पिछले कई दिनों से देश में एक सवाल लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है, क्या भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा या फिर सरकार इसके लिए नया और सख्त नियामक कानून लाने जा रही है? निवेशकों से लेकर वित्तीय विशेषज्ञों तक, हर किसी की निगाह अब 2 जुलाई को होने वाली उस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी है, जिसमें संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति (फाइनेंस कमेटी) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य पर विस्तार से चर्चा करेगी। भारत में करोड़ों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से क्रिप्टो बाजार से जुड़े हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में बिटकॉइन समेत कई डिजिटल मुद्राओं में भारतीय निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये लगाए हैं।
हालांकि सरकार ने क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स और प्रत्येक लेनदेन पर टीडीएस जैसे प्रावधान लागू किए हैं, लेकिन अब तक इसे लेकर कोई स्पष्ट और व्यापक कानून नहीं बनाया गया है। यही वजह है कि निवेशकों के मन में लगातार असमंजस बना हुआ है। दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक लंबे समय से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी चिंता जाहिर करता रहा है। आरबीआई का मानना है कि बिना किसी नियमन के चल रहा यह बाजार देश की वित्तीय व्यवस्था, बैंकिंग प्रणाली और आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। वहीं सरकार का मानना है कि यदि इस क्षेत्र को पूरी तरह प्रतिबंधित करना संभव नहीं है, तो कम से कम इसके लिए ऐसा मजबूत नियामक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लग सके।
ऐसे में 2 जुलाई को होने वाली बैठक को भारत में क्रिप्टोकरेंसी की दिशा तय करने वाला एक अहम कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के बाद सरकार भविष्य की नीति तय करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि बिना नियमन वाला क्रिप्टो बाजार देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। केंद्रीय बैंक के अनुसार इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी फंडिंग, टैक्स चोरी और अवैध विदेशी लेनदेन में होने की आशंका बनी रहती है। इसके साथ ही बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के कारण आम निवेशकों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति आरबीआई के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। इससे पहले समिति देश-विदेश की प्रमुख क्रिप्टो कंपनियों जैसे Binance, WazirX, CoinDCX और CoinSwitch के अधिकारियों से भी बातचीत कर चुकी है। उनसे निवेशकों के पैसे की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, विदेशी लेनदेन की निगरानी और धोखाधड़ी रोकने के उपायों पर जवाब मांगे गए हैं। सरकार चाहती है कि सभी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म एक समान और पारदर्शी नियमों के तहत काम करें ताकि निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सके।
टैक्स व्यवस्था होगी मजबूत, क्या लगेगा प्रतिबंध?
आरबीआई के साथ बैठक के बाद संसदीय समिति देश की प्रमुख चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था ICAI के साथ भी बैठक करेगी। इसमें क्रिप्टो लेनदेन पर टैक्स व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा टैक्स चोरी रोकने के उपायों पर चर्चा होगी। सरकार की कोशिश है कि जब तक व्यापक कानून नहीं बनता, तब तक वित्तीय अनियमितताओं और अवैध लेनदेन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट संसद को सौंपेगी, जिसके आधार पर भविष्य में नया कानून या नियामक ढांचा तैयार किया जा सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कोई संकेत नहीं दिया गया है। जानकारों का मानना है कि सरकार का जोर प्रतिबंध की बजाय सख्त नियमन, निवेशकों की सुरक्षा, पारदर्शिता और कर अनुपालन सुनिश्चित करने पर है। अंतिम फैसला संसदीय समिति की सिफारिशों और सरकार की आगामी नीति के बाद ही सामने आएगा। क्रिप्टोकरेंसी क्या है?
क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या वर्चुअल मुद्रा है, जिसे किसी सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा जारी नहीं किया जाता।
यह ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होती है और इसके लेनदेन पूरी तरह डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से सुरक्षित किए जाते हैं। बिटकॉइन, एथेरियम और कई अन्य डिजिटल कॉइन इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसमें निवेश करने पर अधिक लाभ की संभावना रहती है, लेकिन इसकी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव होने के कारण जोखिम भी काफी अधिक होता है। यही वजह है कि दुनिया के अधिकांश देश अब क्रिप्टोकरेंसी के लिए स्पष्ट और सख्त नियामक व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

