जब चाहें जमा करें पैसा, बुढ़ापे में मिलेगी पेंशन, केंद्र सरकार ला सकती है हर कामगार के लिए नई “यूनिफाइड पेंशन स्कीम”

देश के करोड़ों कामगारों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ऐसी नई पेंशन योजना पर विचार कर रहा है, जो मौजूदा पेंशन मॉडल से पूरी तरह अलग होगी। इस प्रस्तावित योजना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी पैसा जमा कर सकेगा। न तो हर महीने निश्चित अंशदान की बाध्यता होगी और न ही नौकरी बदलने या बेरोजगार होने की स्थिति में खाता प्रभावित होगा। प्रस्तावित योजना को ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ नाम दिया गया है। इसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। यह योजना संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कामगारों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पहले से लागू यूनिफाइड पेंशन स्कीम से अलग होगी और इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक होगा। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। 

इनमें दिहाड़ी मजदूर, स्वरोजगार से जुड़े लोग, छोटे व्यापारी, घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक और अन्य अस्थायी रोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इनकी आय नियमित नहीं होती, इसलिए वे मौजूदा पेंशन योजनाओं में लगातार अंशदान नहीं कर पाते। यही वजह है कि देश का बड़ा श्रमबल किसी संस्थागत रिटायरमेंट बचत व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाता। नई योजना इसी समस्या का समाधान निकालने की कोशिश मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इसमें सदस्य अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार किसी भी समय पैसा जमा कर सकेगा। यदि किसी महीने या किसी अवधि में आय अधिक हुई तो वह अधिक राशि जमा कर सकता है और यदि आय कम हुई तो अंशदान रोक भी सकता है। इस दौरान खाते को निष्क्रिय नहीं माना जाएगा। 

योजना का उद्देश्य केवल पेंशन उपलब्ध कराना नहीं बल्कि देश के विशाल असंगठित श्रमबल को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना भी है। सरकार का मानना है कि लचीली अंशदान व्यवस्था से अधिक लोग स्वेच्छा से इस योजना से जुड़ेंगे और भविष्य के लिए बचत को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना में नियोक्ता की भूमिका सीमित होगी। मौजूदा कई पेंशन योजनाओं में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंशदान शामिल होता है, लेकिन नई व्यवस्था में सदस्य स्वयं अपने खाते में राशि जमा कर सकेगा। इससे ऐसे लोगों को भी लाभ मिलेगा जो किसी एक नियोक्ता से जुड़े नहीं हैं या स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। प्रस्तावित मॉडल के तहत प्रत्येक सदस्य को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जो ईपीएफओ के यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) की तर्ज पर होगी। इसी नंबर से पेंशन खाता जुड़ा रहेगा। इससे व्यक्ति नौकरी बदलने, शहर बदलने या अस्थायी रूप से बेरोजगार होने की स्थिति में भी अपना अंशदान जारी रख सकेगा।

हर कामगार के लिए एक पेंशन प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी

इस योजना को भविष्य में एक सार्वभौमिक पेंशन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसका मतलब यह है कि देश का कोई भी कामगार, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो, इस योजना का सदस्य बन सकेगा। इसके लिए अलग नामांकन प्रक्रिया, अलग पहचान और क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है। योजना के वित्तीय पक्ष पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। प्रारंभिक चर्चा के अनुसार इसमें मिलने वाला रिटर्न ईपीएफ जमा पर सरकार द्वारा हर वर्ष घोषित ब्याज दर से जुड़ा हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो सदस्यों को अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना रहेगी। सेवानिवृत्ति के समय भुगतान के विभिन्न विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। 

प्रस्ताव के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर सदस्य को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा एकमुश्त निकालने की अनुमति मिल सकती है। इसके अलावा वह एन्युटी विकल्प भी चुन सकेगा, जिसके तहत उसे तय अवधि तक नियमित भुगतान मिलता रहेगा। इससे बुजुर्गावस्था में आय का एक स्थायी स्रोत उपलब्ध हो सकेगा। हालांकि सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि लोग पूरी बचत एक साथ निकालकर भविष्य की सुरक्षा से वंचित न हो जाएं। इसलिए निकासी संबंधी कुछ नियम और सीमाएं तय की जा सकती हैं, ताकि रिटायरमेंट के बाद भी पर्याप्त राशि सुरक्षित बनी रहे। 

यदि यह योजना लागू होती है तो भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। वर्तमान में कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) मुख्य रूप से संगठित क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि देश के अधिकांश कामगार इससे बाहर हैं। नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम इस अंतर को कम करने का माध्यम बन सकती है। फिलहाल योजना पर विचार-विमर्श जारी है और अंतिम स्वरूप सामने आना बाकी है। लेकिन यदि सरकार इसे लागू करने में सफल रहती है तो यह करोड़ों कामगारों के लिए बुढ़ापे की आर्थिक चिंता कम करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। नियमित आय न होने के बावजूद भविष्य के लिए बचत करने की सुविधा इस योजना को अन्य पेंशन मॉडलों से अलग और अधिक समावेशी बना सकती है।

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