गलत क्रेडिट कार्ड चुनने की कीमत! 92% लोग हर साल गंवा रहे हजारों-लाखों रुपये के रिवॉर्ड्स, जानिए कैसे करें सही चुनाव

अगर आप भी रोजमर्रा की खरीदारी, ऑनलाइन शॉपिंग, यात्रा या रेस्तरां में भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। हो सकता है कि आप हर महीने हजारों रुपये खर्च कर रहे हों, लेकिन उसके बदले मिलने वाले रिवॉर्ड्स, कैशबैक और दूसरे फायदे का केवल एक छोटा हिस्सा ही हासिल कर पा रहे हों। वजह यह नहीं कि आपका खर्च कम है, बल्कि वजह यह है कि आपका क्रेडिट कार्ड आपकी खर्च करने की आदतों से मेल नहीं खाता। एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि देश के करीब 92 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड धारक ऐसे कार्ड इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प नहीं हैं। इसका सीधा असर उनकी बचत पर पड़ रहा है और वे हर साल हजारों से लेकर लाखों रुपये तक के संभावित लाभ से वंचित रह जाते हैं। भारत में पिछले कुछ वर्षों में क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेजी से बढ़ा है। 

वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कार्ड के जरिए होने वाले लेनदेन की कुल वैल्यू 6.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 21.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसी अवधि में ट्रांजैक्शन की संख्या भी 176.4 करोड़ से बढ़कर 477.4 करोड़ हो गई। यानी डिजिटल भुगतान के इस दौर में क्रेडिट कार्ड अब केवल भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि बचत और अतिरिक्त लाभ कमाने का एक बड़ा जरिया भी बन चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इसका पूरा फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। एक स्टडी में 129 लोगों के ट्रांजैक्शन डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि औसतन कार्डधारक अपने सालाना खर्च का केवल करीब 4 प्रतिशत हिस्सा ही रिवॉर्ड्स और अन्य लाभों के रूप में वापस हासिल कर रहे हैं। जबकि यदि वे अपनी जरूरतों और खर्च के पैटर्न के अनुसार सही कार्ड चुनें, तो यह लाभ 10 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन परिवारों का सालाना खर्च 15 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए नुकसान और भी बड़ा है। ऐसे उपभोक्ता केवल गलत कार्ड का इस्तेमाल करने या कार्ड की सुविधाओं का सही उपयोग न करने के कारण हर साल 2 लाख रुपये से अधिक के संभावित रिवॉर्ड्स, कैशबैक और अन्य लाभ गंवा सकते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश लोग क्रेडिट कार्ड चुनते समय वेलकम बोनस, बड़े ब्रांड का नाम, बैंक से पुराने संबंध, एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस या शुरुआती ऑफर्स को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह विश्लेषण करते हैं कि उनका सबसे ज्यादा खर्च आखिर किस श्रेणी में होता है।

खर्च की आदत ही तय करती है असली फायदा

मान लीजिए किसी परिवार का सबसे ज्यादा खर्च यात्रा, ऑनलाइन शॉपिंग और बाहर खाना खाने पर होता है। अगर वह सामान्य कैशबैक कार्ड इस्तेमाल करता है, तो उसे सीमित लाभ मिलेगा। वहीं, यदि वही परिवार ऐसा कार्ड चुने जो इन श्रेणियों में ज्यादा रिवॉर्ड्स या एयरलाइन माइल्स देता हो, तो उसकी सालाना बचत कई गुना बढ़ सकती है। यात्रा करने वाले लोगों के लिए एयरलाइन माइल्स और होटल लॉयल्टी प्रोग्राम काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लेकिन कई बार लोग अपने रिवॉर्ड पॉइंट्स का इस्तेमाल कम मूल्य वाले सामान या सामान्य कैशबैक के लिए कर देते हैं। इससे उन्हें मिलने वाला वास्तविक फायदा काफी कम हो जाता है। रिपोर्ट बताती है कि आज भारत में रिवॉर्ड कार्ड इकोनॉमी तेजी से विकसित हो रही है। 

बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कैटेगरी आधारित कैशबैक, एयरलाइन माइल्स, होटल पॉइंट्स, डाइनिंग डिस्काउंट, फ्यूल रिवॉर्ड्स, शॉपिंग वाउचर और एयरपोर्ट लाउंज जैसी कई सुविधाएं दे रहे हैं। लेकिन इन सुविधाओं का लाभ तभी मिलता है, जब कार्ड का चुनाव सोच-समझकर किया जाए। ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखना हमेशा समझदारी नहीं है। कई लोग समय के साथ तीन, चार या पांच कार्ड इकट्ठा कर लेते हैं, लेकिन उनका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते। नतीजा यह होता है कि खर्च अलग-अलग कार्डों में बंट जाता है और किसी भी कार्ड पर पर्याप्त रिवॉर्ड्स नहीं मिल पाते। अध्ययन के अनुसार सबसे बेहतर रणनीति एक या दो कार्ड रखना हो सकती है। एक मुख्य कार्ड, जिससे कुल खर्च का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा किया जाए और दूसरा ऐसा कार्ड, जिसका उपयोग उन खास श्रेणियों में किया जाए जहां सबसे ज्यादा खर्च होता है और बेहतर रिवॉर्ड्स मिलते हैं। 

रिपोर्ट में रिवॉर्ड पॉइंट्स के इस्तेमाल को लेकर भी एक बड़ी गलती की ओर इशारा किया गया है। अधिकांश लोग अपने पॉइंट्स को मर्चेंडाइज कैटलॉग, छोटे कैशबैक या गिफ्ट आइटम्स के लिए रिडीम कर देते हैं। जबकि यही पॉइंट्स यात्रा बुकिंग, एयरलाइन टिकट, होटल स्टे या चुनिंदा ब्रांड वाउचर के जरिए कहीं ज्यादा मूल्य दे सकते हैं। कई मामलों में एक ही पॉइंट की रिडेम्प्शन वैल्यू दो से पांच गुना तक बढ़ सकती है। यही वजह है कि समान संख्या में रिवॉर्ड पॉइंट्स कमाने वाले दो लोगों को अलग-अलग रिडेम्प्शन विकल्प चुनने के कारण बिल्कुल अलग लाभ मिलता है। 

बढ़ते डिजिटल भुगतान के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल उधार लेने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक स्मार्ट फाइनेंशियल टूल बन चुका है। सही कार्ड का चयन, खर्च का नियमित विश्लेषण और रिवॉर्ड्स का समझदारी से उपयोग करके उपभोक्ता अपनी रोजमर्रा की खरीदारी से भी बड़ी बचत कर सकते हैं। इसलिए अगली बार नया क्रेडिट कार्ड चुनने से पहले आकर्षक ऑफर्स नहीं, बल्कि अपनी खर्च करने की आदतों को प्राथमिकता देना ही सबसे फायदेमंद फैसला साबित हो सकता है।

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