आज से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू, नाथुला दर्रा से 44 श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना, जानिए भगवान शिव के पवित्र धाम के बारे में

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का औपचारिक आगाज आज, शनिवार से हो गया। भगवान शिव के पवित्र धाम माने जाने वाले कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की कठिन एवं आध्यात्मिक यात्रा के लिए पहला जत्था सिक्किम के नाथू ला दर्रे के रास्ते तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के लिए रवाना हुआ। लंबे समय से इस यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक क्षण माना जा रहा है। पहले जत्थे में कुल 44 सदस्य शामिल हैं। इनमें दो संपर्क अधिकारी और एक चिकित्सा अधिकारी भी शामिल हैं, जबकि श्रद्धालुओं में 32 पुरुष और 12 महिलाएं हैं। यह दल सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंच चुका था, जहां यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच, दस्तावेज सत्यापन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। 

शनिवार को यह जत्था नाथू ला दर्रे के माध्यम से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यांत्से शहर के लिए रवाना हुआ। ग्यांत्से को नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट केंद्र माना जाता है। यहां से श्रद्धालु आगे की यात्रा पूरी करते हुए कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचेंगे। यह मार्ग भारत और चीन के बीच हुए समझौते के तहत संचालित किया जाता है और दोनों देशों के प्रशासनिक सहयोग से यात्रा को सुचारु रूप से संपन्न कराया जाता है। यात्रा शुरू होने से पहले भारत में चीन के राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने यात्रियों को सीमा पार करने की प्रक्रिया, यात्रा संबंधी आवश्यक तैयारियों, स्वास्थ्य सावधानियों और स्थानीय व्यवस्थाओं की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं को सफल एवं सुरक्षित यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। चीन के दूतावास ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश जारी कर बताया कि 20 जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था भारत से रवाना हो रहा है। 

दूतावास ने कहा कि आधिकारिक और निजी दोनों माध्यमों से यात्रा करने वाले सभी श्रद्धालुओं का पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा के लिए स्वागत है। दूतावास ने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में यात्रा मार्ग, स्थानीय सुविधाओं, मौसम संबंधी परिस्थितियों और अन्य जरूरी दिशा-निर्देशों से जुड़े वीडियो तथा सूचनाएं साझा की जाएंगी, ताकि यात्रियों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सके। गौरतलब है कि यात्रा की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी थीं। 13 जून को विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद श्रद्धालु विभिन्न चरणों से गुजरते हुए सिक्किम पहुंचे और अब यात्रा का वास्तविक संचालन प्रारंभ हो गया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को दुनिया की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों, बदलते मौसम और सीमित ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने की इच्छा रखते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन जीवन में आध्यात्मिक शांति, आत्मिक ऊर्जा और मोक्ष की अनुभूति प्रदान करते हैं।

कैलाश मानसरोवर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

कैलाश पर्वत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित एक पवित्र पर्वत है, जिसकी ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर मानी जाती है। हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव इसी पर्वत पर समाधि में लीन रहते हैं और यहीं से संपूर्ण सृष्टि का संचालन करते हैं। कैलाश पर्वत केवल हिंदू धर्म के लिए ही नहीं, बल्कि बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए भी अत्यंत पवित्र स्थल है। जैन धर्म की मान्यता के अनुसार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को इसी क्षेत्र में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। वहीं बौद्ध धर्म में इसे आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान का केंद्र माना जाता है। 

कैलाश पर्वत के निकट स्थित मानसरोवर झील भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। समुद्र तल से लगभग 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह विश्व की सबसे ऊंची मीठे पानी की झीलों में से एक है। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने अपने मन से इस झील की रचना की थी, इसलिए इसका नाम ‘मानसरोवर’ पड़ा। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस झील में स्नान करने और इसका जल ग्रहण करने से पापों का नाश होता है तथा आत्मा को शुद्धि प्राप्त होती है। कैलाश पर्वत की परिक्रमा भी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। 

लगभग 52 किलोमीटर लंबी इस परिक्रमा को श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों में पूरा करते हैं। मान्यता है कि एक बार की परिक्रमा से जीवन के पापों का क्षय होता है, जबकि 108 परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी गहरी धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा को करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए जीवन की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है। वर्ष 2026 की यात्रा के शुभारंभ के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी होने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ गया है।

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