पेपर लीक के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन के बीच 27 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। हालांकि वांगचुक के अनशन खत्म होने के बावजूद आंदोलन थमा नहीं है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार 35वें दिन भी जारी है और आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुक्रवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। गुरुवार देर रात करीब 12:30 बजे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां सोनम वांगचुक का इलाज चल रहा था। इससे पहले दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की थी। इसके बाद सरकार की ओर से पहल करते हुए वांगचुक से बातचीत की गई और चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने अपना 27 दिन पुराना अनशन समाप्त कर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी।
प्रधानमंत्री ने लिखा कि वह सोनम वांगचुक से आग्रह करते हैं कि वे डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या अपनाएं और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन वापस हासिल करें। उन्होंने वांगचुक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए ईश्वर से उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना भी की। वांगचुक के अनशन समाप्त होने पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने खुशी जताई, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है और केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
जंतर-मंतर पर शुक्रवार को प्रदर्शन का 35वां दिन है। हजारों प्रदर्शनकारी अब भी वहां डटे हुए हैं। गुरुवार देर रात आंदोलन ने उग्र रूप भी ले लिया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग पर लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। दिल्ली पुलिस ने कई इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। सीजेपी ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। संगठन का दावा है कि विभिन्न राज्यों में छात्र, युवा और सामाजिक संगठन विरोध मार्च और धरना-प्रदर्शन करेंगे। आंदोलनकारी पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, दिल्ली मेट्रो के 17 स्टेशन आज भी बंद
आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार देर रात नौकरशाही में बड़ा फेरबदल करते हुए 17 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति के आदेश जारी किए। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव शिक्षा मंत्रालय में किया गया है। राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। वह विनीत जोशी का स्थान लेंगे। विनीत जोशी को अब पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। वहीं 1995 बैच के आईएएस अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार के इस फैसले को आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से इन नियुक्तियों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
राजधानी दिल्ली में आंदोलन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी बड़ा फैसला लिया है। डीएमआरसी ने बताया कि सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के कारण शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक 17 मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर केवल इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि इन स्टेशनों से बाहर निकलने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
बंद किए गए स्टेशनों में लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम और झंडेवालन शामिल हैं। डीएमआरसी ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले वैकल्पिक मार्ग अपनाने और नवीनतम जानकारी पर नजर रखने की अपील की है।
पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति के अनशन तक सीमित नहीं रह गया है। यह देशभर में छात्रों और युवाओं की नाराजगी का बड़ा प्रतीक बन चुका है। सरकार की ओर से लगातार बातचीत, प्रशासनिक फैसले और सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं, लेकिन आंदोलनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत और उसके नतीजों पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

