विमल इलायची विज्ञापन पर घिरे सितारे, शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ से मांगा जवाब

महाराष्ट्र में विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तीनों अभिनेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ के नाम से प्रसारित होने वाले विज्ञापन के जरिए राज्य में प्रतिबंधित ‘विमल पान मसाला’ का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार किया जा रहा है। कार्रवाई के बाद अब एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि लोकप्रिय कलाकारों को ऐसे उत्पादों के विज्ञापन करने चाहिए या नहीं, जिनका संबंध तंबाकू या स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह उत्पादों से जोड़ा जाता है। मामला केवल नोटिस तक सीमित नहीं है। इस विवाद ने शाहरुख खान और अजय देवगन के उन पुराने बयानों को भी चर्चा में ला दिया है, जिनमें दोनों अभिनेताओं ने हानिकारक उत्पादों के प्रचार को लेकर अपनी अलग-अलग दलीलें दी थीं। खासतौर पर शाहरुख खान का वर्षों पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, अजय देवगन ने भी 2022 में विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर उठे सवालों पर अपना पक्ष रखा था।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की आपत्ति का केंद्र ‘सरोगेट विज्ञापन’ है। यानी किसी ऐसे उत्पाद का विज्ञापन करना, जिसके नाम, ब्रांड या पहचान का इस्तेमाल किसी दूसरे प्रतिबंधित या विवादित उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता हो। विभाग का आरोप है कि विमल इलायची के विज्ञापन की आड़ में विमल पान मसाला को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी आधार पर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ से जवाब मांगा गया है। तीनों कलाकार लंबे समय से विमल इलायची के विज्ञापनों में नजर आते रहे हैं। विज्ञापनों में इलायची जैसे उत्पाद को सामने रखा जाता है, लेकिन इसी ब्रांड नाम से जुड़े पान मसाला उत्पाद को लेकर पहले से विवाद होते रहे हैं। यही वजह है कि अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने विज्ञापन की प्रकृति और उसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

इस पूरे विवाद के बीच शाहरुख खान का पुराना बयान खास तौर पर सामने आया है। एक पुराने साक्षात्कार में उनसे पूछा गया था कि यदि सिगरेट, शीतल पेय या अन्य उत्पाद स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं और बच्चों पर उनका प्रभाव पड़ता है, तो क्या सेलिब्रिटीज को ऐसे उत्पादों का विज्ञापन करना चाहिए। शाहरुख ने उस समय तर्क दिया था कि यदि सरकार किसी उत्पाद को वास्तव में नुकसानदेह मानती है तो उसे केवल कलाकारों के विज्ञापन करने पर सवाल उठाने के बजाय उसके उत्पादन और बिक्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए। शाहरुख का तर्क था कि कलाकार के लिए विज्ञापन करना भी उसके पेशे का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि सरकार किसी उत्पाद के उत्पादन और बिक्री की अनुमति देती है और उससे राजस्व भी हासिल करती है, तो केवल विज्ञापन करने वाले कलाकार की कमाई पर सवाल क्यों उठाया जाए। उनका कहना था कि अगर कोई चीज गलत है तो उसे बनाने और बेचने की अनुमति ही नहीं दी जानी चाहिए।

शाहरुख खान के पुराने बयानों से फिर गरमाया विज्ञापन विवाद

शाहरुख खान की इस दलील का एक पहलू यह था कि किसी उत्पाद को कानूनी रूप से बाजार में उपलब्ध रहने की अनुमति है तो उसके विज्ञापन को लेकर जिम्मेदारी केवल कलाकार पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह अभिनेता हैं और काम करके पैसा कमाना उनका पेशा है। हालांकि, समय के साथ सेलिब्रिटीज की सामाजिक जिम्मेदारी और उनके विज्ञापनों के प्रभाव को लेकर बहस और तेज हुई है।

विशेषकर तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों के मामले में यह सवाल लगातार उठता रहा है कि किसी बड़े अभिनेता को लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच रखने के कारण ऐसे ब्रांड का चेहरा बनना चाहिए या नहीं। आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों की लोकप्रियता का सीधा असर विज्ञापनों की पहुंच और लोगों की धारणा पर पड़ सकता है। वहीं, कलाकारों की ओर से अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि जिस उत्पाद का वे विज्ञापन कर रहे हैं, वह अलग उत्पाद है और उसकी कानूनी स्थिति अलग है।

अजय देवगन भी इसी तरह के विवाद का सामना पहले कर चुके हैं। वर्ष 2022 में विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर जब सवाल उठे थे, तब उन्होंने अपने बचाव में कहा था कि वह केवल इलायची का विज्ञापन करते हैं। उन्होंने सरोगेट विज्ञापन के आरोपों से असहमति जताई थी। उनका कहना था कि किसी उत्पाद का इस्तेमाल करना व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद का विषय है। अजय देवगन ने उस समय यह भी कहा था कि यदि कोई उत्पाद वास्तव में लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो सबसे पहले उसके निर्माण पर रोक लगाई जानी चाहिए। इस मामले में उनकी बात शाहरुख खान की पुरानी दलील से काफी हद तक मिलती-जुलती थी।

अब महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ताजा कार्रवाई के बाद अजय देवगन का वही पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है। सवाल यह है कि क्या ‘इलायची’ के नाम से किया जाने वाला विज्ञापन वास्तव में केवल इलायची का प्रचार है या उसके पीछे उसी ब्रांड से जुड़े दूसरे उत्पाद की पहचान और बाजार को बढ़ावा देने का रास्ता तैयार होता है। विमल इलायची के विज्ञापन में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जैसे बड़े नामों की मौजूदगी ने विवाद को और बड़ा बना दिया है। लोकप्रिय अभिनेताओं के विज्ञापनों को आमतौर पर बड़ी संख्या में लोग देखते हैं। ऐसे में नियामक संस्थाओं के लिए यह देखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि विज्ञापन किसी कानूनी उत्पाद तक सीमित है या अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रतिबंधित उत्पाद का प्रचार भी कर रहा है।

फिलहाल तीनों कलाकारों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद उनकी ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी। प्रशासन उनके जवाब और उपलब्ध विज्ञापन सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला कर सकता है। इस बीच यह विवाद एक बार फिर सेलिब्रिटी विज्ञापन, उपभोक्ता स्वास्थ्य और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ चुका है। एक तरफ कलाकारों का तर्क है कि वे कानूनी रूप से उपलब्ध उत्पाद का प्रचार करते हैं और किसी प्रतिबंधित वस्तु के प्रचार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। दूसरी तरफ नियामक एजेंसियों की चिंता यह है कि किसी बड़े ब्रांड के नाम और पहचान का इस्तेमाल अगर प्रतिबंधित उत्पाद को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने के लिए होता है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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