उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ की गवाह बन रही है। पहाड़ों में “हर हर महादेव” और “जय बद्री विशाल” के जयकारों के बीच लाखों श्रद्धालु बाबा केदार, बद्रीविशाल, मां गंगा और मां यमुना के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्गों पर लगातार बढ़ती भीड़ यह बता रही है कि लोगों की आस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। लेकिन इसी आस्था के बीच एक चिंताजनक तस्वीर भी सामने आ रही है। यात्रा शुरू होने के सिर्फ 24 दिनों के भीतर 40 श्रद्धालुओं की मौत ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में 13 मई तक 12 लाख 64 हजार 217 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहाड़ों की कठिन यात्रा पर पहुंचना अपने आप में रिकॉर्ड माना जा रहा है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर लंबी कतारें लग रही हैं और यात्रा मार्गों पर भारी दबाव देखा जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की 14 मई सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कुल 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 22 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं। बद्रीनाथ धाम में 7, यमुनोत्री में 6 और गंगोत्री धाम में 5 श्रद्धालुओं ने जान गंवाई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण हुई हैं।
चारधाम यात्रा का मार्ग समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है, जहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम रहता है। लगातार पैदल चढ़ाई, ठंडा मौसम और शारीरिक थकावट की वजह से बुजुर्गों और बीमार यात्रियों की तबीयत अचानक बिगड़ रही है। कई श्रद्धालु स्वास्थ्य संबंधी सलाह को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। यही अति उत्साह कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। यात्रा मार्ग पर ऐसे भी मामले सामने आए हैं जहां यात्रियों ने सीने में दर्द, सांस फूलने या चक्कर आने जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज किया और बाद में उनकी हालत गंभीर हो गई। यात्रा शुरू होने से पहले सरकार की ओर से श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी जारी की गई थी।
इसमें खास तौर पर बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई थी। साथ ही यात्रा के दौरान पर्याप्त आराम करने, पानी पीते रहने और शरीर में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लेने की अपील की गई थी। सरकार का दावा है कि यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं को पहले की तुलना में और मजबूत किया गया है। जगह-जगह मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे मौत के मामले यह दिखा रहे हैं कि पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में, ट्रॉमा सेंटर और हाई एल्टीट्यूड इलाज पर फोकस
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा है कि यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु शरीर के संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कम समय में यात्रा पूरी करने के लिए जरूरत से ज्यादा तेजी दिखाते हैं, जिससे हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा को दौड़ की तरह न लें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पूरी तरह पालन करें। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक यात्रा मार्ग पर इस बार 47 अस्पताल बनाए गए हैं। इसके अलावा करीब 2820 स्वास्थ्य कर्मियों और 400 डॉक्टरों को अलग-अलग पड़ावों पर तैनात किया गया है। सरकार का दावा है कि यात्रा मार्ग के संवेदनशील स्थानों पर लगातार स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
उन्होंने बताया कि पहली बार दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 180 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
इन डॉक्टरों को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन, हार्ट अटैक और शुगर मरीजों के उपचार की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। सरकार बद्रीनाथ और केदारनाथ में स्थायी अस्पताल शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके। राज्य सरकार अब यात्रा मार्ग पर डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की तैयारी में भी जुट गई है। दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा कौड़ियाला और यात्रा मार्ग के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में “गोल्डन ऑवर” बेहद महत्वपूर्ण होता है।
यदि मरीज को शुरुआती एक घंटे के भीतर इलाज मिल जाए तो जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को और तेज करने पर काम कर रही है। चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है। सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं और किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी को हल्के में न लें। श्रद्धा और उत्साह के बीच सावधानी ही सुरक्षित यात्रा की सबसे बड़ी कुंजी मानी जा रही है।

