संचालित सभी बसें एक्सप्रेस-वे का ही उपयोग करेंगी। इससे शहर के भीतर यातायात का दबाव कम रहेगा और कांवड़ मेले के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा उपलब्ध कराई जा सकेगी। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रैफिक व्यवस्था में तत्काल बदलाव भी किए जा सकते हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और केवल निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें।

