अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बुधवार को दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयान के बाद निवेशकों के बीच अनिश्चितता और चिंता का माहौल गहरा गया। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है और मौजूदा परिस्थितियों में उससे बातचीत करना केवल समय की बर्बादी है। उनके इस बयान ने पहले से ही तनावपूर्ण पश्चिम एशिया की स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसका सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर देखने को मिला, जहां कीमतों में छह प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया।
वहीं भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों दो प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। दिलचस्प बात यह रही कि वैश्विक तनाव के बावजूद घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी भी दबाव में रहे। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की नजर खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है तो पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
इसी आशंका ने निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया और बाजार में सुरक्षित रणनीति अपनाई जाने लगी। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लगातार महंगा होता है तो इसका असर महंगाई, परिवहन लागत, उद्योगों के खर्च और आर्थिक विकास की रफ्तार पर पड़ सकता है। इसी आशंका का असर भारतीय शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया, जहां लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली हावी रही।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता, तेल बाजार में आई तेज तेजी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब उनके हिसाब से समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से यह समझौता अब खत्म हो गया है। उनसे बात करना सिर्फ समय की बर्बादी है।” हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं होगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में यह आशंका और मजबूत कर दी कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो दुनिया भर में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी डर के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में तेज खरीदारी देखने को मिली।
ब्रेंट क्रूड करीब 6.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 6.36 प्रतिशत चढ़कर 74.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल की कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है। तेल की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,758.51 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 76,422.21 पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 545.45 अंक यानी 2.24 प्रतिशत टूटकर 23,853.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की कमजोरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निफ्टी 50 के केवल तीन शेयर बढ़त में रहे, जबकि 47 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सबसे ज्यादा दबाव ऑटो, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला।
इंडिगो का शेयर करीब 5.5 प्रतिशत टूट गया। श्रीराम फाइनेंस और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मारुति सुजुकी चार प्रतिशत से ज्यादा फिसल गई, जबकि बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट और एलएंडटी जैसे दिग्गज शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, अडाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टीसीएस, एनटीपीसी, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा समेत कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। इससे साफ है कि बिकवाली केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग पूरे बाजार में निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई। दूसरी ओर, आमतौर पर वैश्विक तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स 2,228 रुपये यानी 1.53 प्रतिशत गिरकर 1,42,837 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं सिल्वर फ्यूचर्स 6,748 रुपये यानी करीब तीन प्रतिशत टूटकर 2,23,026 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में बढ़ता है, उसी के आधार पर वैश्विक वित्तीय बाजारों की चाल तय होगी। यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर महंगाई, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी देखने को मिलेगा। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और तनाव कम होता है तो बाजारों में एक बार फिर स्थिरता लौटने की उम्मीद की जा सकती है।

