अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का सिलसिला जारी रखा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के लगातार आ रहे सख्त बयानों ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में जहाजों को निशाना बनाता है तो उसे इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और जल आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं को भी निशाना बना सकता है। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बढ़ते तनाव का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय शेयर बाजार, कच्चे तेल, सोना और चांदी की कीमतों पर भी इस भू-राजनीतिक तनाव का असर देखने को मिल सकता है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ सकती है, जबकि कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल आने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर ईरान को लेकर कई कड़े संदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने समुद्री मार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमला जारी रखा या वैश्विक व्यापार को बाधित करने की कोशिश की, तो अमेरिका निर्णायक और कठोर कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को समझ लेना चाहिए कि अमेरिका अब किसी भी उकसावे का जवाब पहले से कहीं अधिक ताकत के साथ देगा।
ट्रंप ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो ईरान के बिजली उत्पादन केंद्रों, जल बुनियादी ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों को भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का निशाना बनाया जा सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव चरम पर पहुंच चुका है और लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। ट्रंप के ये बयान केवल राजनीतिक संदेश नहीं हैं, बल्कि संभावित सैन्य रणनीति का भी संकेत देते हैं। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ अपने अभियान को और व्यापक बना सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए है क्योंकि इस संघर्ष का असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले भी जब दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष चरम पर था, तब ट्रंप ने इसी तरह के सख्त बयान दिए थे। उस समय भी उन्होंने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। अब एक बार फिर उनके बयानों की भाषा पहले जैसी ही आक्रामक दिखाई दे रही है, जिससे तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का सख्त संदेश, समझौते के उल्लंघन का लगाया आरोप
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की मूल शर्त यह थी कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले बंद करेगा तो अमेरिका प्रतिबंधों और नाकाबंदी में राहत देने पर विचार करेगा। लेकिन ईरान की ओर से कथित रूप से जहाजों पर हमले और गोलीबारी की घटनाएं जारी रहने के कारण अमेरिका अब जवाबी कार्रवाई कर रहा है। वेंस ने स्पष्ट कहा कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता है तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक ताकत और व्यापक स्तर पर सैन्य कार्रवाई करेगा।
उनके इस बयान को अमेरिका की भविष्य की रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। ट्रंप और वेंस के लगातार आक्रामक बयानों से यह स्पष्ट हो रहा है कि वाशिंगटन ईरान पर दबाव बढ़ाने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया से होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल संभव है, जिसका असर भारत सहित दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ता है तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। वहीं सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ने से उनकी कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने वाली भी साबित हो सकती है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह टकराव केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी इसके दूरगामी प्रभाव दिखाई देने लगे हैं। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कोई पहल होती है या फिर यह संघर्ष और अधिक गंभीर रूप लेता है।

