नोएडा के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल, चार साल में घरों की कीमतों ने लगाई लंबी छलांग

दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने का सपना अब पहले से कहीं महंगा होता जा रहा है। खासकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट बाजार ने बीते कुछ वर्षों में ऐसी रफ्तार पकड़ी है, जिसने मकानों की कीमतों का पूरा गणित बदल दिया है। जिस इलाके में वर्ष 2021 में करीब 6,600 रुपये प्रति वर्ग फुट की औसत कीमत पर घर मिल रहे थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 21,500 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गया। यानी महज चार साल में कीमतों में करीब 225 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस उछाल ने न केवल पुराने मकान मालिकों की संपत्ति का मूल्य बढ़ाया है, बल्कि नए खरीदारों के लिए घर खरीदना भी बड़ी आर्थिक चुनौती बना दिया है। प्रॉपर्टी डेटा और विश्लेषण करने वाली कंपनी प्रॉपइक्विटी के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास आवासीय संपत्तियों की कीमतों में आई तेजी के पीछे बुनियादी ढांचे का विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी, कॉरपोरेट गतिविधियों में बढ़ोतरी और प्रीमियम घरों की बढ़ती मांग जैसे कई कारण हैं। 

यह क्षेत्र अब केवल नोएडा में काम करने वाले लोगों के लिए आवासीय विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि निवेशकों और महंगे घरों की तलाश करने वाले खरीदारों के लिए भी प्रमुख ठिकाने के रूप में उभरा है। कीमतों में इस बदलाव को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि किसी खरीदार ने वर्ष 2021 में इस क्षेत्र में करीब 66 लाख रुपये की कीमत का घर लिया था और उसकी कीमत में औसत बाजार दर के अनुरूप बढ़ोतरी हुई, तो वर्ष 2025 में उसी क्षेत्रफल की संपत्ति का मूल्य लगभग 2.15 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। हालांकि, वास्तविक कीमत परियोजना, घर के आकार, निर्माण की गुणवत्ता, सुविधाओं, स्थिति और बाजार में मांग के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। 

फिर भी औसत दरों में आया यह अंतर बताता है कि चार वर्षों के भीतर इस क्षेत्र का आवासीय बाजार किस तरह बदल गया है। इस तेजी का सबसे बड़ा पहलू यह है कि नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास आवासीय संपत्तियों की मांग के साथ-साथ परियोजनाओं की प्रकृति में भी बदलाव आया है। पहले जहां इस इलाके को अपेक्षाकृत नए आवासीय क्षेत्रों के रूप में देखा जाता था, वहीं अब यहां महंगे अपार्टमेंट, आधुनिक आवासीय परिसर और प्रीमियम सुविधाओं वाले घरों पर ज्यादा जोर दिखाई देता है। इससे औसत कीमतों को ऊपर जाने का आधार मिला है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की अहमियत इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि यह दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख कारोबारी और रोजगार केंद्रों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हुए कार्यालयों, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और व्यावसायिक गतिविधियों ने बड़ी संख्या में पेशेवरों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया है। रोजगार के अवसरों के नजदीक रहने की इच्छा ने आवासीय मांग को मजबूती दी है। इसके अलावा, बेहतर सड़क संपर्क और आसपास विकसित होती शहरी सुविधाओं ने भी इस इलाके को घर खरीदारों के लिए आकर्षक बनाया है। 

इस क्षेत्र में कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह दिल्ली और गुरुग्राम जैसे प्रमुख बाजारों में महंगी होती आवासीय संपत्तियां भी हैं। इन शहरों में अच्छे स्थान पर घर खरीदना कई परिवारों के बजट से बाहर होता जा रहा है। ऐसे में नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित प्रीमियम आवासीय परियोजनाएं उन खरीदारों के लिए विकल्प बनी हैं, जो आधुनिक सुविधाओं वाला घर चाहते हैं। हालांकि, लगातार बढ़ती कीमतों के कारण नोएडा का यह इलाका भी अब पहले की तरह किफायती नहीं रह गया है। खरीदारों को अपनी आय, कर्ज चुकाने की क्षमता और भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर फैसला करना पड़ रहा है।

जेवर एयरपोर्ट और लग्जरी घरों की मांग से बढ़ी बाजार की रफ्तार

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास संपत्तियों की कीमतों में तेजी के पीछे जेवर में विकसित हो रहा नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। बड़े हवाई अड्डे के विकास से आसपास के क्षेत्रों में सड़क संपर्क, व्यावसायिक गतिविधियों, रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है। इसी संभावना ने नोएडा के साथ यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के रियल एस्टेट बाजार को भी चर्चा में ला दिया है। निवेशक आने वाले वर्षों में क्षेत्र के विकास और बढ़ती आवासीय मांग को ध्यान में रखकर संपत्तियों में रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास के बाजारों को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा। दोनों क्षेत्रों में विकास का स्तर, मौजूदा सुविधाएं, रोजगार केंद्रों से दूरी और संपत्तियों की कीमतें अलग-अलग हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मिलने वाला लाभ भी हर परियोजना तक समान रूप से पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए निवेश से पहले संबंधित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और विकास योजनाओं की जांच करना जरूरी है। रियल एस्टेट बाजार में लग्जरी आवास की बढ़ती मांग भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। 

आधुनिक सुविधाओं वाले परिसर, बेहतर सुरक्षा, क्लब, पार्किंग, हरित क्षेत्र और अन्य सुविधाओं के कारण प्रीमियम परियोजनाओं की कीमतें सामान्य आवासीय विकल्पों से काफी अधिक हो सकती हैं। यदि किसी क्षेत्र में महंगी परियोजनाओं की बिक्री और हिस्सेदारी बढ़ती है, तो वहां की औसत कीमतों में भी बड़ा उछाल दिखाई दे सकता है। इसलिए औसत दरों में हुई वृद्धि को हर घर की कीमत में समान बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस तेजी का दूसरा पहलू आम खरीदारों की चुनौती है। चार साल में कीमतों में करीब 225 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अर्थ है कि सीमित बजट वाले परिवारों के लिए घर खरीदने की योजना बनाना पहले से कठिन हो गया है। बढ़ती कीमतों के साथ यदि कर्ज की लागत, पंजीकरण शुल्क, रखरखाव और अन्य खर्च भी जुड़ जाएं, तो घर खरीदने का कुल बजट और बढ़ जाता है। 

ऐसे में केवल भविष्य में कीमतें बढ़ने की उम्मीद के आधार पर संपत्ति खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारों और निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे परियोजना की कानूनी स्थिति, निर्माण की प्रगति, डेवलपर की विश्वसनीयता, वास्तविक मांग और आसपास उपलब्ध सुविधाओं की पड़ताल करें। साथ ही, यह भी देखें कि संपत्ति का मौजूदा मूल्य उसके स्थान और सुविधाओं के हिसाब से उचित है या नहीं। केवल बीते वर्षों में हुई तेजी भविष्य में भी उसी रफ्तार से कीमतें बढ़ने की गारंटी नहीं देती। 

कुल मिलाकर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास चार वर्षों में संपत्तियों की औसत कीमतों का 6,600 रुपये से बढ़कर 21,500 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंचना दिल्ली-एनसीआर के बदलते रियल एस्टेट बाजार की बड़ी तस्वीर पेश करता है। बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार केंद्रों का विस्तार, प्रीमियम आवास की मांग और जेवर हवाई अड्डे से जुड़ी विकास की उम्मीदों ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है। आने वाले समय में बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बुनियादी ढांचे का विकास कितनी तेजी से होता है, खरीदारों की वास्तविक मांग कैसी रहती है और महंगी होती संपत्तियों के बीच खरीदने की क्षमता कितनी बनी रहती है।

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