कानपुर में गुरुवार की सुबह आसमान में उड़ान भरने वाला एक प्रशिक्षण विमान कुछ ही देर बाद मौत का मंजर बन गया। उड़ान भरने के महज 20 मिनट बाद विमान गंगा बैराज के पास अचानक डगमगाया और करीब पांच फीट ऊंची चहारदीवारी से टकराने के बाद खेत में जा गिरा। विमान के जमीन पर गिरते ही उसके परखच्चे उड़ गए और मलबा दूर-दूर तक बिखर गया। हादसे में विमान सवार पायलट सचिन भाटिया और प्रशिक्षु अभिषेक पुजारी की जान चली गई। जिस समय विमान आसमान में था, किसी ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि कुछ मिनट बाद दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल जाएंगी।बताया जा रहा है कि विमान ने गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे कानपुर की गर्ग एविएशन फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी से उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान विमान सामान्य रूप से आसमान में दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति अचानक बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विमान करीब 200 से 250 फीट की ऊंचाई पर था। तभी वह हवा में डगमगाने लगा। कुछ ही क्षणों में विमान असंतुलित होकर नीचे आने लगा और गंगा बैराज के पास एक खेत में जा गिरा।
हादसे का सबसे भयावह दृश्य विमान के जमीन से टकराने के बाद सामने आया। विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर कई हिस्सों में टूट गया। उसके पुर्जे घटनास्थल के आसपास दूर तक बिखर गए। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान की एक सीट भी टूटकर बाहर आ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान में आग नहीं लगी, वरना स्थिति और भयावह हो सकती थी। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक विमान के गिरने के बाद वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। करीब 12:15 बजे पुलिस-प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची और राहत एवं बचाव का काम शुरू किया गया। घटनास्थल से सामने आए वीडियो हादसे की भयावहता को साफ दिखाते हैं। मलबे के बीच विमान का ढांचा पूरी तरह बिखरा नजर आया। एक पायलट कॉकपिट के पास फंसा हुआ था, जबकि दूसरा विमान से कुछ दूरी पर गंभीर हालत में पड़ा था। दोनों खून से लथपथ थे। मौके पर मौजूद लोगों ने घायलों को बचाने की कोशिश की और पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल भेजा गया।
हादसे में जान गंवाने वाले पायलट की पहचान सचिन भाटिया के रूप में हुई है, जो गुजरात के रहने वाले थे। वहीं प्रशिक्षु अभिषेक पुजारी कर्नाटक के रहने वाले थे। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। चिकित्सकों के मुताबिक दोनों के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं और ऊंचाई से गिरने के कारण उन्हें घातक चोटें आईं। हालांकि मौत की स्पष्ट वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी। इस हादसे ने उन परिवारों को गहरा सदमा दिया है, जिनके लिए सचिन और अभिषेक अपने सपनों को पूरा करने के रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे। पायलट बनने का सपना अपने साथ बड़ी उम्मीदें लेकर चलता है। विमान की हर उड़ान प्रशिक्षण और भविष्य की ओर एक कदम मानी जाती है, लेकिन गुरुवार की उड़ान दोनों के जीवन की आखिरी उड़ान साबित हुई। कुछ मिनट पहले तक आसमान में उड़ रहा विमान अचानक खेत में मलबे में बदल गया और दो जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान कुछ समय तक आसमान में उड़ता रहा। ग्रामीणों के मुताबिक करीब चार से पांच मिनट तक विमान हवा में दिखाई दिया और उसके बाद अचानक नीचे गिरने लगा। विमान जिस जगह गिरा, उसके आसपास खेत थे। सबसे बड़ी राहत यही रही कि वहां घनी आबादी नहीं थी। घटनास्थल से रिहायशी बस्ती एक किलोमीटर की दूरी पर बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विमान आबादी वाले क्षेत्र की ओर गिरता तो हादसे का असर कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता था। नीचे मकान, सड़क या लोगों की मौजूदगी होती तो जान-माल का बड़ा नुकसान होने की आशंका थी। विमान का खेत में गिरना एक तरह से बड़ी जनहानि को टालने वाला रहा। हालांकि विमान में सवार दोनों लोगों की मौत ने इस राहत को भी गहरे दुख में बदल दिया।
हादसे की जांच शुरू, उड़ान के दौरान क्या हुआ इसकी तलाश
हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशिक्षण विमान हवा में अचानक असंतुलित क्यों हुआ। क्या विमान में तकनीकी खराबी आई थी, उड़ान के दौरान मौसम या हवा की स्थिति जिम्मेदार थी या फिर किसी अन्य कारण से विमान नियंत्रण से बाहर हुआ? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएंगे। हादसे की गंभीरता को देखते हुए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो ने भी जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान कानपुर की गर्ग एविएशन फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी का था। इस प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लेते हैं। जानकारी के मुताबिक एकेडमी में 100 से अधिक लोग पायलट बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। जिस विमान के साथ यह हादसा हुआ, उसने भी इसी फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी से उड़ान भरी थी।
हादसे के बाद जांच एजेंसियां विमान के मलबे, उड़ान से जुड़े रिकॉर्ड और दुर्घटना से पहले की परिस्थितियों की जांच करेंगी। यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि उड़ान भरने के बाद विमान किस दिशा में गया, कितनी ऊंचाई पर था और हादसे से ठीक पहले उसमें क्या तकनीकी या संचालन संबंधी स्थिति बनी थी। विमान के क्षतिग्रस्त हिस्सों की भी जांच की जाएगी, ताकि दुर्घटना की वजह तक पहुंचा जा सके। इस हादसे ने प्रशिक्षण विमान की उड़ानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पायलट बनने की तैयारी कर रहे प्रशिक्षुओं के लिए प्रशिक्षण उड़ान बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में विमानों की तकनीकी स्थिति, नियमित जांच, उड़ान से पहले सुरक्षा परीक्षण और प्रशिक्षक तथा प्रशिक्षु के बीच समन्वय बेहद अहम हो जाता है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कानपुर की इस दुर्घटना के पीछे आखिर कौन सा कारण था।
फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। मलबे को भी जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हादसे के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने आने में समय लग सकता है, लेकिन इस घटना ने कानपुर में गुरुवार की सुबह को एक दर्दनाक हादसे की याद में बदल दिया है। एक तरफ दो परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया, तो दूसरी तरफ पायलट बनने का सपना देख रहे कई प्रशिक्षुओं और उनके परिवारों के मन में भी इस घटना को लेकर चिंता पैदा हुई है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, ताकि यह पता चल सके कि 11:30 बजे उड़ान भरने वाला विमान आखिर महज कुछ देर बाद नियंत्रण से बाहर होकर जमीन पर क्यों आ गिरा। हादसे की वजह सामने आना इसलिए भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें और किसी दूसरी उड़ान का अंत इस तरह न हो।

