हिमाचल में बारिश का कहर : भूस्खलन से जनजीवन बेहाल, अब तक 66 मौतें, नुकसान एक हजार करोड़ के पार

हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश का दौर भले ही कुछ स्थानों पर रुक-रुककर जारी है, लेकिन इसके बाद हो रहे भूस्खलन और पहाड़ों से गिरते मलबे ने लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं लिया है। राज्य के कई जिलों में सड़कें बाधित हैं, बिजली और पेयजल व्यवस्था प्रभावित है, जबकि लोगों के सामने आवाजाही और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है। प्रशासन लगातार राहत और बहाली कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण हालात सामान्य होने में समय लग रहा है। इस बीच ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी ने मौसम को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सरकार ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। गुरुवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर बारिश होती रही। वहीं, लाहौल-स्पीति के बारालाचा, कुंजुम और कुल्लू के रोहतांग दर्रे में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव का सबसे अधिक असर पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं।

राजधानी शिमला के भट्ठाकुफर स्थित फल मंडी के ऊपर शिव मंदिर के पास अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर नीचे आ गिरे। जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान फल मंडी परिसर में कई वाहन खड़े हुए थे। मलबा और पत्थर गिरने से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि समय रहते लोग सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर क्षेत्र की घेराबंदी की और स्थिति का जायजा लिया। इसी तरह शिमला के टुटू क्षेत्र में भी पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटना सामने आई। यहां सड़क किनारे खड़ी एक कार पर पत्थर गिरने से वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि उस समय कार के भीतर कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि लगातार बारिश के बाद पहाड़ियां कमजोर हो गई हैं और कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं।

बारिश के चलते प्रदेश के अनेक हिस्सों में आवाजाही भी प्रभावित हुई है। कई संपर्क मार्ग बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है। इससे लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार सड़कें खोलने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण बहाली कार्यों में बाधा आ रही है। लाहौल-स्पीति जिले का महत्वपूर्ण जाहलमा नाला छोटे और बड़े वाहनों के लिए फिर से खोल दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को कुछ राहत मिली है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि मौसम खराब होने की स्थिति में मार्ग को फिर से बंद किया जा सकता है। इसलिए यात्रियों को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है।

राज्य में 136 सड़कें बंद, बिजली और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित

मानसून की मार का असर प्रदेश के बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में अब भी करीब 136 संपर्क सड़कें बंद पड़ी हैं। इसके अलावा 64 बिजली ट्रांसफार्मर ठप होने से कई गांवों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित है। वहीं, 375 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित होने के कारण हजारों लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली विभाग और जल शक्ति विभाग की टीमें लगातार मरम्मत कार्य में लगी हुई हैं। कई दुर्गम क्षेत्रों में मशीनें पहुंचाना मुश्किल हो रहा है, जिससे बहाली कार्य अपेक्षा से धीमी गति से चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही सभी सेवाओं को जल्द से जल्द सामान्य करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रदेश सरकार के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं से राज्य को लगभग एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सबसे अधिक क्षति सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, बिजली व्यवस्था और सरकारी भवनों को हुई है। इसके अलावा कृषि और बागवानी क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर किसानों की फसलें और बागान प्रभावित हुए हैं, जिससे उनकी आजीविका पर भी संकट गहरा गया है। मानसून से जुड़ी घटनाओं में अब तक प्रदेश में 66 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें भूस्खलन, मकान ढहने, बाढ़, सड़क हादसों और अन्य बारिश संबंधी घटनाओं में हुई मौतें शामिल हैं। कई लोग घायल भी हुए हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और जहां भूस्खलन की आशंका अधिक है, वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन लगातार मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ियों की मिट्टी में नमी बढ़ गई है, जिससे भूस्खलन का खतरा अभी बना हुआ है। ऐसे में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।

फिलहाल हिमाचल प्रदेश में राहत और बहाली का काम युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन मौसम की चुनौती के बीच सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी पर लौटने में अभी समय लग सकता है। सरकार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं को बहाल किया जा रहा है ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

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