मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी दलों के आईएनडीआईए ब्लॉक की बुधवार को दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में एसआईआर की प्रक्रिया, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आयोग के भीतर सामने आए कथित मतभेदों समेत कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। विपक्षी दल इस बैठक के जरिए आगे की संयुक्त रणनीति तय करने की तैयारी में हैं। खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवाल और उनके खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, बैठक में विपक्षी गठबंधन के सभी प्रमुख दलों की मौजूदगी नहीं होगी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल बैठक में पहुंचेगा। वहीं शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। पार्टी सांसद संजय राउत के मुताबिक, पार्टी इस समय 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारियों में जुटी है।
बैठक में तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके और आम आदमी पार्टी की ओर से भी कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा। विपक्षी गठबंधन में शामिल दलों के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक और चुनावी मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि बुधवार की बैठक में एकजुटता के साथ-साथ गठबंधन के भीतर के मतभेदों को लेकर भी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच मतभेद सामने आए थे। दोनों दलों के बीच चुनावी रणनीति और राजनीतिक समीकरणों को लेकर अलग-अलग रुख देखने को मिला है। दूसरी ओर दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसके बाद दोनों दलों के बीच दूरी और बढ़ गई। आम आदमी पार्टी की ओर से यह स्पष्ट किया जाता रहा है कि जिस मंच पर कांग्रेस मौजूद होगी, वहां उसके शामिल होने को लेकर उसकी अपनी राजनीतिक स्थिति है।
आईएनडीआईए ब्लॉक की स्थापना के बाद से विपक्षी दलों की यह पिछले करीब तीन वर्षों में आठवीं बैठक होगी। इस साल यह दूसरी बैठक है। इससे पहले 8 जून को विपक्षी दलों ने एसआईआर और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर बैठक की थी। उस बैठक में भी आम आदमी पार्टी और डीएमके शामिल नहीं हुई थीं। ऐसे में बुधवार की बैठक में एक बार फिर विपक्षी एकजुटता और साझा आंदोलन की दिशा तय करना प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा। विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिनसे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्षी दल चुनाव आयोग से प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया और निर्णयों को नियमों के अनुरूप बताता रहा है। बैठक में चुनाव आयोग के भीतर सामने आए कथित मतभेदों को लेकर भी विपक्षी दल अपना रुख तय कर सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में हटाने का प्रस्ताव लाने की मांग पहले ही विपक्षी दलों की ओर से उठाई जा चुकी है। इसके साथ ही उनके इस्तीफे की मांग को लेकर भी राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
बैठक में सड़क से संसद तक आंदोलन की रणनीति पर होगी चर्चा
बैठक में सबसे अहम चर्चा एसआईआर विवाद को लेकर संयुक्त आंदोलन की रणनीति पर हो सकती है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद के साथ-साथ सड़क पर भी उठाने की तैयारी कर रहे हैं। 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बैठक में यह तय किया जा सकता है कि अलग-अलग दल अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे या फिर संयुक्त रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विपक्षी दल संसद में भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की तैयारी में हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर संसद में संभावित प्रस्ताव और उसकी प्रक्रिया पर भी बैठक में विचार किया जा सकता है। इसके अलावा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, उसकी निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर सहमति बनाने की कोशिश होगी।
बैठक में शामिल होने वाले दलों के सामने एक बड़ी चुनौती गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों के बीच साझा रणनीति तैयार करने की भी होगी। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) समेत कई दल एसआईआर के मुद्दे पर साथ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन डीएमके और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति गठबंधन की व्यापक एकजुटता पर सवाल खड़े करती है। इसके बावजूद विपक्षी दल इस मुद्दे पर साझा राजनीतिक रुख सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव की अनुपस्थिति के बावजूद समाजवादी पार्टी की भागीदारी यह संकेत देती है कि पार्टी एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी चर्चा से अलग नहीं रहना चाहती। वहीं उद्धव ठाकरे का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ना भी बैठक में शिवसेना (यूबीटी) की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। दूसरी तरफ डीएमके और आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी के कारण बैठक में उनकी अनुपस्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।
विपक्षी दलों के सामने अब मुख्य सवाल यह है कि एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे की लड़ाई किस तरीके से लड़ी जाए। संसद के भीतर विरोध, चुनाव आयोग के सामने अपनी आपत्तियां रखने और देशभर में संयुक्त प्रदर्शन जैसे विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक के बाद विपक्षी दल अपने अगले कार्यक्रम और आंदोलन की दिशा को लेकर तस्वीर साफ कर सकते हैं।
इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि एसआईआर का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रहा है। विपक्षी दल इसे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जोड़कर उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा जाता रहा है। ऐसे में बुधवार की बैठक के बाद विपक्ष की ओर से सामने आने वाला साझा रुख आने वाले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

