हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से लंबित संगठनात्मक फेरबदल को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने शिमला ग्रामीण और किन्नौर जिला कांग्रेस कमेटियों के लिए नए अध्यक्षों की नियुक्ति कर संगठन में नई सक्रियता का संकेत दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नियुक्ति आदेश जारी किए, जिसके तहत शिमला ग्रामीण की कमान हरिकृष्ण हिमराल और किन्नौर जिला कांग्रेस की जिम्मेदारी नेगी निगम भंडारी को सौंपी गई है। इन दोनों जिलों में डेढ़ साल से अधिक समय से जिलाध्यक्ष का पद खाली था। संगठन के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच सहमति नहीं बनने की वजह से नियुक्तियां लगातार टल रही थीं। ऐसे में हाईकमान ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए नए चेहरों पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस के अंदर शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा किन्नौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हो रही है। यहां नेगी निगम भंडारी की नियुक्ति कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भंडारी लंबे समय से युवा कांग्रेस के जरिए संगठन में सक्रिय रहे हैं और वर्तमान में अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव हैं। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और खासकर राहुल गांधी के साथ उनकी नजदीकियों की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में होती रही है। किन्नौर में उनकी नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उन्हें राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी का राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।
दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं और यही वजह थी कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति पर लंबे समय तक सहमति नहीं बन सकी। माना जा रहा है कि मंत्री जगत सिंह नेगी ने उमेश नेगी, प्रेम कुमार और निर्मल चंद के नाम संगठन के सामने रखे थे, लेकिन हाईकमान ने इन सभी विकल्पों को दरकिनार करते हुए निगम भंडारी पर भरोसा जताया। निगम भंडारी का नाम वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी सुर्खियों में आया था। उस समय किन्नौर विधानसभा सीट से उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी और इसी कारण जगत सिंह नेगी के टिकट की घोषणा पहली सूची में नहीं हो सकी थी। हालांकि बाद में पार्टी ने जगत सिंह नेगी को उम्मीदवार बनाया, लेकिन भंडारी का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ता रहा। अब जिला अध्यक्ष बनने के बाद संगठन में उनकी भूमिका और अधिक मजबूत होने की संभावना है।
शिमला ग्रामीण में भी हाईकमान ने चौंकाया, कई दिग्गजों की पसंद से अलग हरिकृष्ण हिमराल पर जताया भरोसा
शिमला ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद पर हरिकृष्ण हिमराल की नियुक्ति भी कम महत्वपूर्ण नहीं मानी जा रही है। इस पद के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार सहित कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों के नाम चर्चा में थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि संगठन में गुटीय समीकरणों को देखते हुए किसी एक खेमे की पसंद को प्राथमिकता दी जा सकती है, लेकिन हाईकमान ने अलग फैसला लेते हुए हरिकृष्ण हिमराल को जिम्मेदारी सौंप दी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने सुधीर आजाद के नाम का समर्थन किया था, जबकि विक्रमादित्य सिंह और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह महेंद्र स्तान और रूपेश कंवल के पक्ष में बताए जा रहे थे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की ओर से यशपाल तनाइक का नाम आगे बढ़ाया गया था। इसके अलावा राहुल गांधी की टीम से जुड़े दीपक राठौर भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे थे। इन सभी चर्चाओं के बीच पार्टी हाईकमान ने कुलदीप राठौर के करीबी माने जाने वाले हरिकृष्ण हिमराल को जिम्मेदारी देकर स्पष्ट संकेत दिया कि संगठनात्मक फैसलों में अंतिम मुहर केंद्रीय नेतृत्व की ही होगी। दोनों नियुक्तियों के साथ कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए नए नेतृत्व को अवसर दिया जाएगा। अब दोनों जिलाध्यक्षों के सामने अपनी कार्यकारिणी का गठन करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए संगठन को तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।
गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने 6 नवंबर 2024 को हिमाचल प्रदेश की राज्य, जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग कर दिया था। इसके बाद नवंबर 2025 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति की गई और पिछले कुछ महीनों में कई जिलों में नए अध्यक्षों की तैनाती की गई। शिमला ग्रामीण और किन्नौर में नियुक्तियों के साथ लंबे समय से चली आ रही संगठनात्मक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। इन नियुक्तियों का असर केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश कांग्रेस के अंदर गुटीय समीकरणों और स्थानीय राजनीति पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नए जिलाध्यक्ष संगठन को कितना मजबूत कर पाते हैं और पार्टी के विभिन्न धड़ों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में कितने सफल होते हैं।

