राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून के बीच स्वाइन फ्लू यानी मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में पिछले 24 घंटे के दौरान स्वाइन फ्लू के 114 नए मामलों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही इस साल अब तक संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 1777 हो गई है। यह आंकड़ा पिछले साल सामने आए 229 मामलों के मुकाबले करीब सात से आठ गुना अधिक है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संबंधित अधिकारियों से लगातार जानकारी ली जा रही है। मानसून के दौरान मौसम में बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव, बारिश और उमस के बीच वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। इस समय लोगों का अधिक समय घरों, कार्यालयों, अस्पतालों और अन्य बंद स्थानों में बीतना भी संक्रमण के प्रसार की वजह बन रहा है। एसी के बढ़ते इस्तेमाल और बंद कमरों में हवा का पर्याप्त आवागमन नहीं होने से भी वायरस के फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इन्फ्लुएंजा का संक्रमण केवल बुजुर्गों या पहले से बीमार लोगों तक सीमित नहीं है। इस बार छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। यहां तक कि अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित हो रहे हैं। सफदरजंग, एम्स समेत राजधानी के दूसरे अस्पतालों में भी इन्फ्लुएंजा के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वाइन फ्लू का वायरस समय के साथ अपना रूप बदलता रहता है।
हर कुछ वर्षों में वायरस के स्वरूप में बदलाव आने से लोगों में पहले से मौजूद प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षा नहीं दे पाती। यही वजह है कि कई बार संक्रमण तेजी से फैलता है और बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। मानसून में बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टर लोगों को संक्रमण से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह कोरोना संक्रमण के दौरान हाथों की साफ-सफाई, मास्क और भीड़ से दूरी जैसे उपायों पर जोर दिया गया था, उसी तरह मौसमी इन्फ्लुएंजा से बचाव में भी ये उपाय काफी मददगार हो सकते हैं।
बंद जगहों में संक्रमण का खतरा ज्यादा, इन मरीजों के लिए अधिक सावधानी जरूरी
एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. नीरज निश्चल के मुताबिक मानसून के दौरान मौसम में लगातार बदलाव, घरों और अन्य बंद जगहों पर लोगों की अधिक भीड़, एसी का ज्यादा इस्तेमाल और हवा का पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकलना इन्फ्लुएंजा संक्रमण के प्रसार को बढ़ावा दे सकता है। ऐसे वातावरण में संक्रमित व्यक्ति के आसपास मौजूद लोगों तक वायरस पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले इन्फ्लुएंजा के मामले मुख्य रूप से सर्दियों में अधिक देखने को मिलते थे, लेकिन अब संक्रमण का पैटर्न बदल रहा है। मौसम में बदलाव और लोगों की जीवनशैली में आए परिवर्तन के कारण वर्ष के अलग-अलग समय में इसके मामले बढ़ सकते हैं। खास तौर पर बारिश के मौसम में जब लोग लंबे समय तक बंद स्थानों पर रहते हैं, तब संक्रमण फैलने की आशंका और बढ़ जाती है।
स्वाइन फ्लू होने पर कई मरीजों में सामान्य वायरल बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द, बदन दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। ज्यादातर स्वस्थ लोगों में संक्रमण नियंत्रित रह सकता है, लेकिन कुछ मरीजों में यह गंभीर रूप ले सकता है। वायरस कई बार फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर निमोनिया की स्थिति बना देता है। जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की बीमारी है, उनके लिए जोखिम अधिक रहता है। इसके अलावा हृदय रोग, लिवर की बीमारी, किडनी की गंभीर समस्या या अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीजों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर हो सकता है। लंबे समय से स्टेरॉयड लेने वाले मरीज, मधुमेह से पीड़ित लोग और कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों को इन्फ्लुएंजा से विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। इन लोगों में संक्रमण तेजी से बिगड़ सकता है और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी पड़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को भी संक्रमण से बचाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों को सावधानी बरतनी चाहिए। घर में किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी या अन्य वायरल लक्षण हों तो उसके संपर्क में आने से बचना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना, नियमित रूप से हाथ धोना और कमरे में हवा का उचित आवागमन बनाए रखना जरूरी है।
अस्पतालों में भी स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने के मामले सामने आने के कारण संक्रमण नियंत्रण को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है। मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों और अस्पताल आने वाले लोगों को भी अनावश्यक भीड़ से बचने तथा जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। दिल्ली में बढ़ते मामलों के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग लक्षणों को सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें। खासकर जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें बुखार या सांस संबंधी परेशानी होने पर जल्द चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

