देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई, कर व्यवस्था और मुद्रा प्रबंधन को लेकर संसद के मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। राज्यसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की आर्थिक नीतियों, महंगाई नियंत्रण के उपायों और करदाताओं को दी जा रही राहतों का विस्तृत ब्यौरा दिया। इस दौरान सरकार ने पहली बार स्पष्ट किया कि 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य के भीतर बनी हुई है और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ढांचे में कई अहम बदलाव किए गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य एक ओर आम नागरिकों की क्रय शक्ति को बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ और प्रभावी बनाना भी है। इसी दिशा में पॉलीमर नोटों की शुरुआत को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, पॉलीमर नोट पारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। इससे नोटों के जल्दी खराब होने की समस्या कम होगी और बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी घटेगी।
राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी प्रदान की है। इस परीक्षण के तहत दोनों मूल्यवर्ग के एक-एक अरब नोट बाजार में जारी किए जाएंगे। यह प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि इन नोटों का उद्देश्य मौजूदा मुद्रा प्रणाली को पूरी तरह बदलना नहीं है। पॉलीमर नोट कागज के नोटों के साथ समानांतर रूप से प्रचलन में रहेंगे। फील्ड ट्रायल के दौरान विभिन्न मौसमीय परिस्थितियों, उपयोग के स्तर और नोटों की टिकाऊ क्षमता का आकलन किया जाएगा। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो भविष्य में इन नोटों को नियमित रूप से जारी करने पर विचार किया जाएगा। हालांकि फिलहाल खरीद प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है, इसलिए परियोजना की कुल लागत और देशव्यापी क्रियान्वयन की समय-सीमा तय नहीं की गई है।
इस बीच सरकार ने महंगाई के मोर्चे पर भी राहत भरी तस्वीर पेश की है। वित्त मंत्री ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर पिछले तीन वर्षों में लगातार नीचे आई है। वर्ष 2023-24 में औसत महंगाई दर 5.4 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर 4.6 प्रतिशत रह गई। इसके बाद वर्ष 2025-26 में यह और कम होकर 2.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। हालांकि वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में महंगाई दर बढ़कर 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।
सरकार के अनुसार हालिया बढ़ोतरी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और मौसमी कारण जिम्मेदार रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा और अन्य कमोडिटी की वैश्विक कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके अलावा सब्जियों की मौसमी कीमतों में बढ़ोतरी और एल नीनो के प्रभाव ने भी महंगाई पर दबाव बनाया। बावजूद इसके सरकार का दावा है कि खुदरा महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर बनी हुई है और स्थिति नियंत्रण में है।
पॉलीमर नोटों से बढ़ेगी मुद्रा की उम्र, कागजी नोटों पर घटेगा दबाव
वित्त मंत्रालय के अनुसार पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ होने के कारण लंबे समय तक उपयोग में बने रह सकते हैं। इससे नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च कम होगा और नकली नोटों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। फील्ड ट्रायल के नतीजों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। महंगाई को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने कई प्रशासनिक और राजकोषीय उपाय किए हैं। कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी में कमी की गई है। इसके अलावा मसूर दाल पर कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर में भी कटौती की गई है। सरकार ने मार्च 2026 में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी करके भी उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास किया।
वित्त मंत्री ने बताया कि जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में कर प्रणाली को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए दो प्रमुख दरों वाला ढांचा लागू किया गया है। इसके तहत 18 प्रतिशत को मानक दर और 5 प्रतिशत को रियायती दर के रूप में रखा गया है। वहीं कुछ चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं पर 40 प्रतिशत की विशेष डी-मेरिट दर लागू होगी। सरकार का कहना है कि इससे कुल कर बोझ नहीं बढ़ा है, बल्कि कई उत्पादों पर कर दरों में कमी आई है। नई व्यवस्था के तहत अनेक वस्तुओं पर कर दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत, 18 प्रतिशत से घटाकर 12 या 5 प्रतिशत तथा 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत अथवा शून्य कर दी गई है। इससे उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
मध्यम वर्ग को राहत देने के उद्देश्य से आयकर व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक व्यक्तिगत आय पर कोई आयकर नहीं देना होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए मानक कटौती का लाभ जोड़ने के बाद यह सीमा बढ़कर 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। सरकार का मानना है कि इससे लाखों करदाताओं की बचत बढ़ेगी और उपभोग को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार के अनुसार कर राहत, नियंत्रित महंगाई और बढ़ती आय का असर देश की घरेलू खपत पर भी दिखाई दे रहा है।
सकल घरेलू उत्पाद में निजी अंतिम उपभोग व्यय की हिस्सेदारी 56.5 से 56.7 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक प्रति व्यक्ति निजी उपभोग व्यय की वृद्धि दर वर्ष 2023-24 में 4.8 प्रतिशत थी, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में 6.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कम तथा मध्यम आय वर्ग के परिवारों की क्रय शक्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि महंगाई नियंत्रण, कर राहत और आर्थिक सुधारों के संयुक्त प्रभाव से आने वाले समय में आम नागरिकों को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है ।

