ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैन्य जवानों के नाम केंद्र सरकार ने 13 महीने बाद पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक कर दिए हैं। इन सभी शहीदों के नाम नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किए गए हैं। साथ ही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की 3D वॉल पर वर्ष 2025 के खंड में भी उनके नाम स्थायी रूप से अंकित कर दिए गए हैं। अब देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीरों का नाम हमेशा के लिए राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बन गया । नेशनल वॉर मेमोरियल के ‘त्याग चक्र’ में ग्रेनाइट की 16 गोलाकार दीवारें हैं, जिन पर आजादी के बाद देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सैनिकों के नाम, रैंक और उनकी यूनिट दर्ज की जाती है।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह जवानों के नाम भी अब इसी गौरवशाली सूची में शामिल हो गए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों के नाम ।
सूबेदार मेजर पवन कुमार, मुख्यालय, 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड
राइफलमैन सुनील कुमार, 4 जम्मू एवं कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (मरणोपरांत वीर चक्र) लांस नायक दिनेश कुमार, 5 फील्ड रेजिमेंट अग्निवीर मूड मुरली नायक, 851 लाइट रेजिमेंट, हवलदार सुनील कुमार सिंह, 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी, सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, 39 विंग, भारतीय वायुसेना (मरणोपरांत वायु सेना मेडल), इन छह शहीदों में राइफलमैन सुनील कुमार को उनकी असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया, जबकि भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु सेना मेडल प्रदान किया गया।
दोनों जवानों ने ऑपरेशन के दौरान अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का फैसला लिया। इसी के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने 6-7 मई 2025 की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर बड़ा सैन्य अभियान चलाया, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया।
9 आतंकी ठिकाने तबाह, 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल और हवाई हमले किए। भारत सरकार ने दावा किया था कि इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए और कई आतंकी प्रशिक्षण शिविर, लॉन्च पैड तथा हथियारों के ठिकाने पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। सरकार के अनुसार यह कार्रवाई पूरी तरह खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी और इसका उद्देश्य केवल आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था, किसी सैन्य या नागरिक ठिकाने को निशाना बनाना नहीं।
भारतीय सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी गतिविधियां तेज कर दीं, जिसके चलते दोनों देशों के बीच लगभग चार दिनों तक सैन्य तनाव बना रहा। इस दौरान सीमा पर गोलाबारी, ड्रोन गतिविधियां और हवाई अभियानों में तेजी देखी गई। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने पूरी तरह समन्वय के साथ देश की सीमाओं की सुरक्षा की और किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी बनाए रखी। पूरे देश की नजरें इस सैन्य घटनाक्रम पर टिकी रहीं और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थीं। आखिरकार 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई और संघर्ष विराम लागू कर दिया गया।
इसके साथ ही सीमा पर हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे, हालांकि भारतीय सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ तैनात रहे। करीब 13 महीने बाद सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए जाने को उनके सर्वोच्च बलिदान का राष्ट्रीय सम्मान माना जा रहा है। इन वीर सैनिकों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की ‘रोल ऑफ ऑनर’ सूची और 3D वॉल पर हमेशा के लिए दर्ज कर दिए गए हैं। यह केवल छह सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उन सभी जवानों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, जो देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से कभी पीछे नहीं हटते। आने वाली पीढ़ियां भी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित इन नामों को देखकर उनके अद्वितीय बलिदान और वीरता को याद करती रहेंगी।

