हिमाचल में कल रात से नहीं दौड़ेंगी सरकारी बसें, लंबित मांगों को लेकर एचआरटीसी कर्मचारियों ने किया चक्का जाम का ऐलान

हिमाचल प्रदेश में सरकारी बस सेवा बुधवार रात 12 बजे से पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के कर्मचारियों ने सरकार के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में लाखों यात्रियों की आवाजाही पर असर पड़ने की संभावना है। खासतौर पर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इन इलाकों में एचआरटीसी की बसें ही परिवहन का प्रमुख साधन हैं। हड़ताल की घोषणा से पहले एचआरटीसी कर्मचारी संगठनों और अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम के बीच लंबी बैठक हुई। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी लंबित मांगों पर सकारात्मक फैसला लेगी, लेकिन बातचीत में कोई सहमति नहीं बन सकी। 

इसके बाद कर्मचारी नेताओं ने शिमला के पुराने बस अड्डे पर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कई वर्षों से उनके वित्तीय अधिकार लंबित पड़े हुए हैं और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनका समाधान नहीं किया जा रहा है। इसी वजह से उन्हें आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यदि हड़ताल लंबी चली तो प्रदेश के हजारों दैनिक यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और पर्यटकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हिमाचल के पर्वतीय और दुर्गम इलाकों में निजी परिवहन की सुविधाएं सीमित हैं, ऐसे में एचआरटीसी की बसें लोगों की जीवनरेखा मानी जाती हैं। बस सेवाएं बंद होने से अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 

कर्मचारियों की मुख्य मांगों में नाइट ओवरटाइम का लंबित भुगतान, महंगाई भत्ते (डीए) की रुकी हुई किश्तों का भुगतान और लंबे समय से अटके मेडिकल बिलों का निपटारा शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मदों में करोड़ों रुपये का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि निगम के कर्मचारी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में सेवाएं देते हैं, लेकिन उन्हें समय पर उनके वैधानिक वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार केवल आश्वासन देती रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पेंशनरों का समर्थन, सरकार ने मेडिकल बिलों के लिए जारी किए 20 करोड़ रुपये

एचआरटीसी कर्मचारियों के आंदोलन को अब पेंशनरों और अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिल गया है। हिमाचल परिवहन सेवानिवृत्त कर्मचारी परिषद ने सरकार से कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी लंबित वित्तीय लाभ जल्द जारी करने की मांग की है। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि सेवा के दौरान कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा से काम किया है, इसलिए उनकी मेहनत की कमाई को लंबे समय तक रोककर रखना उचित नहीं है। परिषद ने कहा कि मेडिकल बिलों और अन्य वित्तीय देयों के भुगतान में हो रही देरी के कारण कई सेवानिवृत्त कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। 

बढ़ते इलाज के खर्च के बीच समय पर भुगतान न मिलना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है। कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी के बीच सरकार ने मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए 20 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला लिया है। इस राशि से मार्च 2026 तक लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से लगभग 11 हजार कार्यरत कर्मचारियों और करीब 8 हजार पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केवल मेडिकल बिलों का भुगतान उनकी सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। उनका कहना है कि जब तक नाइट ओवरटाइम, महंगाई भत्ते की लंबित किश्तें और अन्य वित्तीय देयों का स्पष्ट समाधान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के ऐलान के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। 

यदि अंतिम समय में कोई समझौता नहीं होता है तो बुधवार रात 12 बजे के बाद एचआरटीसी बसों के पहिए थम जाएंगे, जिससे पूरे हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ेगा। अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली संभावित अगली बातचीत पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि बस सेवाएं सामान्य रहेंगी या प्रदेश को बड़े परिवहन संकट का सामना करना पड़ेगा।

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