अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की चोरी के मामले में पुलिस जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के दौरान ऐसे कई खुलासे हुए हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। पुलिस के अनुसार, मंदिर के चढ़ावे से कथित रूप से चोरी की गई रकम का इस्तेमाल शेयर बाजार में निवेश करने और ऊंचे ब्याज पर लोगों को पैसा उधार देने के लिए किया जाता था। यही नहीं, लेन-देन को छिपाने के लिए रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया गया। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपित अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। इन तीनों की कस्टडी रिमांड गुरुवार रात 10 बजे पूरी हो रही है, जिसके बाद उन्हें दोबारा जिला कारागार भेज दिया जाएगा।
रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने आरोपितों को कई स्थानों पर ले जाकर पूछताछ की और घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे चोरी से हासिल रकम को सीधे अपने खातों में जमा नहीं करते थे। किसी प्रकार का संदेह न हो, इसके लिए वे अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में पैसा ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद यह रकम अलग-अलग माध्यमों से शेयर बाजार में निवेश की जाती थी। पुलिस को संदेह है कि लंबे समय से यह तरीका अपनाया जा रहा था और इसी कारण शुरुआती दौर में किसी को इस गड़बड़ी की भनक नहीं लगी। जांच के दौरान पुलिस ने करीब 30 परिचितों और रिश्तेदारों के बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है। इन खातों में आय के मुकाबले कहीं अधिक लेन-देन मिलने के बाद कार्रवाई की गई है। पुलिस अब इन खातों में हुए प्रत्येक वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की रकम आखिर किन-किन लोगों तक पहुंची और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया। रिमांड के दौरान पुलिस टीम आरोपितों को लवकुश मिश्रा के घर भी लेकर गई, जहां तलाशी अभियान चलाया गया।
इसके अलावा अयोध्या के अन्य स्थानों पर भी आरोपितों को ले जाकर घटनास्थलों और संदिग्ध स्थानों का सत्यापन कराया गया। हालांकि पुलिस के हाथ अब तक कोई बड़ी नकदी नहीं लगी है। सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा के एक रिश्तेदार ने करीब 20 हजार रुपये पुलिस को वापस किए हैं। पुलिस इस रकम के स्रोत और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस ने आरोपितों के मोबाइल फोन भी खंगाले हैं। मोबाइल से बरामद चैट में चोरी के पैसों के बंटवारे, हिस्सेदारी और आपसी विवाद से जुड़ी कई बातें सामने आई हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि चैट रिकॉर्ड से पूरे नेटवर्क और चोरी की रकम के प्रवाह की विस्तृत जानकारी मिल सकती है।
रिश्तेदारों और कारोबारी कनेक्शन की भी जांच, पुलिस की नजर पूरे नेटवर्क पर
जांच के दौरान पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा के पिता रवींद्र मिश्र, चाचा रामेंद्र मिश्र और सराफा कारोबारी विजय कौशल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ जारी रखी है। पुलिस का आरोप है कि विजय कौशल, अनुकल्प द्वारा दिए गए चोरी के आभूषणों को गलाकर उनका स्वरूप बदल देता था, ताकि उनकी पहचान न हो सके। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चोरी के आभूषण कितनी मात्रा में बेचे गए और उनसे प्राप्त रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी की रकम का एक हिस्सा शेयर बाजार में निवेश करने के अलावा ऊंची ब्याज दर पर लोगों को उधार भी दिया जाता था। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस तरह का वित्तीय नेटवर्क कब से संचालित हो रहा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिन बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, उनकी विस्तृत जांच के बाद यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला केवल मंदिर से धन की चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह कथित वित्तीय अनियमितताओं, निवेश, बैंकिंग नेटवर्क और संभावित धन शोधन की दिशा में भी जांच का विषय बन चुका है। पुलिस की कोशिश है कि चोरी की पूरी रकम का पता लगाया जाए, उससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट हो और मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

